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बांध, एनीकट, तालाब का आज से सर्वे करने निकलेंगे इंजीनियर

प्रदेश में आठ विशाल सिंचाई परियोजनाओं, 35 मध्यम परियोजनाओं, 1698 छोटे बांधों, 585 व्यपवर्तन तथा 766 एनीकटों व स्टाप डेमों...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:30 AM IST

बांध, एनीकट, तालाब का आज से सर्वे करने निकलेंगे इंजीनियर
प्रदेश में आठ विशाल सिंचाई परियोजनाओं, 35 मध्यम परियोजनाओं, 1698 छोटे बांधों, 585 व्यपवर्तन तथा 766 एनीकटों व स्टाप डेमों को नया रूप मिलेगा। वर्तमान में जिन उद्देश्यों के लिए इनका निर्माण किया गया उस क्षमता के मुताबिक ये खेतों को सिंचने या पानी उपलब्ध कराने में सक्षम साबित नहींं हुए हैं। न जनता को लाभ मिल रहा है और नहीं किसानों को। इसकी वजह है रखरखाव में कमी, जल संग्रहण क्षमता का निरंतर हास, तथा नहरों में टूट-फूट से बहाव या प्रवाह क्षमता में कमी आना है।

ये खुलासा हुआ है सिंचाई विभाग की सर्वे रिपोर्ट में। अब इन बांधों, तालाबों, एनीकटों-स्टापडेमों के लिए समयबद्ध अभियान चलाया जाएगा। इसमें इनकी कमियों का आंकलन करके जो कल्पना इनके निर्माण के वक्त की गई थी उसकी स्टडी करके क्षमता पाने के लिए मेगा प्लान बनाया जाएगा। इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वह सोच जिसमें किसानों को तीन फसलें लेने की सुविधा दिलाना ताकि उनकी आमदनी दोगुनी की जा सके। सिंचाई विभाग ने इस पर अमल शुरू कर दिया है। विभाग के सचिव सोनमणि वोरा ने ईएनसी, चीफ इंजीनियर, सुपरीटेंडेंट इंजीनियर व एक्जीक्यूटिव इंजीनियरों को पत्र लिखा है। 30 अप्रैल तक मास्टर्स ट्रेनर्स की नियुक्ति व प्रशिक्षण होगा। एक मई से 10 मई तक सर्वे के लिए प्रभारी इंजीनियरों को ट्रेनिंग देंगे। 14 से 26 मई तक डैम, एनीकट, स्टापडैम आदि का सर्वे होगा। 14 से 31 मई तक योजनाओं की ग्रेडिंग होगी। मई और जून में बनाई प्लानिंग पर अमल होगा। विभाग के सचिव वोरा के अनुसार वृहद योजनाओं के लिए सर्वे अलग से होगा।

अफसरों के साथ योजना पर चर्चा करते जलसंसाधन सचिव सोनमणि बोरा।

क्या बांधों व तालाबों का उपयोग है अभी

खेतों में सिंचाई के लिए पानी, शहरों को पीने का पानी देना, उद्योगों को पानी देना, बिजली बनाना के लिए जल और निस्तारी के लिए पानी सप्लाई करना।

एक नजर में प्रदेश में

आठ विशाल सिंचाई परियोजनाएं, 35 मध्यम परियोजनाएं, 1698 छोटे बांध, 585 व्यपवर्तन तथा 766 एनीकट व स्टाप डेम।

अब यह करेगा विभाग

रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर व अंबिकापुर में असिस्टेंट व सब इंजीनियरों को ट्रेनिंग।

दो दिनी ट्रेनिंग में हर बैच में 60-70 इंजीनियरों को बारीकियां बताना।

चारों जगह होंगे तीन-तीन मास्टर ट्रेनर, वे ईई, एसई व सीई को भी ट्रेंड करेंगे।

सर्वे मोबाइल एप्प बनाया

प्रदेशभर में विभाग के इंजीनियरों की टीम बनाई जाएगी। यह टीम योजनाओं का सीजी डब्लूआरडी सर्वे मोबाइल एप्प के जरिए सर्वे करेगी। टीम मौके का निरीक्षण करेगी। फिर वास्तविक कमियों-खामियों का आंकलन करेगी। इसे एप्प में सभी इंजीनियर तय प्रपत्रों में फील्ड का भौतिक डाटा फीड करेंगे। फील्ड डाटा को प्रोसेस करने के बाद परीक्षण करके नया वर्किंग प्लान बनेगा। फील्ड डाटा को प्रोसेस करने के लिए रायपुर में सेंट्रल यूनिट का गठन किया जाएगा। इस यूनिट में आईटी के दो ईई या एसई स्तर के अधिकारी होंगे। भौतिक रिपोर्ट को सेंट्रल प्रोग्रामिंग यूनिट परीक्षण करेगी। फिर काम शुरू करने प्राथमिकता तय करेगी।

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