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कलेक्टर ने गंगरेल बांध में निजी कंपनी से खतरा बताया फिर भी दिया ठेका, रद्द किया

राजधानी सहित प्रदेश के कई शहरों को पानी देने वाले गंगरेल बांध में एडवेंचर स्पोर्टस के नाम पर मनमानी करने वाली...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:30 AM IST

कलेक्टर ने गंगरेल बांध में निजी कंपनी से खतरा बताया फिर भी दिया ठेका, रद्द किया
राजधानी सहित प्रदेश के कई शहरों को पानी देने वाले गंगरेल बांध में एडवेंचर स्पोर्टस के नाम पर मनमानी करने वाली प्राइवेट कंपनी को लेकर कलेक्टर ने भी चेतावनी दी थी। कलेक्टर ने पत्र लिखकर वन विभाग और एरिगेशन अफसरों को खतरे से आगाह किया था। उन्होंने साफ लिखा था कि सुरक्षा केे नजरिये से प्राइवेट कंपनी का कामकाज ठीक नहीं है। इसके बावजूद ठेका दिया गया। इससे गंगरेल के मिनी गोवा के पीछे अफसरों और प्रभावशाली लोगों की सांठगांठ के संकेत मिले। हालांकि गांव वाले साफ-साफ राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगा रहे हैं।

भास्कर के हाथ कुछ गंगरेल बांध के ठेके से संबंधित कुछ अहम दस्तावेज लगे हैं। उसी में चिट्ठी से पता चला कि 28 मार्च को नागपुर की कृष्णाधाम बहुउद्देशीय संस्था काटोल का एडवेंचर स्पोर्टस और बोटिंग का ठेका निरस्त करने का आदेश जारी किया। उस आदेश में साफ लिखा कि ठेका शर्तों का उल्लंघन करने के कारण अनुबंध रद्द किया जा रहा है। ठेका निरस्त करने की उसी चिट्ठी में कलेक्टर के पत्र का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि कलेक्टर ने भी कंपनी सिस्टम को सुरक्षा मानकों के अनुरुप नहीं बताया है। चिट्ठी में अनुबंध की शर्तों का उल्लेख करते हुए लिखा गया एडवेंचर स्पोर्टस का ठेके को लेकर गांव की मानव वन समिति के अध्यक्ष की ओर से अगर आपत्ति की जाती है तो अनुबंध निरस्त कर दिया जाएगा। इससे साफ होता है कि ठेका आगे बढ़ाने का फैसला गांव वालों की समिति को सौंपा गया था। समिति ने ठेका बढ़ाने का खुलकर विरोध किया था। उसके बावजूद कंपनी को ठेका दिया गया। समिति के पदाधिकारी और सदस्य इसी वजह से प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप का आरोप लगा रहे हैं। वन विभाग ने जिस तरह 28 मार्च को ठेका निरस्त करने के बाद अचानक उसी कंपनी को ठेका दिया है, उसी से माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे प्रभावशाली लोग हैं।

पूरा सिस्टम एरिगेशन विभाग के पास, लेकिन आंख बंद कर बैठे रहे

गंगरेल का पानी और उसके दोनों पार के कुछ हिस्से पूरी तरह से एरिगेशन विभाग के अधिकार में है। एरिगेशन विभाग की मंजूरी के बिना कोई हाई स्पीड मोटर बोट तो दूर नाैका तक नहीं उतार सकता। इसके बावजूद प्राइवेट कंपनी न सिर्फ तरह तरह की नौका और स्पीड बोट चला रही बल्कि ऐसे ऐसे इलाके में नौका भेज रही है, जहां ले जाने की अनुमति नहीं है। हद तो तब पार हुई जब पूरे इलाके को मिनी गोवा के रूप में प्रचारित कर कंपनी ने ऐसे बाथरुम और शौचालय बना लिए जिसकी गंदगी और गंदा पानी गंगरेल के पानी में जा रहा था। फिर भी अफसर आंख मूंदकर बैठे हैं। कुछ अफसर तर्क दे रहे हैं कि कलेक्टर की अनुमति से नौका चलायी जा रही है। इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते।

गोवा के नाम पर शराब के साथ नशाखोरी और रेव पार्टी

गांव वालों का आरोप है गंगरेल के दूसरे पार पर मिनी गोवा बनाने के नाम पर नशे का कारोबार किया जा रहा है। एक तरफ तो वहां बांध के किनारे ऐसे शौचालय बनाए जिसकी गंदगी पानी में जा रही है, वहीं दूसरी ओर वहां दिनभर के मनोरंजन के नाम पर शराब और नशाखोरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार प्राइवेट कंपनी एक हजार से लेकर पांच हजार के पैकेज पर गंगरेल के एक पार से पर्यटकों को दूसरे पार ले जाती है, वहां जंगली इलाका है। उसी हिस्से को मिनी गोवा बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार एक तरह से रेव पार्टिंयां करवाने की तैयारी है। इतनी अनियमितता होने के बावजूद ठेका दिया गया है।

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