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एमपी-सीजी ने संविलियन नियम-49 नहीं किया निरस्त, दो साल बाद भी 98 हजार से ज्यादा पेंशनर्स को नहीं मिला 7वां वेतनमान

राज्य विभाजन के समय आए रिटायर्ड कर्मचारियों-अधिकारियों को हर महीने 3 हजार तक का नुकसान, 18 साल में जब-जब वेतन बढ़ा,...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 03:35 AM IST
राज्य विभाजन के समय आए रिटायर्ड कर्मचारियों-अधिकारियों को हर महीने 3 हजार तक का नुकसान, 18 साल में जब-जब वेतन बढ़ा, तब-तब यही परेशानी

छत्तीसगढ़ में 98 हजार से ज्यादा पेंशनर्स है। इधर, राज्य में सातवां वेतनमान लागू हो गया है, लेकिन यहां के पेंशनरों को वेतनमान का लाभ नहीं मिल रहा है। इसके पीछे की वजह यह है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के जिम्मेदारों ने संविलियन नियम-49 पर आपसी सहमति बनाकर निरस्त नहीं किया है।



investigation

रायपुर
डीबी स्टार टीम को इसको लेकर शिकायत मिली थी। टीम ने हकीकत जानने पड़ताल की तो खुलासा हुआ कि मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया में नियम का पेंच अब रोड़ा बना हुआ है। इसके चलते वर्ष 2000 में स्थानांतरित होकर आने के बाद नौकरी से रिटायर हुए कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधा नहीं मिल पा रही है। आलम यह है की पेंशनरों को दो साल पहले तय हुए सातवें वेतनमान को अधर में अटका दिया है। इसको लेकर कई बार पेंशनरों ने संयुक्त प्रयास किया, लेकिन शासन स्तर पर नहीं सुलझाया जा रहा है। 18 सालों पहले स्थानांतरित होकर आने के बाद यहां की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों-अधिकारियों के पेंशन से जुड़े मसले को नहीं सुलझाया जा सका है।

केंद्र सरकार ने नवंबर 2017 को दिए निर्देश

टीम ने पड़ताल में पाया कि प्रदेश के जिम्मेदारों ने मध्यप्रदेश राज्य से वर्ष 2000 में संविलियन नियम 49 को आपसी सहमति से निरस्त कराने में कोताही कर रहे हैं। जबकि केन्द्र सरकार ने भी नवंबर 2017 को निर्देश दिया है कि राज्य विभाजन के बाद राज्यों के जिम्मेदार आपसी सहमति बनाकर पेंशनर से जुड़े मामले में निर्णय लेने के लिए संविलियन नियम 49 को निरस्त कर सकते हैं। मामले में सहमति नहीं बनाए जाने की वजह से पेंशनरों का सातवां वेतनमान अटका दिया है।

जब-जब नियम बने, तब-तब यह दिक्कतें

पड़ताल में खुलासा हुआ कि वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सरकारों ने नियम 49 को खत्म करने सहमति बनाने की बजाय इसे अटका दिया। जिस वजह से पहले 6वां वेतनमान भी नियम 49 की वजह से देर से लागू हो पाया। अब 2016 में 7वां वेतनमान लागू होने के दो साल बाद भी पेंशनरों को मिलने वाला लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसमें पेंशनर और पेंशन परिवार के हितग्राही भी प्रभावित हो रहे हैं। इतना ही नहीं पेंशनरों को दिए जाने वाले भत्ते भी अटकाए जा रहे हैं।

महंगाई भत्ता देने का भी आदेश नहीं

मामले में पेंशनरों का कहना है कि सातवां वेतनमान लागू होने के बाद मध्यप्रदेश शासन ने पेंशनरों को जुलाई 2016 से ही 2 प्रतिशत एवं जनवरी 2017 से 4 प्रतिशत महंगाई राहत को मंजूरी देने के बाद सितंबर माह से उसे नियमित पेंशनरों एवं परिवार पेंशन पाने वाले लोगों को देना शुरू कर दिया। लेकिन छत्तीसगड़ शासन ने महंगाई राहत देने का आदेश जारी नहीं किया। इतना ही नहीं जनवरी 2016 से पूर्व रिटायर हुए एवं दिवंगत पेंशनरों के परिवार को पेंशन एवं परिवार पेंशन देने का आदेश भी नहीं हो पाया है।

नियम खत्म करने पर सहमति नहीं

 राज्य विभाजन के दौरान कर्मचारियों-अधिकारियों को 5 वां वेतनमान मिलता था। इसके बाद पहले 6वांं वेतनमान देने में दिक्कत आई और अब 7वां वेतनमान लागू नहीं हो रहा है। इसे लागू करने नियम 49 को निरस्त करने दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाने में देरी की जा रही हैं। इस वजह से पेंशनरों को 1500 से 3000 रूपए का नुकसान हो रहा है। चेतन भारती,प्रांताध्यक्ष संयुक्त राज्य पेंशनर्स फेडरेशन,रायपुर

बातचीत चल रही है

 पेंशनर्स को सातवां वेतनमान देने को लेकर दोनों राज्यों के बीच संविलियन संबंधी नियम को निरस्त करने की सहमति नहीं बनी है। इसको लेकर दोनों राज्यों के बीच बातचीत चल रही है। कमलप्रीत सिंह, सचिव वित्त विभाग छ.ग शासन