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हर साल एक टन से ज्यादा ई-वेस्ट निकल रहा, रिसाइकिलिंग के लिए एक भी प्लांट नहीं, कचरे में ही मिलाया जा रहा प्लास्टिक का सामान

News - विंदेश श्रीवास्तव

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:35 AM IST
हर साल एक टन से ज्यादा ई-वेस्ट निकल रहा, रिसाइकिलिंग के लिए एक भी प्लांट नहीं, कचरे में ही मिलाया जा रहा प्लास्टिक का सामान
विंदेश श्रीवास्तव
डीबी स्टार टीम को शिकायत मिली कि प्रदेश में ई-वेस्ट को खुले में फेंका जा रहा है और कुछ जगहों पर ई-वेस्ट सामान को जलाया भी जा रहा है। इसके डिस्पोज करने के लिए कोई भी प्लांट प्रदेश में नहीं बनाए गए है। पड़ताल में खुलासा हुआ है कि प्रदेश में हर साल एक टन से ज्यादा ई-वेस्ट निकल रहा है। इन वेस्टेज आयटम को घर से निकलने वाले कचरे में मिलाया जा रहा है, जबकि एनजीटी ने ई-वेस्ट को डिस्पोज करने के लिए प्लांट बनाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद भी यहां प्लांट नहीं बने है। साथ ही ई-वेस्ट को एकत्रित करने के लिए कलेक्शन पॉइंट भी नहीं बनाया गया है। बाकी राज्यों में कलेक्शन पॉइंट बन गए है और वहां ई-वेस्ट की रिसायकिलिंग की जा रही है।


राजधानी समेत पूरे राज्य में नहीं बना पाए एक भी ई-वेस्ट कलेक्शन पॉइंट

आउटर क्षेत्रों में ई-वेस्ट को जलाकर डिस्पोज करने की सैकड़ों शिकायतें

DB Star

राजधानी समेत प्रदेश भर में सालाना ई-वेस्ट एक टन से ज्यादा निकलता है, लेकिन रिसाइकिलिंग के लिए कोई भी प्लान नहीं बनाया गया है। कचरे में ही प्लास्टिक आयटम को मिक्स किया जा रहा है। यहां बड़े स्थान पर कलेक्शन पॉइंट भी नहीं बनाया गया है। आउटर क्षेत्रों में चोरी-छिपे जलाया भी जा रहा है।

investigation

घर के कचरे में ही मिला रहे

 शहर में ई-वेस्ट के लिए कोई भी प्लांट नहीं बना है। कलेक्शन पॉइंट भी नहीं बनाए गए हैं। अभी घरों से निकलने वाले कचरे में ही मिक्स किया जाता है। अलग से व्यवस्थित करने का कोई भी प्लान नहीं है। हरेंद्र साहू, प्रभारी, सॉलिड वेस्ट मैंनेजमेंट, ननि

जानिए, ई-वेस्ट डिस्पोज करने के लिए करने थे कौन से काम, जो अब तक नहीं हुए...

पहली योजना वाइट गुड्स

इसमें घर से निकलने वाले इलेक्ट्रानिक सामानों को शामिल किया गया है। इलेक्ट्राॅनिक गैजेट्स और डिस्पोज करने के लिए छोटे प्लांट का निर्माण किया जाना था।

दूसरी योजना ब्राउन गुड्स

इसमें टीवी और कैमरे शामिल है। इसकी रिसायकिलिंग के लिए कोई प्लांट नहीं बनाया गया है।ऐसे सामान ज्यादातर इलेक्ट्राॅनिक दुकानों और उद्योगों से निकलते है।

तीसरी योजना ग्रे गुड्स

इसमें कम्प्यूटर, प्रिंटर्स और स्कैनर जैसे कई इलेक्ट्रानिक सामान को कैटेगरी में शामिल किया गया है। इन सामानों की रिसायकिलिंग के लिए भी कोई प्लांट नहीं बनाया गया है।

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हर साल एक टन से ज्यादा ई-वेस्ट निकल रहा, रिसाइकिलिंग के लिए एक भी प्लांट नहीं, कचरे में ही मिलाया जा रहा प्लास्टिक का सामान
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