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आधे बच्चे कुपोषित, केंद्र पर रहें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, नहीं तो हटाने की कार्रवाई होगी

सुकमा| सुकमा जिले में प्रदेश में सबसे ज्यादा कुपोषण है इसमें सुधार लाने के लिए कलेक्टर ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 03:25 AM IST

सुकमा| सुकमा जिले में प्रदेश में सबसे ज्यादा कुपोषण है इसमें सुधार लाने के लिए कलेक्टर ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को केंद्रों पर रहकर ही सेवा देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से गांव में बच्चों की सही स्थिति की जानकारी कार्यकर्ता को हमेशा रहेगी। समस्या होने पर वह जरूरी उपाय कर सकेगी।

नवंबर 2017 में महिला बाल विकास विभाग द्वारा कराए गए वजन में सुकमा में करीब आधे बच्चों का वजन कम आया था। कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग कुपोषण के आंकलन के लिए सालाना वजन त्यौहार या मेला लगाता है। इसमें सभी बच्चों का वजन करके उनके स्वास्थ्य का आंकलन किया जाता है। नवम्बर 2017 में वजन त्यौहार हुआ था। इसमें विभाग ने बच्चों का वजन किया था। उसके अंतिम आंकड़े आ गए हैं। इसमें सुकमा जिले में 48.21 प्रतिशत बच्चों का वजन कम आया था। यानि इनमें कुपोषण है। कलेक्टर ने कुपोषण को कम करके बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को केंद्र वाले गांव में ही रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि हर एक कार्यकर्ता अपने मुख्यालय क्षेत्र में स्थायी रूप से रहकर काम करें। इन निर्देशों के बावजूद भी यदि कोई कार्यकर्ता मुख्यालय पर नहीं रहती तो उन्हें पद से अलग करने की कार्रवाई की जाएगी।

बरसात में बढ़ता है कुपोषण

बरसात में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है। साथ ही मौसम में नमी होने के कारण रोग बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण हो जाता है। इस कारण बच्चों में कुपोषण बढ़ जाता है।

ज्यादातर कार्यकर्ता नहीं रहतीं मुख्यालय पर

आंगनवाड़ी में कार्यरत ज्यादातर कार्यकर्ता अपने केंद्र के आवास के कस्बों या नगरों में रहतीं हैं। वे रोज आती जाती हैं। देर से आना व जल्दी जाने की रहती है। इस कारण आंबा आने वाले बच्चों की जरूरी देखभाल नहीं हो पाती है।

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