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संस्कार के बिना मिली सफलता स्थाई नहीं है, बच्चों को दें अच्छे संस्कार

News - कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर प्रतिस्पर्धा के इस युग में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान भी सबसे आगे रहे।...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 03:50 AM IST
संस्कार के बिना मिली सफलता स्थाई नहीं है, बच्चों को दें अच्छे संस्कार
कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

प्रतिस्पर्धा के इस युग में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी संतान भी सबसे आगे रहे। इसके लिए वे बच्चों को संस्कारवान बनाने की बजाए ज्यादा से ज्यादा व्यवहारिक बनाने में लगे हुए हैं।

व्यवहारिकता से संसार में सफलता तो मिल सकती है, लेकिन सफल व्यक्ति वही होता है, जिसमें संस्कार भी हों। माताओं को अपनी संतानों को भक्त ध्रुव जैसा बनने की शिक्षा देनी चाहिए। यह बातें गोपालशरण देवाचार्य ने गुरुवार को पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर न्यू चंगोराभाठा के गणपति नगर में परमेश्वरी चौक पर शिवाेम विद्यापीठ के पास श्रीगोपाल भवन में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कही। कथा में गोपालशरण जी ने कहा कि संसार को पाप के रसातल से उठाने के लिए भगवान ने वराह अवतार लिया। सनकादिक मुनियों के श्राप से हिरण्याक्ष व हिरण्याकश्यप के रूप में जन्म लेने वाले जय-विजय की कथा सुनाते हुए गोपालशरण देवाचार्य जी ने बताया कि जब संसार को पाप से उबारने के लिए वराह भगवान जाने लगे तो अपने अहंकार के मद में चूर होकर हिरण्याक्ष ने भगवान का रास्ता रोका लिया। इस पर भगवान वराह ने उसका संहार कर उसे मोक्ष दिया। इसके बाद कथा में भगवान कपिल के अवतार का वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि कर्दम ऋषि और देवहूति के घर भगवान कपिल के रूप में प्रकट हुए। कथा में सती प्रसंग के अलावा ध्रुव चरित का सुंदर वर्णन किया गया। कथा को सुनने के लिए बडी संख्या में श्रद्धालु जुटे रहे।

भगवान को बस सच्चे मन से पुकारने की देरी

गोपाल शरण देव जी ने आगे कहा कि प्रभु हमें देने में कभी कमी नहीं करते लेकिन लेने में हम ही कमी कर जाते हैं। जीवन में परमात्मा कितनी बार अलग-अलग रूप में हमारे पास आते हैं लेकिन हम उनको पहचान नहीं पाते। भगवान सर्वत्र व्याप्त है लेकिन हम उन्हें देख सुन नहीं सकते। यदि हम साधना करें और भगवान कृपा हो तो कुछ क्षणों के लिए दिव्यता प्राप्त होती है और हम भगवान के दर्शन कर सकते हैं। आज लोग मंदिर जाते हैं और प्रार्थना करते कहते हैं कि भगवान हमारा एक काम कर देना हम सवा किलों लड्डू चढ़ाएंगे। सच्चे मन से पुकारने की देरी है भगवान तत्काल प्रकट हो जाएंगे।

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