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किराना दुकान चलाने वाले से लेकर टीचर, लॉयर, डॉक्टर, इंजीनियर और आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल्स भी बना चुके हैं एप

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2018, 03:36 AM IST

News - राज्य के राहुल सिंघल ने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके जरिए दुनिया का कोई भी व्यक्ति अपने बिजनेस, प्रोफेशनल...

किराना दुकान चलाने वाले से लेकर टीचर, लॉयर, डॉक्टर, इंजीनियर और आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल्स भी बना चुके हैं एप
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राज्य के राहुल सिंघल ने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके जरिए दुनिया का कोई भी व्यक्ति अपने बिजनेस, प्रोफेशनल वर्क, सर्विस या पर्सनल यूज के लिए फ्री में एप बना सकता है। अब तक लगभग छह लाख लोग उनके स्टार्टअप "एपलॉप' की मदद से अपने लिए एप क्रिएट कर चुके हैं। इन छह लाख से ज्यादा एप को डाउनलोड करने वालों की संख्या लगभग तीन करोड़ है। किराना दुकान चलाने वाले से लेकर ज्वेलर्स, माेबाइल शॉप, सैलून, लाइफस्टाइल प्रोडक्ट बेचने वाले रिटेलर्स, लॉयर, एक्टर्स जैसे प्रोफेशनल और कॉलेज स्टूडेंट्स भी इनके प्लेटफॉर्म से एप बना चुके हैं।

सिटी भास्कर से बातचीत में राहुल ने बताया, मैंने दिसंबर 2015 में स्टार्टअप की शुरुआत की थी। प्ले स्टोर पर अवेलेबल एप "एपलॉप' के अलावा वेबसाइट से भी अपनी जरूरत के अनुसार लोग महज एक मिनट में एप बना सकते हैं। जीमेल या फेसबुक पर एकाउंट बनाने की तरह ही ये बेहद आसान है। आप मनचाही जानकारी, सर्विस, फोटो, वीडियो या डॉक्यूमेंट के लिए एप में डिफरेंट कैटेगिरी या सेक्शन बना सकते हैं। एप रेडी होने के बाद हमारे प्लेटफॉर्म के जरिए ही उसे प्ले स्टोर पर लॉन्च कर सकते हैं। अगर प्ले स्टोर पर सीधे एप लॉन्च करना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें प्ले स्टोर को कुछ चार्ज देने होते हैं। इसके बाद नॉर्मल एप की तरह कोई भी शख्स आपका एप डाउनलोड कर सकता है।

मिल चुकी है साढ़े तीन करोड़ की फंडिंग

राहुल सिंघल ने बताया नैसकॉम के अलावा छत्तीसगढ़ के इनक्यूबेशन सेंटर 36 आईएनसी से भी हमें सपोर्ट मिल रहा है। हम स्टार्टअप इंडिया प्रोजेक्ट के रिसोर्स पार्टनर हैं। अब तक तीन फेज में लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपए की फंडिंग मिल चुकी है।

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फैमिली बिजनेस के लिए एप बनवाते वक्त आया आइडिया

शहर के आरआईटी कॉलेज से इंजीनियरिंग करने वाले 35 साल के राहुल ने बताया, मेरे पिता आरके सिंघल फेब्रिकेशन वर्कशॉप का बिजनेस करते हैं। फैमिली बिजनेस बढ़ाने के लिए साल 2014 में हमने एप बनाने की प्लानिंग की। डेवलपर्स से मिला तो उन्होंने बताया कि एप बनाने में लगभग छह महीने और दो से ढाई लाख रुपए लगेंगे। दूसरे डेवलपर्स ने भी एप बनाने इतने ही रुपए मांगे। तब आइडिया आया कि क्यों न कोई ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जाए, जिसकी मदद से एप बनाना आसान और सस्ता हो जाए। लगभग एक साल तक इस प्रोजेक्ट पर रिसर्च की। नैसकॉम की मदद से दिसंबर 2015 में हमने एपलॉप की शुरुआत की।

रिटेलर्स से लेकर प्रोफेशनल्स तक बना रहे हैं एप

राहुल के प्लेटफॉर्म से एप बनाने वालों में रिटेलर्स और प्रोफेशनल्स के अलावा कॉलेज स्टूडेंट्स भी शामिल हैं। आईआईटी मुंबई और आईआईटी दिल्ली की ई-सेल और आईआईएम इंदौर जैसे संस्थानों के स्टूडेंट्स भी अपने प्रोजेक्ट और पर्सनल हॉबीज के लिए इनका प्लेटफॉर्म यूज कर रहे हैं। एग्जाम की तैयारी के लिए जूनियर्स को गाइड करने के अलावा नोट्स और जरूरी डॉक्यूमेंट शेयर करने के मकसद से भी कॉलेज स्टूडेंट एप बना रहे हैं।

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