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आदिवासियों को भड़काने के आरोप में पूर्व आईएएस किंडो और तिग्गा गिरफ्तार

पत्थलगडी आंदोलन के जरिए शासन-प्रशासन को चुनौती देने वाला जशपुर का बच्छरांव गांव दो थाना क्षेत्रों में पड़ता है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:40 AM IST

आदिवासियों को भड़काने के आरोप में पूर्व आईएएस किंडो और तिग्गा गिरफ्तार
पत्थलगडी आंदोलन के जरिए शासन-प्रशासन को चुनौती देने वाला जशपुर का बच्छरांव गांव दो थाना क्षेत्रों में पड़ता है। दोनों थानों में चार अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए हैं। इसमें बगीचा थाने में तीन और नारायणपुर थाने में एक मामला है। चारों मामलों में गैर जमानती धाराएं लगाई गई हैं। नारायणपुर में दर्ज केस के मुताबिक पांच से अधिक लोगों द्वारा पूजा के स्थान पर ऐसी गलत बातें कही गईं, जिससे शत्रुता, घृणा और वैमनस्यता का वातावरण पैदा होता है। जबकि बगीचा थाने में दर्ज केस में षड्यंत्र रच कर लोक कर्तव्य के निर्वहन में बाधा उत्पन्न करने और हमला करने के आरोप लगाए गए हैं। बादलखोल अभयारण्य क्षेत्र में बसे और पत्थलगड़ी अभियान से प्रभावित बच्छरांव समेत पांच ग्राम पंचायतों में हुई घटनाओं से संबंधित केस दर्ज हैं। सभी धाराएं गैर जमानती हंै।

किंडो वही आईएएस हैं जिन पर अिधकार से बाहर जाकर जोगी का जाति प्रमाण-पत्र बनाने का आरोप

अपर कलेक्टर रहते हुए विवादों में घिरे थे किंडो, सरकारी नौकरी के दौरान उनके खिलाफ हुई थी कई बार कार्रवाई

किंडो वही आईएएस हैं, जिन्होंने बिलासपुर में अपर कलेक्टर रहने के दौरान गलत तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का जाति प्रमाण-पत्र बनाने का आरोप लगा था। शासकीय सेवा में रहते हुए किंडो के खिलाफ कई बार कार्रवाई की गई। भिलाई में साडा के सीईआे रहते हुए सरकारी जमीन पर ट्रांसफार्मर लगाने के मामले में भी घिरे थे। मरवाही की अजा सीट से चुनाव लड़ने के लिए जोगी ने 2001 में बिलासपुर के तत्कालीन अपर कलेक्टर किंडो के समक्ष जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिए आवेदन किया था। किंडो ने जोगी को कंवर आदिवासी का जाति प्रमाण-पत्र जारी किया। इसी आधार पर जोगी 2001 में मरवाही विधानसभा उपचुनाव लड़े और जीते। संवैधानिक व्यवस्था के तहत अस्थाई जाति प्रमाण-पत्र बनाने का अधिकार तहसीलदार को है, जबकि स्थाई जाति प्रमाण-पत्र एसडीएम जारी करते हैं। अपर कलेक्टर को प्रमाण-पत्र बनाने और जारी करने का अधिकार नहीं है। बाद में इस प्रमाण-पत्र को रद्द कर दिया गया था।

एचपी किंडो

किंडो वही आईएएस हैं, जिन्होंने बिलासपुर में अपर कलेक्टर रहने के दौरान गलत तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का जाति प्रमाण-पत्र बनाने का आरोप लगा था। शासकीय सेवा में रहते हुए किंडो के खिलाफ कई बार कार्रवाई की गई। भिलाई में साडा के सीईआे रहते हुए सरकारी जमीन पर ट्रांसफार्मर लगाने के मामले में भी घिरे थे। मरवाही की अजा सीट से चुनाव लड़ने के लिए जोगी ने 2001 में बिलासपुर के तत्कालीन अपर कलेक्टर किंडो के समक्ष जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिए आवेदन किया था। किंडो ने जोगी को कंवर आदिवासी का जाति प्रमाण-पत्र जारी किया। इसी आधार पर जोगी 2001 में मरवाही विधानसभा उपचुनाव लड़े और जीते। संवैधानिक व्यवस्था के तहत अस्थाई जाति प्रमाण-पत्र बनाने का अधिकार तहसीलदार को है, जबकि स्थाई जाति प्रमाण-पत्र एसडीएम जारी करते हैं। अपर कलेक्टर को प्रमाण-पत्र बनाने और जारी करने का अधिकार नहीं है। बाद में इस प्रमाण-पत्र को रद्द कर दिया गया था।

गुल्लू पॉवर प्रोजेक्ट के विरोध से जुड़ा था तिग्गा का नाम, बीडी शर्मा के साथ क्षेत्र में सक्रिय

जोसेफ तिग्गा आेएनजीसी से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। तिग्गा ने 2012 में बीडी शर्मा के साथ गुल्लू हाइड्रो पाॅवर प्रोजेक्ट का विरोध किया था। तब भी दोनों के नेतृत्व में आदिवासियों का एक बड़ा आंदोलन हुआ था। वे जशपुर जिले के एकम्बा के पास स्थित सन्ना गांव के रहने वाले हैं। कुनकुरी में इनकी स्कूली पढ़ाई और उच्च शिक्षा दिल्ली में हुई है। पिछले पांच-छह साल से लगातार वे इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। माना जाता है कि इस क्षेत्र में उनकी आदिवासियों पर मजबूत पकड़ है। इनके बारे में पूछने पर स्थानीय आदिवासी चुप हो जाते हैं। झारखंड के पत्थलगड़ी आंदोलन में भी उनकी अहम भूमिका रही है।

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