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निर्माण कार्यों से शहर में बढ़ी धूल की वजह से दोगुने हुए अस्थमा के पेशेंट

News - शहर में बढ़ते ट्रैफिक और कंस्ट्रक्शन के कामों का असर लोगों की हेल्थ पर पड़ रहा है। धूल के कारण अस्थमा के पेशेंट हर...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:40 AM IST
निर्माण कार्यों से शहर में बढ़ी धूल की वजह से दोगुने हुए अस्थमा के पेशेंट
शहर में बढ़ते ट्रैफिक और कंस्ट्रक्शन के कामों का असर लोगों की हेल्थ पर पड़ रहा है। धूल के कारण अस्थमा के पेशेंट हर साल दोगुना हो रहे हैं यानी 100 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में ये चौंकाने वाली बात सामने आई है। अंबेडकर हॉस्पिटल में टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग के एचओडी डॉ. आरके पंडा ने बताया कि धूल के कारण अस्थमा और लंग्स में संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा अस्थमा के मरीज रायपुर के अलावा कोरबा, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ से आ रहे हैं। ऐसे लोगों को इलाज के साथ जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। डॉ. पंडा ने बताया कि रायपुर प्रदूषण के मामले में विश्व का सातवां प्रदूषित शहर है। यहां धूल के कणों में चार गुना ज्यादा हानिकारक तत्व है, जो लंग्स को नुकसान पहुंचाते हैं। डॉ. पंडा ने बताया कि लंबी खांसी के साथ कफ आए, सांस लेने में तकलीफ, छाती में भारीपन और सालभर से सर्दी-खांसी हो तो ये अस्थमा के लक्षण हैं। डॉ. पंडा ने बताया कि इस साल सर्दी, खांसी के मरीज एक बार ठीक होने के बाद बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या काफी है। इसकी वजह यह रही रही निर्माण कार्यों के कारण राजधानी में धूल की मात्रा बढ़ गई है।

टीबी और अस्थमा के लक्षण में न हों कन्फ्यूज, ऐसे पहचानें

डॉ. पंडा ने कहा कि कई बार लोगों को टीबी और अस्थमा की खांसी में कन्फ्यूजन होता है। दोनों ही बीमारी में लगातार खांसी आ सकती है, लेकिन टीबी में खांसी के साथ बुखार भी आता है। भूख नहीं लगती और वजन लगातार कम होने लगता है। उन्होंने कहा कि अस्थमा का ट्रीटमेंट शुरुआती स्टेज पर कराने से आप हेल्दी लाइफ जी सकते हैं। रायपुर के अलावा कोरबा और रायगढ़ में भी कंस्ट्रक्शन का काम बढ़ने कारणों से अस्थमा के पेशेंट बढ़ रहे हैं। नवरात्रि से होली तक अस्थमा का खतरा ज्यादा रहता है। यह बीमारी आमतौर पर ठंड के दिनों में ज्यादा बढ़ती है। डाॅ. पंकज वर्मा ने बताया कि खांसी, छींक और सर्दी जैसी एलर्जी से अस्थमा के लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं। डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल अस्थमा बर्डेन रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 2025 तक 10 करोड़ से ज्यादा लोग अस्थमा के शिकार हो सकते हैं।

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