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जैकेट व पेज 1 के शेष

बिना उचित कारण गिरफ्तारी हुई तो समझो हम सभ्य समाज में नहीं रह रहे हैं: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 03:30 AM IST

बिना उचित कारण गिरफ्तारी हुई तो समझो हम सभ्य समाज में नहीं रह रहे हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस गोयल ने टिप्पणी की है कि जो भी कानून है, उसे अनुच्छेद-21 (जीवन के अधिकार) के दायरे में देखना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी संबंधी वाद में इस बाबत व्यवस्था दी थी। अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का दायरा काफी बड़ा है और कानून को उसी चश्मे से देखना होगा। इस अधिकार को नहीं छीना जा सकता या कमतर नहीं किया जा सकता है। कोई इसे कम नहीं कर सकता, यहां तक कि संसद भी इस अधिकार से वंचित नहीं कर सकती। किसी की गिरफ्तारी बिना किसी निष्पक्ष प्रक्रिया के कैसे हो सकती है। इसे अनुच्छेद-21 के संदर्भ में अनिवार्य तौर पर देखना होगा। गिरफ्तारी ‌उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। अगर बिना निष्पक्ष प्रक्रिया के किसी को जेल भेजा जाता है तो हम सभ्य समाज में नहीं रह रहे हैं।

फसल बीमा: सूखाग्रस्त 2000 किसानों को हजार और 523 को 100 रुपए से भी कम मिले

में 650 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से बीमा कंपनी को प्रीमियम की रकम चुकाई गई। राज्य सरकार ने सूखे की घोषणा की और आनावारी रिपोर्ट आने पर किसानों को 47 करोड़ रुपए मुआवजा दिया। लेकिन बीमा कंपनी ने किसानों को बेहद निराश किया है। सबसे पहले तो क्लेम की रकम तय करने में ही देर कर दी। छह माह पहले प्रीमियम लेने, फसल कटाई प्रयोग पूरा होने के बावजूद मई में क्लेम की रकम तय की। किसानों के साथ ही कृषि विभाग को किसानों को अच्छा क्लेम मिलने का भरोसा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हाल ही में क्लेम की रकम घोषित कर उसे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। क्लेम राशि का पता चलने पर किसान मायूस हो गए हैं। भास्कर ने पूरे जिले के किसानों को दी गई क्लेम रकम की पड़ताल की तो पता चला कि 523 किसानों को सौ रुपए तक क्लेम नहीं मिला है। दो सौ रुपए सै ज्यादा और तीन सौ से कम पाने वाले किसानों की संख्या 272 है।

कंपनी जानबूझकर ऐसा नहीं करती

कंपनी जानबूझकर ऐसा नहीं करती। औसत उत्पादन के आधार पर जो रकम निकलती है, उसी का भुगतान बीमा कंपनी के द्वारा किया जाता है। हम भी इसमें बदलाव चाहते है, तभी तो व राज्य व केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है। - वैभव शुक्ला, स्टेट मैनेजर, इफको टोकियो कंपनी

साइड स्टोरी:सूखे वाले गांवों में क्लेम नहीं, भड़के किसानों ने किया समिति का घेराव(फोटो-सुनील फोल्डर)

बिलासपुर। जिन गांवों में इस बार इतना अकाल पड़ा कि किसान खरीदी केंद्रों में धान नहीं बेच पाए, वहां के किसानों पर भी बीमा कंपनी को तरस नहीं आय। उन्हें कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। फसल बीमा कराने वाले किसान अब पछता रहे हैं। ऐसे ही किसानों ने सहकारी समिति चिल्हाटी में जाकर प्रदर्शन भी किया। वैसे तो इस बार पूरे जिले के ही किसानों ने सूखे की मार झेली लेकिन कुछ इलाकों में बारिश अच्छी होने की वजह से किसान खरीदी केंद्रों में धान बेचने पहुंचे। लेकिन पिछले साल की तुलना में इस बार कम धान खरीदा गया। 93 सहकारी समितियों में चिल्हाटी समिति में धान खरीदी की बोहनी नहीं हुई। यानी एक भी किसान वहां धान बेचने नहीं पहुंचा। इस समिति में दो केंद्र चिल्हाटी व जैतपुरी है। वहां आठ गांव चिल्हाटी, हरदी, कुकुर्दीकेरा, जैतपुरी, सेमराडीह,पतईडीह, मनवा व ज्यादा किसान रजिस्टर्ड है लेकिन एक भी किसान दोनों केंद्रों में नहीं आया। समिति प्रबंधक सोमदत्त शर्मा ने बताया कि 766 ऋणी किसानों का बीमा हुआ था इसके अलावा अऋणी ने भी बीमा कराया। इन गांवों में सूखे का असर रहा। सैकड़ों हेक्टेयर खेत में फसल सूख गई। बीमा का क्लेम नहीं मिलने से किसान निराश व आक्रोशित है। वे समिति में इस बारे में पता करने आए थे। बता दें कि 51 हजार 726 किसानों को एक रुपए भी बीमा नहीं मिला।

10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की स्थिति

3-10 लाख की आबादी वाले(मीडियम) शहरों में मैसूर सबसे साफ-सुथरा

सबसे साफ-सुथरा शहर- मैसूर, कर्नाटक

फास्टेस्ट मूवर मीडियम सिटी- भिवंडी, महाराष्ट्र

बेस्ट सिटी इन सिटीजन फीडबैक- परभणी, महाराष्ट्र

बेस्ट सिटी इन इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज- अलीगढ़, उत्तर प्रदेश

बेस्ट सिटी इन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट- मैंगलोर, कर्नाटक

राजधानियों में ग्रेटर मुंबई ने मारी बाजी- अलग-अलग मामलों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों का भी आकलन किया गया है। इसमें महाराष्ट्र की राजधानी ग्रेटर मुंंबई देश की सबसे साफ-सुथरी राजधानी बनकर उभरी है। सिटीजन फीडबैक में झारखंड की राजधानी रांची अव्वल रही है। झारखंड ने सफाई के मामले में काफी सुधार किया है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के मामले मेंं तेलंगाना की राजधानी ग्रेटर हैदराबाद अव्वल रही है।

सबसे साफ-सुथरी राजधानी- ग्रेटर मुंबई, महाराष्ट्र

फास्टेस्ट मूवर स्टेट कैपिटल- जयपुर, राजस्थान

बेस्ट स्टेट कैपिटल इन सिटीजन फीडबैक- रांची, झारखंड

बेस्ट स्टेट कैपिटल इन इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज- पणजी, गोवा

बेस्ट स्टेट कैपिटल इन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट- ग्रेटर हैदराबाद, तेलंगाना

आज एक ही इलाके में रैली करेंगे राहुल व जोगी, दोनांे दिखाएंगे ताकत

के 25 विधानसभा सीटों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। काफी लंबे समय बाद हो रहे इस दौरे को लेकर कांग्रेसी खासे उत्साहित हैं। कांग्रेस अध्यक्ष इस दौरान सरगुजा, बिलासपुर, दुर्ग और फिर रायपुर जिले के आयोजनों में शामिल होंगे। रायपुर में राहुल गांधी रोड शो और पंचायती राज सम्मेलन के जरिए लोगों से मिलेंगे। दुर्ग में कांग्रेस के विधायक और सांसद दोनों हैं। इस सीट पर भी भाजपा की खास नजर है। ये एकमात्र ऐसी लोकसभा सीट है जो कांग्रेस के पास है। कांग्रेस अपनी सीट और मजबूत करने के लिए यहां फोकस कर रही है। सरगुजा का सीतापुर आदिवासी क्षेत्र है। इस क्षेत्र कांग्रेस की पकड़ पहले से है। कांग्रेस विधायक अमरजीत भगत को आदिवासी कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इस पर भी भाजपा की नजर है। ऐसे में कांग्रेस भी अपनी पकड़ और मजबूत बनाने में जुटी है।

दो दिनों में तीन सभाएं और दो कार्यकर्ता सम्मेलन करेंगे राहुल

इन कार्यक्रमों में उनके साथ कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया, प्रभारी सचिव डाॅ. चंदन यादव और अरुण उरांव के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, अभा कांग्रेस के संचार प्रभारी रणदीप सुरजेवाला, मीनाक्षी नटराजन, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव और हर्षवर्धन सकपाल भी शामिल होंगे।

दिल्ली सहित देश के 22 राज्यों में आंधी-तूफान दिल्ली में एक व्यक्ति की मौत और 13 घायल

मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय इलाकों, तमिलनाडु, पुड्‌डुचेरी और केरल में कहीं-कहीं आंधी-तूफान आया। माैसम विभाग के अनुसार इन इलाकों में शुक्रवार तक रुक-रुककर अलग-अलग हिस्सों में आंधी-तूफान और बारिश के आसार हैं। अगले दो दिनों में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की गई है।

किसानों की मुआवजा राशि से काटा इनकम टैक्स...

अनिवार्य अधिग्रहण कर रही है और उसका मुआवजा दे रही है तो इनकम टैक्स नहीं लगेगा। गलत ढंग से टैक्स काटने को लेकर ही अभनपुर और रायपुर के तत्कालीन एसडीएम फंस गए हैं। अभनपुर एसडीएम ने न सिर्फ टैक्स काटा, बल्कि जमा भी नहीं कराया। जानकारों के अनुसार यह धोखाधड़ी का मामला है। जब आवेदक ने टैक्स वापस मांगने आवेदन लगाया तो इनकम टैक्स विभाग में इसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।

एकमुश्त काट ली जाती है किसानों की रकम

बताते हैं कि ट्रिब्यूनल ने मूलचंद साहा के केस में भूमि अधिग्रहण के बड़े मुआवजे में काटा गया टैक्स वापस करने के आदेश दिए थे। आयकर के जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में राजस्व अफसरों की लापरवाही सामने आई है, जिसमें पता चला है कि वे टैक्स तो काट लेते हैं लेकिन आयकर विभाग को नहीं देते। ऐसे मामलों पर आयकर विभाग ने सरकार को पत्र भी लिखा था। अफसर मुआवजे के मामलों किसानों की राशि एकमुश्त काट लेते हैं। बाद में दावा भुगतान वापस लेते समय रिटर्न में बताते हैं कि किस किसान के कितने रुपए थे। बताते हैं कि अभनपुर एसडीएम एडिशनल कलेक्टर बन गए हैं फिर भी एसडीएम का ही काम कर रहे हैं। इधर, रायपुर एसडीएम मिरी ने भी बड़ी मुश्किल से नई जगह ज्वाइनिंग दी है।

इन मामलों से हुआ खुलासा : जाकोटिया परिवार ने एक्सप्रेस-वे के लिए माना की ओर के एक भू अर्जन के मामले में सचिव राजस्व से शिकायत की है। इस केस में 40 लाख रुपए से अधिक राशि मुआवजे के तौर पर मिली थी, जिसमें टीडीएस काट लिया गया। इसी तरह अभनपुर तहसील के नवापारा के ग्राम बगदेही के भरतलाल ने मुख्यमंत्री से शिकायत की है कि जल संसाधन विभाग गोबरा-नवापारा में बाढ़ नियंत्रण तटबंध बना रहा है। इसके लिए भू
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