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किसानों की मुआवजा राशि से काटा इनकम टैक्स, पर जमा नहीं किए, अभनपुर और रायपुर एसडीएम को नोटिस

रायपुर. रायपुर और इससे लगे अभनपुर में सरकार के आदेशों के विपरीत किसानों की खेती जमीन लेने के बाद मुआवजे पर इनकम...

Danik Bhaskar

May 17, 2018, 03:25 AM IST
रायपुर. रायपुर और इससे लगे अभनपुर में सरकार के आदेशों के विपरीत किसानों की खेती जमीन लेने के बाद मुआवजे पर इनकम टैक्स और स्टांप शुल्क काटने का खुलासा हुआ है। गड़बड़ी सामने आने पर अभनपुर और रायपुर एसडीएम को राजस्व विभाग ने नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार को बड़े प्रोजेक्ट के लिए जमीन की जरूरत पड़ रही है। कई जगहों पर किसानों की जमीन भी ली जा रही है। सरकार का ही नियम है कि कृषि जमीन पर टीडीएस और स्टांप शुल्क नहीं काटा जाएगा। बताया जा रहा है कि ऐसा अफसरों की मिलीभगत से हुआ है। जांच में कुछ और किरदार भी सामने आ सकते हैं।

दरअसल, राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल काफी दिनों से चल रहा है। किसानों से लाखों रुपए टीडीएस लेकर इनकम टैक्स विभाग को जमा ही नहीं किया जा रहा है। माना और गोबरा-नवापारा में ऐसे मामले खुलने के बाद सूत्रों ने दावा किया है कि ये तो राजधानी के नजदीक और रायपुर जिले की बात है, जबकि दूरस्थ स्थानों में यह गड़बड़ी और भी बड़े पैमाने है। जानकारों के मुताबिक आयकर अधिनियम की धारा 2 (14) में प्रावधान है कि सरकार किसी वजह से जमीन का शेष|पेज 8





अनिवार्य अधिग्रहण कर रही है और उसका मुआवजा दे रही है तो इनकम टैक्स नहीं लगेगा। गलत ढंग से टैक्स काटने को लेकर ही अभनपुर और रायपुर के तत्कालीन एसडीएम फंस गए हैं। अभनपुर एसडीएम ने न सिर्फ टैक्स काटा, बल्कि जमा भी नहीं कराया। जानकारों के अनुसार यह धोखाधड़ी का मामला है। जब आवेदक ने टैक्स वापस मांगने आवेदन लगाया तो इनकम टैक्स विभाग में इसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।



एकमुश्त काट ली जाती है किसानों की रकम

बताते हैं कि ट्रिब्यूनल ने मूलचंद साहा के केस में भूमि अधिग्रहण के बड़े मुआवजे में काटा गया टैक्स वापस करने के आदेश दिए थे। आयकर के जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में राजस्व अफसरों की लापरवाही सामने आई है, जिसमें पता चला है कि वे टैक्स तो काट लेते हैं लेकिन आयकर विभाग को नहीं देते। ऐसे मामलों पर आयकर विभाग ने सरकार को पत्र भी लिखा था। अफसर मुआवजे के मामलों किसानों की राशि एकमुश्त काट लेते हैं। बाद में दावा भुगतान वापस लेते समय रिटर्न में बताते हैं कि किस किसान के कितने रुपए थे। बताते हैं कि अभनपुर एसडीएम एडिशनल कलेक्टर बन गए हैं फिर भी एसडीएम का ही काम कर रहे हैं। इधर, रायपुर एसडीएम मिरी ने भी बड़ी मुश्किल से नई जगह ज्वाइनिंग दी है।

इन मामलों से हुआ खुलासा

जाकोटिया परिवार ने एक्सप्रेस-वे के लिए माना की ओर के एक भू अर्जन के मामले में सचिव राजस्व से शिकायत की है। इस केस में 40 लाख रुपए से अधिक राशि मुआवजे के तौर पर मिली थी, जिसमें टीडीएस काट लिया गया। इसी तरह अभनपुर तहसील के नवापारा के ग्राम बगदेही के भरतलाल ने मुख्यमंत्री से शिकायत की है कि जल संसाधन विभाग गोबरा-नवापारा में बाढ़ नियंत्रण तटबंध बना रहा है। इसके लिए भू-अर्जन अधिकारी ने पटवारी हल्का नं. 46, खसरा नंबर 462, 459 की जमीन अधिग्रहित की। इसका मुआवजा 2.84 लाख रुपए तय किया गया। 10 फीसदी के हिसाब से 28,417 रुपए काटकर 2,55,753 रुपए दिए गए। आईटी रिटर्न भरकर टीडीएस की राशि वापस मांगने पर पता चला कि इसे जमा ही नहीं कराया गया है।





0 राजस्व विभाग से नोटिस मुझे नहीं सारे कलेक्टरों को जारी हुआ है। उनसे टीडीएस नहीं काटने को कहा गया है। एक्सप्रेस-वे माना के भूअर्जन के मामले में जाकोटिया ने राजस्व सचिव को अभ्यावेदन दिया था। यह प्रकरण प्रोसेस में है। मैं परसों ही रायपुर एसडीएम के पद से हट गया हूं।

-हरवंश सिंह मिरी, तत्कालीन एसडीएम रायपुर



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0 क्या कहते हैं विशेषज्ञ

चार्टर्ड एकाउंटेंट चेतन तारवानी का कहना है कि आयकर अधिनियम की धारा 194 में प्रावधान है कि अगर जमीन अधिग्रहण का ढाई लाख रुपए से अधिक भुगतान हो रहा है तो 10 फीसदी टीडीएस कटेगा ही। इसमें केवल कृषिभूमि को मुक्त रखा गया है। पड़त भूमि, रोड या जमीन पर टीडीएस कटेगा। रूरल और अरबन के लिए अलग प्रावधान हैं। धारा-14 में बताया गया है कि अगर निकायों की सीमा से 8 किलोमीटर दूर जमीन है तो खेत की जमीन पर डीटीएस नहीं कटेगा। लेकिन निकाय की हद में जमीन आ रही या नहीं, इसमें कंफ्यूजन होता है। इसी वजह से टीडीएस काट लिया जाता है। इसे वापस करने का भी प्रावधान है। नगर निगम की सीमा में होने पर अलग-अलग टैक्स के प्रावधान हैं। दो साल से ज्यादा होने पर 20 प्रतिशत और दो साल से कम होने पर अलग कर लगता है। टीडीएस वापस लेने के लिए आवेदक को पहले रिटर्न भरना जरूरी है।

क्या कहते हैं अफसर



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