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महाभारत 2019: मोदी बनाम फेसलेस होगी 2019 की जंग, महागठबंधन पहले से तय नहीं करेगा पीएम उम्मीदवार

मोदी के खिलाफ ममता का 'जज' फॉर्मूला, जे- जॉब्स, यू- अंडर परफॉर्मेंस, डी- डीमॉनेटाइजेशन, जी- जीएसटी और ई- इकोनॉमी

Danik Bhaskar | Aug 24, 2018, 07:43 AM IST
जानकारों का मानना है कि नरेंद् जानकारों का मानना है कि नरेंद्

नई दिल्ली. आम चुनाव में महागठबंधन का चेहरा कौन होगा? इस विवादित मुद्दे पर सहयोगियों में सहमति बन गई है। एकजुट दलों ने फैसला किया है कि भाजपा को रोकने के लिए किसी एक नाम को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं करेंगे। लड़ाई मोदी बनाम फेसलेस ही रखी जाएगी।

वैसे राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि मौजूदा परिदृश्य में महागठबंधन के लिए यही फैसला आदर्श है। सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी के निदेशक संजय कुमार कहते हैं-‘विपक्ष जिस महागठबंधन को शक्ल देने का प्रयास कर रहा है, उसमें वह नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई चेहरा न दे, यही फायदेमंद होगा। गठबंधन की जो पांच-सात बड़ी पार्टियां दिख रही हैं, फिलहाल उनमें सर्वानुमति से कोई चेहरा उभर आए, इसकी संभावना नहीं दिखती। हालांकि] अगुअाई के लिए किसी नेता का न होना इनके पक्ष में ही जाएगा। चुनाव में एनडीए इसे कमजोर बताने की कोशिश जरूर करेगा। लेकिन किसी एक को चुन लिया जाए तो मोदी बनाम वह चेहरा हल्का ही दिखेगा।’

मोदी के खिलाफ ममता का ‘जज’ फॉर्मूला : विपक्षी रणनीतिकारों ने मोदी को उनके पिछले चुनावी वादों से ही टक्कर देने का निर्णय लिया है। यह तय किया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाई मोदी बनाम मुद्दों की ही होगी। राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाई के लिए तृणमूल कांग्रेस ने ‘जज’ (जेयूडीजीई) फॉर्मूला दिया है। ‘जे’ यानी जॉब्स, ‘यू’ यानी अंडर परफॉर्मेंस, ‘डी’ यानी डीमॉनेटाइजेशन, ‘जी’ यानी जीएसटी और ‘ई’ यानी इकोनॉमी। तृणमूल का कहना है कि इन मुद्दों पर मोदी को घेरा जाए और ठोस आंकड़ों के आधार पर एनडीए सरकार की विफलताएं लोगों के सामने लाई जाएं। हालांकि, राज्य स्तर पर मुकाबला मोदी बनाम स्टेट लीडर ही होगा।

राज्यों में ये होगी रणनीति : भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर वाले राज्यों में राहुल गांधी ही मोर्चा संभालेंगे। ये राज्य पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक और केरल होंगे। इसके अलावा जहां महागठबंधन की कोई और पार्टी कांग्रेस से ज्यादा प्रभावशाली है, वहां उनके ही नेता मोदी के खिलाफ चेहरा होंगे। जैसे उत्तरप्रदेश में अखिलेश यादव, बिहार में लालू और तेजस्वी यादव, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, आंध्रप्रदेश में चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक में कुमारास्वामी और सिद्धारमैया और महाराष्ट्र में शरद पवार। वहीं गैर-यूपीए व गैर-एनडीए के वर्चस्व वाले कुछ राज्यों में आपसी सामंजस्य से काम चलाया जाएगा।

चेहराविहीन लड़ाई पर किसकी क्या राय?

कांग्रेस नेता शशि थरूर- गठबंधन का लीडर कौन होगा? यह चुनाव बाद का कैल्कुलेशन है। इस समय भाजपा को रोकने के लिए एकजुट पार्टियों के लीडर मैदान में उतरेंगे।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव- टीम बनाने से पहले कप्तान नहीं चुना जाता। टीम बन रही है। लीडर का फैसला भी हो जाएगा।

आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू- हमारे साथ बहुत से नेता प्रधानमंत्री बनने लायक हैं। मेरी प्रधानमंत्री बनने की ख्वाहिश बिलकुल नहीं है।

तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन- लीडरशिप के मुद्दे को हम भाजपा और मोदी को हटाने के बाद सुलझा लेंगे। हम चाहते हैं कि फिर वैसे भारत का निर्माण हो, जिसे हम प्यार करते हैं। -

इन मुकाबलों में फेसलेस जीते

1977- इंदिरा गांधी के खिलाफ जुटे दलों का कोई चेहरा नहीं था। चुनाव बाद जनता पार्टी के मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने।

1989- राजीव गांधी बनाम फेसलेस विपक्षी दलों में मुकाबला हुआ। चुनाव बाद जनता दल के वीपी सिंह को नेता चुना।
1991- चंद्रशेखर के सामने कांग्रेस के पास चेहरा नहीं था। कांग्रेस जीती और पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बनाए गए।
2004- वाजपेयी बनाम बिना चेहरे वाली कांग्रेस में मुकाबला हुआ। गठबंधन सरकार बनी। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।