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महिला सांसद-विधायको के इलाके में ही महिलाओं की संख्या वोटरलिस्ट में कम

छत्तीसगढ़ में स्त्री-पुरूष लिंगानुपात में असमानता है। यही असमानता वोटरलिस्ट में नाम जुड़वाने को लेकर भी देखा जा रहा है।

​जॉन राजेश पॉल | Last Modified - Apr 16, 2018, 01:57 PM IST

महिला सांसद-विधायको के इलाके में ही महिलाओं की संख्या वोटरलिस्ट में कम

रायपुर।छत्तीसगढ़ में स्त्री-पुरूष लिंगानुपात में असमानता है। यही असमानता वोटरलिस्ट में महिलाओं और पुरुषों के नाम जुड़वाने को लेकर भी सामने आई है। इस मामले में आदिवासी इलाकों की महिलाओं ने ज्यादा सक्रियता व जागरूकता का परिचय देते हुए पढ़े-लिखे माने जाने वाले मैदानी इलाकों की महिलाओं को मात दे दी है। उन्होंने पुरुषों से ज्यादा नाम मतदाता सूची में जुड़वाएं हैं। जानकार इसे राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं की दिलचस्पी के बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

घोर नक्सल कोंटा है सबसे आगे


- सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि धुर नक्सल प्रभावित और राज्य की सबसे दूरस्थ विधानसभा कोंटा सबसे आगे है। यहां 84 हजार 730 महिलाओं के मुकाबले केवल 76 हजार 735 पुरुष वोटर हैं। इसके बाद चित्रकोट विधानसभा है जहां 84 हजार 368 महिलाओं के सामने सिर्फ 76 हजार 512 पुरुष वोटर हैं। यह खुलासा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी की गई राज्य की ताजा वोटरलिस्ट से हुआ है।

- इसमें आदिवासी व कुछ अनुसूचित जाति के आरक्षित विधानसभा भी शामिल हैं। इन विधानसभाओं बिंद्रानवागढ़, डोंगरगांव, खुज्जी, मोहला, भानूप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, जगदलपुर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बीजापुर, व कोंटा शामिल हैं। अपवाद को तौर पर जगदलपुर, खल्लारी, महासमुंद, धमतरी, संजारी-बालोद और राजिम आदि विधानसभा है, जहां प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं के नाम वोटरलिस्ट में ज्यादा है।

- हालांकि ये इलाके भी वनांचल को छूते हैं। रायपुर की चारों विधानसभा सीटों पर महिलाएं पुरुषों से काफी पीछे हैं। बिलासपुर संभाग में मारवाही को छोड़ यही हाल है।

- राजधानी से लगे आरंग व धरसीवां, अभनपुर, पाटन विधानसभाओं में महिला वोटर कम हैं। दुर्ग ग्रामीण, वैशालीनगर, अहिवारा, साजा, बेमेतरा, पंडरिया, भाटापारा, बलौदाबाजार, जांजगीर, अकलतरा, पामगढ़, सक्ती, चंद्रपुर, जांजगीर, सरायपाली, बिलाईगढ़, कसडोल में भी स्थित ठीक नहीं है।

- भानूप्रतापपुर इस मामले में आगे दिखता है तो उसका पड़ोसी विधानसभा अंतागढ़ पीछे हैं। कवर्धा आगे है तो नवागढ़ पीछे हैं। धमतरी जिले में सिहावा व धमतरी विधानसभा बढ़त पर हैं तो कुरुद पीछे है। सरगुजा संभाग में भी बैकुंठपुर, भटगांव, प्रतापपुर, रामानुजगंज में काफी पीछे हैं तो भरतपुर, मनेंद्रगढ़, जशपुर, अंबिकापुर थोड़ी कसर रह गई है। रायगढ़, कटघोरा, कोरबा, लोरमी, मुंगेली, तखतपुर, बिल्हा, बेलतरा व मस्तूरी में महिलाओं में जागरूकता कम है या पुरुषों को उन्हें आगे बढ़ाने में रूचि नहीं दिखती।


ये हैं टॉप विधानसभा (महिलाएं प्रति हजार पुरुषों से आगे)

कोंटा - 1104
चित्रकोट - 1103
दंतेवाड़ा - 1087
बीजापुर - 1077
जगदलपुर - 1056
नारायणपुर - 1052
कांकेर - 1052
भानूप्रतापपुर - 1047
सिहावा - 1036
केशकाल - 1034
कोंडागांव - 1034

बस्तर - 1032
धमतरी - 1027
धरमजयगढ़ - 1027
मारवाही - 1025
महासमुंद - 1024
पत्थलगांव - 1023
बिंद्रानवागढ़ - 1020
मोहला - 1020
डौंडी लोहारा - 1019
खल्लारी - 1017
राजनांदगांव - 1017
सीतापुर - 1014
राजिम - 1011
संजारी-बालोद - 1011
खुज्जी - 1011
कुनकुरी - 1007
रामपुर -1005
कवर्धा - 1004

महिला विधायकों व सांसदों के क्षेत्र स्थिति एक नजर में

तीन महिला विधायक आगे, तीनों आदिवासी


मोहला-मानपुर - तेजकुंवर नेताम विधायक हैं। हजार पुरुषों पर यहां 1020 महिला मतदाता हैं।


डौंडी लोहारा - अनीला भेंडिया विधायक हैं। यहां हजार पुरुषों पर 1019 महिलाएं हैं।


दंतेवाड़ा - देवती कर्मा विधायक हैं। हजार पुरुषों पर उनसे ज्यादा 1087 महिला वोटर हैं।


सात महिला विधायक पीछे हैं

कोटा - डॉ. रेणु जोगी विधायक हैं। यहां एक हजार पुरुषों पर केवल 985 महिला मतदाता हैं।
दुर्ग ग्रामीण - रमशीला साहू विधायक व मंत्री भी है। यहां हजार पुरुषों के पीछे केवल 971 महिला वोटर हैं।
डोंगरगढ़ - सरोजनी बंजारे विधायक हैं। सिर्फ 985 महिला मतदाता हैं हजार पुरुष वोटर के मुकाबले।
लैलूंगा - सुनीति राठिया विधायक व संसदीय सचिव हैं। हजार पुरुषों पर 987 महिला वोटर हैं।
सारंगढ़ - केराबाई मनहर विधायक हैं। यहां हजार पुरुष वोटर पर कुछ कम 997 महिला वोटर हैं।
बसना - रूप कुमारी चौधरी विधायक व संसदीय सचिव हैं। 1000 पुरुषों पर 997 महिला वोटर हैं।
भरतपुर सोनहट - चंपादेवी पावले विधायक हैं। हजार पुरुषों के पीछे केवल 992 महिला वोटर हैं?

महिला सांसदों के इलाके में कम जागरूकता


- जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र से कमलादेवी पाटले लगातार दो बार की सांसद हैं। इसके बावजूद उनके क्षेत्र की विधानसभाओं में कम महिलाओं के नाम वोटरलिस्ट में है। यहीं हाल दुर्ग की हाल ही निर्वाचित राज्यसभा सरोज पांडेय के गृह संभाग का है। वे लोकसभा सांसद, महापोर व विधायक भी रह चुकी हैं। उनके प्रभाव वाली दर्जनभर विधानसभाओं में महिलाएं पुरुष वोटरों से पीछे हैं।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ


- केंद्रीय चुनाव अायोग ने वोटरलिस्ट में नाम जोड़ने व मतदान करने को लेकर जागरूकता फैलाने बड़े-बड़े काम किए हैं। महिलाओं पर असर ज्यादा पड़ा है। न सिर्फ नाम जुड़वाने बल्कि दूरस्थ व आदिवासी इलाकों में वोटिंग का परसेंटेज भी बढ़ा है। देश के लिए ये काफी अच्छे संकेत हैं। - डॉ. आलोक शुक्ला, पूर्व सीईओ छत्तीसगढ़ व पूर्व डिप्टी कमिश्नर केंद्रीय चुनाव आयोग दिल्ली।
- सबसे बड़ी वजह यह है कि आदिवासी क्षेत्रों में भ्रूण हत्या कम होती है। वहां हर काम में महिलाओं के आगे रहने की प्रवृत्ति रही है। मैदानी इलाकों में यह कम देखने में आता है। फिर भी मैं यह कहूंगा कि अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में महिला-पुरुष लिंगानुपात अच्छा है। - डॉ. सुशील त्रिवेदी, पूर्व आईएएस व पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त छत्तीसगढ़।

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Web Title: mahila sansad-vidhaayko ke ilaake mein hi mahilaon ki snkhyaa votrlist mein km
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