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जेईई मेंस का रिजल्ट जारी, शहर के लगभग डेढ़ हजार

जेईई मेंस का रिजल्ट जारी, शहर के लगभग डेढ़ हजार स्टूडेंट हुए क्वालिफाई, देशभर के 2 लाख 24 हजार स्टूडेंट के साथ देंगे...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:40 AM IST

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    जेईई मेंस का रिजल्ट जारी, शहर के लगभग डेढ़ हजार स्टूडेंट हुए क्वालिफाई, देशभर के 2 लाख 24 हजार स्टूडेंट के साथ देंगे जेईई एडवांस

    सिटी रिपोर्टर | रायपुर

    सीबीएसई ने सोमवार को जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) मेंस का रिजल्ट जारी कर दिया। आईएएस ऑफिसर सुबोध सिंह के बेटे सुयश सिंह को देशभर में 99वीं रैंक मिली। वहीं, स्नेहिल कुमार ने देशभर में 352वीं रैंक हासिल की। खास बात ये है कि जेईई की बेहतर तैयारी के लिए दोनों की फैमिली दो साल पहले ही भिलाई शिफ्ट हुई है। दोनों ने 10वीं तक की पढ़ाई रायपुर में की है। कोचिंग संस्थानों और एक्सपर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार शहर से लगभग 10 हजार स्टूडेंट्स जेईई मेंस में शामिल हुए थे, जिसमें से लगभग डेढ़ हजार स्टूडेंट जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई करने में कामयाब रहे हैं। मेंस में सक्सेस होने वाले देशभर के टॉप 2 लाख 24 हजार स्टूडेंट्स के साथ ये भी जेईई एडवांस में शामिल होंगे।

    एडवांस के रजिस्ट्रेशन 2 मई से: जेईई एडवांस का ऑनलाइन एग्जाम 20 मई को होगा। इसमें शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन 2 मई से 7 मई तक होंगे।

    जेईई मेंस में सुयश को देशभर में 99 और स्नेहिल को 352 रैंक, एग्जाम की तैयारी के लिए 2 साल पहले भिलाई शिफ्ट हो गई थी दोनों की फैमिली

    नवंबर तक पूरा कर लिया था कोर्स, 4 महीने किया रिवीजन

    देशभर में 99वीं रैंक हासिल करने वाले सुयश को 360 में 316 मार्क्स मिले। उन्होंने बताया कि नवंबर में ही कोर्स कंपलीट कर लिया था। इसके बाद एग्जाम तक चार महीने सिर्फ रिवीजन और टेस्ट सीरिज सॉल्व करने पर फोकस किया। जेईई एग्जाम में क्वेश्चन सॉल्व करने की स्पीड बेहद मायने रखती है। कोचिंग में होने वाली टेस्ट सीरिज से क्वेश्चन तेजी से सॉल्व करने में मदद मिली। सुयश ने 10वीं तकी पढ़ाई आरकेसी से की है। इसके बाद जेईई की बेहतर तैयारी के लिए उनकी फैमिली भिलाई शिफ्ट हो गई। सुयश ने बताया, रायपुर की तुलना में भिलाई में जेईई की तैयारी के लिए माहौल अच्छा है। कोचिंग में जो पढ़ाया जाता मैं उसी दिन रिवाइज कर लेता था। जो डाउट्स होते वो तुरंत टीचर्स से क्लीयर कर लेता था। इससे कॉन्सेप्ट क्लीयर होता गया और एग्जाम में बेहतर रैंक हासिल करने में कामयाब रहा। अब मेरा लक्ष्य जेईई एडवांस में अच्छी रैंक हासिल कर आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करना है। सुयश के पिता सुबोध सिंह आईएएस ऑफिसर हैं। मम्मी प्रीति सिंह होममेकर और छोटा भाई अश्विन सिंह आठवीं का स्टूडेंट है।

    अपनी फैमिली के साथ सेल्फी लेते सुयश (बाएं)।

    रोज रिवाइज करने और मॉक टेस्ट सॉल्व करने से मिली कामयाबी

    स्नेहिल ने बताया कि उनकी फैमिली मूलरूप से रायपुर की रहने वाली है। वे जेईई की बेहतर तैयारी कर सकें इस मकसद से फैमिली दो साल पहले भिलाई शिफ्ट हुई है। सीएसईबी में बतौर एजीएम सेवाएं दे रहे पिता गोपाल मूर्ति रोजाना भिलाई से रायपुर अपडाउन करते हैं। स्नेहिल ने 10वीं तक की पढ़ाई रायपुर के स्कूल से की है। आईआईटी मुंबई में इंजीनियरिंग का सपना देखने वाले स्नेहिल की सिस्टर स्निग्धा बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग कर रही हैं। जेईई की कोचिंग के लिए भिलाई को रायपुर से बेहतर माना जाता है। इसी वजह से स्निग्धा ने पिता गोपाल और मम्मी प्रशांति को भिलाई शिफ्ट होने की सलाह दी थी। स्नेहिल ने बताया, मैं घंटों तक पढ़ाई में यकीन नहीं रखता। स्कूल और कोचिंग में जो पढ़ाया जाता, उसे उसी दिन घर आकर रिवाइज कर लेता था। जितनी देर मन करता उतना पढ़ता, फिर रिफ्रेश होने के लिए म्यूजिक सुनता था। जेईई के एग्जाम में सबसे जरूरी होता है टाइम मैनेजमेंट, इसलिए मैंने मॉक टेस्ट भी सॉल्व किए। ये स्ट्रेटजी कामयाब भी रही। इससे क्वेश्चन समय पर सॉल्व करने की हैबिट डेवलप हो गई। अब स्नेहिल जेईई एडवांस की तैयारी कर रहे हैं।

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