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बांध को लेकर छत्तीसगढ़ ने दर्ज कराई कड़ी आपत्ति

News - भास्कर न्यूज | कोलकाता/रायपुर कोलकाता में सोमवार को जल संसाधनों पर पूर्वी राज्यों के क्षेत्रीय सम्मेलन में जल...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:25 AM IST
बांध को लेकर छत्तीसगढ़ ने दर्ज कराई कड़ी आपत्ति
भास्कर न्यूज | कोलकाता/रायपुर

कोलकाता में सोमवार को जल संसाधनों पर पूर्वी राज्यों के क्षेत्रीय सम्मेलन में जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र से ओडिशा और आंध्रप्रदेश की अंतरराज्यीय सिंचाई योजनाओं में छत्तीसगढ़ के किसानों के हित में प्रदेश के प्रस्तावों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की।

अग्रवाल ने पोलावरम, ईब नदी पर बन रहे बांधों की ऊंचाई को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने केन्द्रीय जल आयोग से छत्तीसगढ़ की केलो वृहद परियोजना की पुनरीक्षित लागत 990 करोड़ 34 लाख रुपए की स्वीकृति जल्द दिलाने का अनुरोध किया। अग्रवाल ने ओडिशा की ईब नदी, तेलगिरी, नवरंगपुर, खड़गा बैराज, अपरजोंक (पतोरा बांध), पोलावरम, इंद्रावती जोरा नाला विवाद, गोदावरी (इंचमपल्ली), कावेरी (ग्राण्ड एनीकट) लिंक परियोजना के संबंध में छत्तीसगढ़ का पक्ष रखा। अग्रवाल ने ईब नदी पर ओडिशा की प्रस्तावित सिंचाई परियोजना के अंतर्गत जलाशय के जल स्तर पर आपत्ति की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में छत्तीसगढ़ की 110 हेक्टेयर कृषि भूमि डूबान में आने वाली है।

इससे प्रभावित किसान भूमिहीन हो जाएंगे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के कुल भौगोलिक क्षेत्र में कमी हो जाएगी। छत्तीसगढ़ में ईब नदी के जलग्रहण क्षेत्र के बहाव का 25 प्रतिशत जल इस परियोजना को देने के बावजूद छत्तीसगढ़ को विद्युत और सिंचाई का लाभ नहीं मिलेगा। बैठक में अपरजोंक अंतरराज्यीय जलाशय परियोजना में जलभराव के अनुसार आनुपातिक पानी छत्तीसगढ़ को दिए जाने की सहमति दी गई।



इसके बाद भी छत्तीसगढ़ को इस परियोजना से 0.6966 क्यूसेक पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिसके कारण निर्धारित 810 हेक्टेयर में सिंचाई नहीं हो पा रही है।

पोलावरम परियोजना में बांध की ऊंचाई 177 फीट रखने पर छत्तीसगढ़ को आपत्ति जल संसाधन मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की कोंटा तहसील का क्षेत्र डूबान में संभावित है। पोलावरम बांध कोंटा से लगभग 130 किलोमीटर नीचे की ओर बन रहा है। पोलावरम बांध के निर्माण के संबंध में तत्कालीन मध्यप्रदेश के समय सात अगस्त 1978 के अनुबंध के तहत कोंटा में बैक वाटर प्रभाव सहित अधिकतम जल स्तर 150 फीट रखने की सशर्त सहमति प्रदान की गई थी। इस सहमति के विपरीत अधिकतम जल स्तर (बांध की ऊंचाई) 177 फीट होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को आपत्ति है। यह प्रकरण उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है।


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