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हाथ-पैर में फैला गैंगरीन, रेडियो फ्रिक्वेंसी से इलाज

रायपुर | रायगढ़ की 14 साल की विशाखा के दोनों पैर व हाथों की उंगलियों में गैंगरीन फैल गया था। इससे उन्हें असहनीय दर्द...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:25 AM IST

रायपुर | रायगढ़ की 14 साल की विशाखा के दोनों पैर व हाथों की उंगलियों में गैंगरीन फैल गया था। इससे उन्हें असहनीय दर्द होता था। पैर व उंगलियां काली पड़ने लगी थी। वह परीक्षा भी नहीं दे पा रही थी। इसके बाद परिजन उन्हें देवेंद्रनगर स्थित श्री नारायणा अस्पताल लेकर गए। यहां रेडियो फ्रिक्वेंसी एबिलिएशन जैसी नई तकनीक से गैंगरीन का सफल इलाज किया गया। अब बालिका की स्थिति पहले से बेहतर है। प्रेस कांफ्रेंस में नारायणा अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुनील खेमका ने बताया कि नर्वस सिस्टम की ओवर एक्टिविटी के कारण उंगलियों में खून की सप्लाई नहीं हो रही थी। इससे उंगलियां काली पड़ने लगी थीं। जब बालिका अस्पताल पहुंची तो असहनीय पीड़ा से परेशान थी। अस्पताल के पैन मैनेजमेंट विशेषज्ञ डॉ. पंकज ओमर ने बालिका की स्थिति की जांच की तो पता चला कि बालिका को गैंगरीन नामक भयावह बीमारी हो गई है।





इसके बाद रेडियो फ्रिक्वेंसी मशीन से बालिका का इलाज किया गया। उन्होंने बताया कि गैंगरीन का इलाज रेडियो फ्रिक्वेंसी तकनीक से ही संभव है। इस तकनीक से ऑपरेशन से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है। इस तकनीक में सबसे पहले गले व कमर की नसों को निष्क्रिय कर दिया गया। इससे खून की सप्लाई फिर से शुरू हो गई और मरीज को असहनीय दर्द से राहत मिलने लगी। ऑपरेशन के बाद वह बेड से बाहर निकलकर चलने भी लगी। उंगलियों का चलना भी शुरू हो गया। उंगलियों का कालापन में वृद्धि भी खत्म हो गई है। अब बालिका अपना दैनिक काम खुद करने लगी है। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में कोल्ड रेडियो फ्रिक्वेंसी मशीन देश की पांचवीं मशीन है।

धूम्रपान करने वालों काे गैंगरीन

डॉ. खेमका ने बताया कि धूम्रपान करने वालों को गैंगरीन होने की आशंका ज्यादा होती है। कई मरीजों में देखा गया है कि जो धूम्रपान नहीं करते, उन्हें भी यह बीमारी हो जाती है। नर्वस सिस्टम की ओवर एक्टिविटी के कारण खून की सप्लाई बंद हो जाती है। इससे शरीर के प्रभावित अंग सूखने लगता है और काला पड़ने लगता है। मरीज अपंग होने लगता है। तत्काल इलाज नहीं करने में कई बार प्रभावित अंगों को काटने की जरूरत पड़ जाती है।

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