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तोड़ने हैं 5 हजार अवैध निर्माण, बुलडोजर लेकर जाते हैं पर हथौड़ा चलाकर वापस

राजधानी में अवैध निर्माणों को तोड़ने के लिए नोटिसों का खेल चल रहा है। तीन नोटिस देने के बाद अवैध निर्माणों को...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:45 AM IST
राजधानी में अवैध निर्माणों को तोड़ने के लिए नोटिसों का खेल चल रहा है। तीन नोटिस देने के बाद अवैध निर्माणों को तोड़ने के लिए पहुंचे अफसर मशीनों के साथ तो जाते हैं, लेकिन तोड़फोड़ हथौड़ों से करके वापस लौट जाते हैं। पक्के मकानों में तोड़फोड़ दिखावे के लिए हो रहे हैं। निगम अमले के वापस जाते ही वहां निर्माण पहले जैसा हो जाता है पता ही नहीं चलता है कि यह तोड़फोड़ हुई है। लोगों का आरोप है कि रसूखदारों के दबाव में आकर अवैध निर्माणों को पूरी तरह से तोड़ा नहीं जाता है। केवल सामने का कुछ हिस्सा तोड़कर निगम के अफसरों की टीम वापस लौट जाती है। अब इस तरह की कार्रवाई का विरोध भी शुरू हो गया है।

दैनिक भास्कर ने शहर के उन अवैध निर्माणों का निरीक्षण किया जहां अफसरों ने तोड़फोड़ की थी। मौके पर पहुंची टीम को दिखाई दिया कि अफसर जहां कार्रवाई के लिए पहुंचे थे वहां केवल एक-दो दीवारों तथा छत पर छेद करके छोड़ दिया गया है। कुछ जगहों पर छज्जे से सीमेंट हटाकर खानापूर्ति की गई है। कोटा-गुढ़ियारी रोड में निगम ने तीन साल पहले सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की थी। जिन हिस्सों को तोड़ा गया उसकी मरम्मत करा ली गई है। अभी वहां चार मंजिला आवासीय और रेसीडेंशियल कांप्लेक्स बनकर तैयार है।

दीवारों में चलाया सिर्फ हथौड़ा : समता कालोनी में एक महिला ने नक्शे के खिलाफ अवैध निर्माण कराया था। निगम का तोड़फोड़ अमला तीन नोटिसें देने के बाद कार्रवाई के लिए पहुंचा। अमले ने यहां तोड़फोड़ शुरू। छत के कुछ हिस्सों में ड्रिल मशीन से छेद कर दीवारों में हथौड़ा चला दिया गया। हल्की कार्रवाई के बाद अफसरों ने दावा किया कि महिला ने नियमितीकरण का आवेदन लगा दिया है। इसलिए आगे की कार्रवाई नहीं होगी।

बैजनाथपारा

पांच हजार से ज्यादा को भेजें तीन नोटिस

शहर के तकरीबन सवा 2 लाख मकानों, कांप्लेक्सों तथा भवनों में पांच हजार ऐसे हैं, जिन्हें अवैध निर्माण के लिए नगर निगम तीन नोटिसें जारी कर चुका है। तीसरे नोटिस का आशय निर्माण को ढहा देना है, लेकिन पिछले पांच साल में एक हजार निर्माण कार्यों पर ही कार्रवाई हो सकी है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि इनमें से 90 फीसदी निर्माण कार्यों पर कार्रवाई के नाम पर कुछ ईंटें या थोड़ा हिस्सा ही गिराया गया। कुछ दिन बाद वहां निर्माण फिर चालू हो गया। पिछले तीन माह में निगम के दस्ते कई अवैध भवनों से इसलिए लौटे क्योंकि मकान मालिक ने नियमितिकरण के आवेदन के दस्तावेज पेश कर दिए।

ऊपर चला हथौड़ा, नीचे चल रही दुकानें।

अवैध फिर भी चल रही दुकानें

बैजनाथपारा में भी अमले ने दो मालों को मिलाकर हजार वर्गफीट क्षेत्र के अवैध निर्माण पर हथौड़ा चलाया। कार्रवाई के नाम पर हल्की तोड़फोड़ की गई। इसमें ग्राउंड फ्लोर पर दुकान भी चल रही है और इसके भी अवैध होने की शिकायतें थीं। निगम अमले ने दुकान मालिक रजब अली कादरी को तीन नोटिस देकर निर्माण हटाने के लिए समय दिया गया था। दुकान मालिक ने लगभग 40 वर्ष पुराने ग्राउंड फ्लोर पर दो माला का पक्का नया निर्माण करवा लिया गया था। जब निगम ने बिना अनुमति निर्माण पर नोटिसें दीं तो इसका जवाब भी नहीं दिया गया। बाद में निगम अफसरों ने वहां हल्की कार्रवाई कर दोनों फ्लोर को छोड़ दिया।

प्लान रोड का भवन छोड़ा

कोटा-रामनगर रोड पर निगम जोन-8 के अफसरों ने 14 जुलाई 2016 को अवैध निर्माण पर तोड़फोड़ की थी। इस बिल्डिंग का करीब 10 फीट हिस्सा मास्टर प्लान रोड की जद में है। निगम की टीम ने इस भवन के सामने और पिछले हिस्से में सांकेतिक तोड़फोड़ कर कार्रवाई पूरी कर ली। यह कार्रवाई तात्कालिक जोन कमिश्नर वासुदेव राम चौहान और ईई बीआर अग्रवाल के नेतृत्व में हुई थी। अफसरों ने दावा किया कि भवन मालिक ने नियमितिकरण करवाने की बात कही है, लेकिन नियमानुसार मास्टर प्लान रोड पर निर्माण और नियमितिकरण नहीं हो सकता। ऐसे में उन्हें किन नियमों के तहत राहत दी गई है यह किसी को पता नहीं।


समता कॉलोनी

रायपुरा

छत में किए थे छेद, अब हो गई मरम्मत।

बाउंड्री तोड़ी, आवेदन दिया तो छोड़ दिया।