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पीने के प्रदूषित पानी की सप्लाई, अब हाईकोर्ट में 18 जून को होगी सुनवाई

बिलासपुर | रायपुर और बिलासपुर में पीने के प्रदूषित पानी की सप्लाई को लेकर जनहित याचिका पर अब 18 जून को सुनवाई होगी।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 03:30 AM IST

बिलासपुर | रायपुर और बिलासपुर में पीने के प्रदूषित पानी की सप्लाई को लेकर जनहित याचिका पर अब 18 जून को सुनवाई होगी। रायपुर में लगाई गई जनहित याचिका का दायरा बढ़ाते हुए हाईकोर्ट ने तीन वकीलों को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करते हुए दोनों शहरों में जांच का जिम्मा सौंपा था।

रायपुर में रहने वाले मुकेश देवांगन की प|ी की मौत 2014 में पीलिया की वजह से हो गई थी, उसने 2014 में ही हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी, इसमें पीने के प्रदूषित पानी को इसका कारण बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। याचिका में रायपुर के कई क्षेत्रों में पीने के पानी की सप्लाई के लिए लगाई गई पाइपलाइन के नालियों और गंदगी के बीच से होकर गुजरने की भी जानकारी दी गई थी। हाईकोर्ट ने समस्या को गंभीर मानते हुए तीन वकीलों को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर रायपुर और बिलासपुर में जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच में भी पाइपलाइन के नालियों से होकर गुजरने, पानी की जांच के लैब में कर्मचारियों की कमी आदि की जानकारी दी गई थी। इस बीच रायपुर के नहरपारा मोवा क्षेत्र में पीलिया से 6 लोगों की मौत हो गई। हाईकोर्ट ने 1 मई को यहां के लोगों को 48 घंटे के अंदर राहत शिविरों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए, लेकिन बाद में आदेश को स्थगित कर दिया गया।



इस मामले पर बुधवार को सुनवाई होनी थी, अब समर वेकेशन के बाद 18 जून को इस पर सुनवाई होगी।

ग्रामीण से रिश्वत मांगने वाले आरोपी खनिज निरीक्षक को चार साल की सजा

बिलासपुर |
ईंट भट्ठे के संचालन की अनुमति देने के नाम पर ग्रामीण से 10 हजार रुपए रिश्वत लेने वाले बिलासपुर खनिज विभाग के खनिज निरीक्षक आरोपी ओमप्रकाश खांडेकर को चार साल की सजा हुई है। बुधवार काे जिला एवं सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश केआर रिगरी की कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने आरोपी को 50 हजार रुपए जुर्माना भरने के भी आदेश दिए। वहां से आरोपी को जेल भेज दिया। शासन की ओर से केएल अग्रवाल ने कोर्ट में दस्तावेज पेश किया।

कोटा विकासखंड के अंतर्गत शामिल ग्राम पंचायत दारसागर निवासी जमील अंसारी पिता सतबीर अंसारी 45 वर्ष घर बनाने के लिए ईंट भट्ठे में ईंट बना रहा था। इसकी जानकारी खनिज विभाग के माइनिंग इंस्पेक्टर आरोपी ओपी खांडेकर को पता चली। फिर वह 17 मार्च 2017 को जांच करने ईंट भट्ठे पहुंच गए और पीड़ित से भट्ठे संचालन के लिए शासन से अनुमति लेने के संबंध में पूछताछ की। ग्रामीण के पास अनुमति पत्र नहीं था। इसके बाद आरोपी खांडेकर ने पैसे की मांग की। पीड़ित ने उन्हें तत्काल पांच हजार रुपए दे दिए। फिर आरोपी ने उसे कार्यालय में मिलने के लिए बुलाया। अगले दिन शिकायतकर्ता कार्यालय पहुंचा।



ईट भट्ठे के संचालन की अनुमति देने का झांसा देकर आरोपी ने फिर से 10 हजार रुपए की मांग की। पीड़ित ने 10 हजार रुपए फिर से दे दिए। इसके बावजूद उसे अनुमति नहीं मिली और अनुमति के लिए फिर से 10 हजार रुपए की मांग की गई। इसके बाद पीड़ित ने 12 अप्रैल 2017 को एसीबी कार्यालय में लिखित में शिकायत दर्ज करवाई। एसीबी की टीम ने उसे पैसे के साथ खनिज विभाग के कार्यालय भेजा। पीड़ित खनिज विभाग कार्यालय में आरोपी खांडेकर को 10 हजार रुपए देकर बाहर आया। इसके बाद एसीबी की टीम ने आरोपी ओपी खांडेकर को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था।

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