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रविवि ने हजार करोड़ का प्रोजेक्ट किया तैयार, यूजीसी को 10 स्लाइड का प्लान

पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने हजार करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए सोमवार को 10 स्लाइड में यूजीसी को 15 साल का प्लान...

Danik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:25 AM IST
पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने हजार करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए सोमवार को 10 स्लाइड में यूजीसी को 15 साल का प्लान भेज दिया है। सभी स्लाइड अलग अलग विषय की है। किसी में एकेडमिक, तो किसी में रिसर्च को लेकर प्लान बनाया गया है। बजट, अपनी क्षमता और प्रोजेक्ट को पूरा करने की कार्ययोजना की भी स्लाइड है।

पिछले हफ्ते यूजीसी से रविवि को पत्र भेजकर आवेदन स्वीकृति की जानकारी दी गई। उसी के आधार पर दस स्लाइड में पूरे 15 साल के प्लान की जानकारी भेजी गई है। अफसरों का कहना है कि इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस की घोषणा जून से पहले होने की संभावना है। विश्वविद्यालय का चयन होने पर यह आस-पास के दूसरे राज्यों मप्र, उड़ीसा, झारखंड का पहला राजकीय विवि होगा। स्लाइड के आधार पर प्लान मंजूरी होने पर विश्वविद्यालय का नाम बढ़ेगा। इसके अलावा छात्रों के दृष्टिकोण से भी फायदेमंद होगा। नवंबर-दिसंबर 2017 में इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के लिए देशभर के विश्वविद्यालय व अन्य शिक्षण संस्थानों से आवेदन मंगाए गए थे।

आवेदन की फीस एक करोड़ होने के कारण छत्तीसगढ़ के राजकीय संस्थानों में केवल रविवि ने ही योजना के लिए आवेदन किया। कुछ दिन पहले यूजीसी से रविवि को चिट्ठी मिली। इसमें आवेदन स्वीकार होने की जानकारी दी गई। साथ ही दस स्लाइड में अपना पूरा प्लान भेजने के लिए कहा गया। उसके बाद दस स्लाइड तैयार कर यूजीसी को भेजा गया।

पांच साल के लिए मिलेगा फंड :

इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस में चयन होने के बाद पांच साल के लिए हजार करोड़ मिलेंगे, जबकि यूजीसी से संस्थानों से पंद्रह साल का प्लान मांगा गया है। यानी शिक्षण संस्थानों को यूजीसी को यह बताना होगा कि पांच साल के बाद यदि फंडिंग बंद हो जाती है तो फिर अधूरे काम कैसे पूरे करेंगे। पंद्रह साल का जो प्लान बनाया है उसे कैसे आकार देंगे? इसी को लेकर 20 अप्रैल से लेकर 10 मई के बीच किसी एक दिन दिल्ली में प्रजेंटेशन होगा। इसके लिए संस्थानों को जानकारी भेजी जाएगी। उन्हें दस स्लाइड के लिए 15 से 20 मिनट का समय दिया जाएगा। इसी अवधि में पूरी जानकारी देनी होगी। गौरतलब है कि देश के टॉप 20 शिक्षण संस्थाओं को प्रतिष्ठित संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस) के तौर पर चयन होगा। यह चयन यूजीसी करेगी। इनमें से 10 पब्लिक सेक्टर से जुड़े संस्थान होंगे, जबकि 10 निजी। पब्लिक सेक्टर के संस्थानों को सरकार से 1000 करोड़ तक का अनुदान मिल सकता है।

यह होगा फायदा

इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस में विश्वविद्यालय का चयन होने के बाद कई तरह के फायदे होंगे। यहां नए कोर्स किए जा सकेंगे। रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। छात्राें के प्लेसमेंट की स्थिति बेहतर होने के संकेत हैं। अभी नए कोर्स के प्रति रविवि का रुझान कम है। शिक्षाविदों ने बताया कि रिसर्च के लिए विवि में माहौल बनेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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