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खटारा गाड़ियों के परमिट रद्द, हटा नहीं पाए रोड से

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:30 AM IST

News - प्रशासनिक रिपोर्टर | रायपुर राजधानी और आसपास की करीब 300 बड़ी बसों को 12 और 15 साल पुरानी होने की वजह से आरटीओ ने उनके...

खटारा गाड़ियों के परमिट रद्द, हटा नहीं पाए रोड से
प्रशासनिक रिपोर्टर | रायपुर

राजधानी और आसपास की करीब 300 बड़ी बसों को 12 और 15 साल पुरानी होने की वजह से आरटीओ ने उनके परमिट रद्द तो कर दिए, लेकिन ये गाड़ियां अभी भी सड़कों पर फर्राटे से दौड़ रही हैं। जिन गाड़ियों के परमिट रद्द किए गए या जिन्हें कंडम घोषित किया गया, उसके डिस्पोजल पर विभागों में ठन गई है। पुलिस और आरटीओ में विवाद के चलते अफसरों के पास इस बात की भी जानकारी नहीं है कि पुरानी गाड़ियां अभी कहां खड़े की गई हैं या उनका क्या किया जा रहा है। नियमानुसार आरटीओ को ऐसी गाड़ियों को डिस्पोज करवाना है।

आरटीओ के अनुसार अभी 200 से ज्यादा बसें ऐसी जो 12 साल से ज्यादा पुरानी हैं और उनके परमिट रद्द नहीं किए गए हैं। इनमें से ज्यादातर बसें स्कूलों की हैं। शासन के नियमों के अनुसार 12 साल पुरानी स्कूल बसें और 15 साल पुरानी यात्री बसों को सड़कों से बाहर करना है। पुरानी बसों के मालिक ऐसे भी हैं जो एक या दो ही बस चला रहे हैं। इनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होने की वजह से परमिट रद्द होने के बाद ये गाड़ियां सड़कों पर चल रही हैं। गाड़ियों के मालिकों को अगस्त 2016 तक का समय गाड़ियां बदलने के लिए दिया गया था। तय समय के बाद ही अब कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इस पर सख्ती नहीं होने की वजह से पुरानी गाड़ियां बाहर नहीं हो रही हैं।

इसलिए नहीं हो रहा डिस्पोजल : जिन बसों के परमिट रद्द कर दिए गए हैं उन्हें डिस्पोज कराने की जिम्मेदारी आरटीओ की है। आरटीओ को ऐसी गाड़ियों को स्क्रैप का काम करने वाले या फिर जिनके लोहे के यार्ड हैं उन्हें देना है। आरटीओ ऐसे स्क्रैप डीलरों को गाड़ी का एनओसी देगी कि इस गाड़ी में कोई टैक्स बकाया नहीं है। इसके बाद वो गाड़ी स्क्रैप कारोबारियों को बेची जा सकेगी। गाड़ियों कटने के बाद स्क्रैप कारोबारी को आरटीओ को सूचना देना होगा कि गाड़ी डिस्पोज हो गई है। आरटीओ से अभी तक पुरानी गाड़ियों टैक्स फ्री होने की एनओसी नहीं दी जा रही है।

फायनेंस कंपनियां निशाने पर

आरटीओ के निशाने पर अब फायनेंस कंपनियां भी आ गई हैं। रायपुर आरटीओ को इस बात की सूचना मिली है कि फायनेंस कंपनियां जिन गाड़ियों में टैक्स बाकी है उसे भी रीसेल कर रही है। ऐसी गाड़ियों को स्क्रैप का कारोबार करने वाले खरीद रहे हैं। रायपुर आरटीओ ने इस मामले में पड़ताल की तो पता चला कि पिछले दो से पांच सालों में टैक्स बकाया हजारों गाड़ियां फायनेंस कंपनियों ने कबाड़ियों को बेच दी। इसलिए अब सख्ती की जा रही है एक भी लोहे के यार्ड में टैक्स बकाया गाड़ी न कट पाए। गाड़ियों की कटिंग रोकने के लिए ही कई स्क्रैप कारोबारियों के यार्ड भी बंद करवा दिए गए हैं।

राज्य में 3 हजार बसें अनफिट

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में रजिस्टर्ड दो हजार यात्री बसों में 450 बसें 12 साल से ज्यादा पुरानी हैं। इसके अलावा राज्यभर में करीब 8 हजार बसें हैं, जिनमें से 3 हजार पुरानी बसें अनफिट हैं। इन बसों के परमिट का नवीनीकरण इन सभी अनफिट बसों को सड़क से बाहर करने की तैयारी की गई है, लेकिन अभी तक कोई अभियान या बड़ी कार्रवाई शुरु नहीं की गई है।

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