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पुलिसकर्मियों के वेतन-भत्ते पर नहीं हुई बात, शहीदों को मिलेंगे 7 लाख; हाईकोर्ट ने पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी पर रोक लगाई

6 साल बाद हुई पुलिस कल्याण समिति की बैठक

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 11:22 PM IST
नया रायपुर में सुबह से छत्तीसग नया रायपुर में सुबह से छत्तीसग

रायपुर. पुलिस परिवार आंदोलन के बाद पिछले 6 साल में पहली बार शनिवार को पुलिस केंद्रीय कल्याण समिति और परामर्शदात्री समिति की बैठक हुई। इसमें पुलिसवालों की उन मांगों पर बात हुई, जिनके चलते 25 जून को रायपुर में आंदाेलन हुआ था। हालांकि वेतन-भत्ते की प्रमुख मांग दरकिनार कर शिक्षा निधि और अन्य फैसले लिए गए। मोबाइल, किट और पेट्रोल भत्ते पर भी कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। लगभग चार घंटे तक चली बैठक के बाद एडीजी संजय पिल्लई ने बताया कि शहीद के परिवार को अलग-अलग निधि से अब 7 लाख रुपए मिलेंगे।

परिवारों के मनोरंजन के लिए दुर्ग और बिलासपुर में सामुदायिक केंद्र बनाए जाएंगे। पुलिसकर्मियों के बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा निधि को 3 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए तक कर दिया गया है। पहले यह राशि एक बच्चे को दी जाती थी, लेकिन अब दो बच्चों को दिए जाने का निर्णय लिया गया है। परोपकार निधि से सामान्य मृत्यु में दी जाने वाली राशि 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दी गई है। किसी के शहीद होने पर परिजन को एक लाख की जगह दो लाख रुपए दिए जाएंगे।

सहयोग राशि में भी कमी की गई: शहीद सम्मान निधि के अंतर्गत पुलिस कर्मचारियों से ली जाने वाली सहयोग राशि में भी कमी की गई। पहले एक दिन का वेतन लिया जाता था। अब 50 रुपए से लेकर 500 रुपए तक लिए जाएंगे। इसके अलावा शहीद परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि चार लाख से बढ़ाकर पांच लाख की गई। प्राकृतिक आपदा एवं बीमारी के समय संकट निधि से दी जाने वाली राशि 40 हजार से लाख से बढ़ाकर एक लाख रुपए की गई है।

पुलिस अधीक्षकों, कमांडेंट और आईजी का वेलफेयर फंड भी बढ़ा : पुलिस अधीक्षकों, कमांडेंट और आईजी का वेलफेयर फंड भी बढ़ा दिया गया। एसपी का फंड एक लाख और आईजी का फंड ढाई लाख रुपए कर दिया गया है। अफसरों का कहना है कि वेतन भत्ते को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजे जाएंगे। ये फैसले शासन स्तर पर ही लिए जा सकते हैं। इस समिति के अध्यक्ष डीजीपी हैं। बैठक में डीजीपी एएन उपाध्याय, एडीजी आरके विज, एडीजी संजय पिल्लई सहित जिलों के एसपी, कमांडेंट व अन्य अफसर मौजूद थे।

बदलेगी पुलिस की टोपी: बैठक में ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की दी जाने वाली रैग्जीन की टोपी का मामला भी उठा। तय किया गया कि टोपी बदली जाएगी। अब पुलिसकर्मियों को ऊलन टोपी दी जाएगी।


अन्य भत्तों का फैसला सरकार लेगी: पुलिस कर्मियों के बाकी भत्तों, मोबाइल, किट और टीम पेट्रोल भत्ते के संबंध में बैठक में निर्णय नहीं हो पाया। एडीजी आरके विज ने बताया कि इनके बारे में शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। पुलिस कर्मियों के जर्जर हो चुके मकानों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर करवाई जाएगी।

ये हुए फैसले:

-शिक्षा निधि राशि 3 से बढ़ाकर 25 हजार, अब दो बच्चों को मिलेगी
-पुलिसकर्मियों की सामान्य मृत्यु पर 1 लाख रु.दिए जाएंगे
-शहीद होने पर 4 की जगह 5 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी
-शहीद के परिजनों को परोपकार निधि से एक की जगह दो लाख रुपए मिलेंगे
-पुलिस परिवारों के लिए दुर्ग और बिलासपुर में बनेंगे पुलिस कम्युनिटी सेंटर
- बीमारी या आपदा पर 40 हजार की जगह 1 लाख रु. देंगे
-शहीद सम्मान निधि के लिए एक दिन के वेतन की जगह सिर्फ 50 से 500 रु. की कटौती
-एसपी-आईजी के वेलफेयर फंड की सीमा बढ़ाकर एक व ढाई लाख रुपए की गई।

पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी पर रोक
बिलासपुर.
पुलिसकर्मियों के परिजनों ने पुलिसकर्मियों को मूलभूत सुविधाएं देने की मांग करते हुए 25 जून को रायपुर में आंदोलन किया था, इस दौरान कई जिलों में कार्यरत पुलिसकर्मियों को बर्खास्तगी का नोटिस जारी किया गया। प्रभावित पुलिसकर्मियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने नोटिस के आधार पर किसी तरह के निर्णय लेने पर अगली सुनवाई तक के लिए इस पर रोक लगा दी है।

पुलिसकर्मियों के परिजनों ने पुलिसकर्मियों का वेतन- भत्ता बढ़ाने, साप्ताहिक अवकाश समेत अन्य मांगें हैं। हाईकोर्ट ने भी इसे लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन डीजीपी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। कमेटियों की अनुशंसा लागू करने पर विचार करने के भी निर्देश हाईकोर्ट ने दिए थे, लेकिन पुलिसकर्मियों को कोई राहत नहीं मिली। पुलिसकर्मियों के परिजनों ने जिलास्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के बाद 25 जून को रायपुर में आंदोलन करने का निर्णय लिया था, लेकिन इससे पहले ही कई जिलों में कार्यरत पुलिसकर्मियों एसआई दयालूराम साहू, आरक्षक बालेश्वर तिवारी, एएसआई बलबीर सिंह, एसआई संदीप बंजारे सहित अन्य को नोटिस जारी कर पूछा गया कि क्यों न उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया जाए। इसके खिलाफ एडवोकेट अभिषेक पाण्डेय के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई है, इसमें कहा गया है कि आईपीएस अधिकारियों ने पहले ही सेवा से बर्खास्त करने की मानसिकता बना ली थी।

25 जून को आंदोलन से पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए, यह नियमों के खिलाफ है। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जस्टिस पी सैम कोशी की बेंच ने हाईकोर्ट ने नोटिस के आधार पर किसी तरह के निर्णय लेने पर अगली सुनवाई तक के लिए इस पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी।