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ढाई हजार के महंगे सूचर के कारण डेढ़ माह नहीं हुई सर्जरी, पैसे मांगने का वीडियो भी नहीं जांचा

Raipur News - अंबेडकर अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में बिरगांव का युवक डेढ़ महीने तक भर्ती रहा। ढाई हजार रुपए के फाइबर वाले सूचर...

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 03:21 AM IST
Raipur News - no more than one and a half months of surgery due to expensive two and a half hours no video of asking for money
अंबेडकर अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में बिरगांव का युवक डेढ़ महीने तक भर्ती रहा। ढाई हजार रुपए के फाइबर वाले सूचर के कारण डाक्टरों ने उसकी सर्जरी नहीं की। इस दौरान बार-बार उसके परिजनों पर सूचर लाने या उसके पैसे देने के लिए दबाव डाला गया। मंगलवार को पैसे मांगने वाला जूनियर डाक्टर का वीडियो वायरल होने के बाद डाक्टरों ने आनन-फानन में सर्जरी की और वही साधारण सूचर लगा दिया, जो अस्पताल में उपलब्ध था। इसके बावजूद अब तक इस मामले की जांच शुरू नहीं की गई। ये तक नहीं पूछा जा रहा है कि इतने दिनों तक सर्जरी क्यों नहीं की गई? हालांकि अस्पताल में उपलब्ध सूचर लगाने से स्पष्ट हो गया कि डाक्टर जानबूझकर बाहर से सूचर मंगवा रहे थे।

वीडियो में सब स्पष्ट है, इसके बाद भी हड्डी रोग विभाग के सीनियर डाक्टर पैसे मांगने वाली बात मान ही नहीं रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि विवाद पैसों को लिए नहीं हुआ है। चर्चा है कि सीनियर डाक्टरों का एक बड़ा वर्ग पूरे मामले पर पर्दा डालने के प्रयास में है। जानकारों का कहना है कि अस्पताल उन सभी विभागों में जहां छोटी-बड़ी सर्जरी की जा रही है, वहां मरीजों के परिजनों और रिश्तेदारों को बाहर से दवाएं और उपकरण अनिवार्य रूप से मंगवाए जा रहे हैं। मरीज के रिश्तेदारों को ऑपरेशन में उपयोग किए जाने वाले उपकरण की क्वालिटी का हवाला देकर ही उन पर दबाव डाला जाता है। उन्हें एक तरह से डराते हुए कहा जाता है कि यहां उपलब्ध सामान को लेकर वे कोई गारंटी नहीं लेंगे। मरीज के जीवन से जुड़ा मामला होने के कारण परिवार वालों के सामने दूसरा कोई विकल्प नहीं रहता। इसी का फायदा उठाया जा रहा है।

हड्डी रोग विभाग में डेढ़ महीने से भर्ती मरीज से संबंधित वीडियो को लेकर डाक्टर लॉबी में कई तरह की चर्चाएं हैं। मरीज के घुटने खराब हो गए थे। वह डा. राजेंद्र अहीरे की यूनिट में भर्ती था। डा. अहीरे ने ही मरीज का ऑपरेशन किया।

इमरजेंसी-गरीब जरूरतमंद मरीजों के लिए हर माह मिलते हैं 25 हजार

हड्डी रोग विभाग को इमरजेंसी और गरीब जरूरतमंद मरीजों के लिए हर महीने 25 हजार का इंफ्रेस बजट मिलता है। ये बजट केवल इसीलिए दिया जाता है कि अस्पताल में आने वाला कोई भी मरीज बिना इलाज के ना लौटे। हर हाल में मरीज का इलाज हो सके। इस बजट का आयुष्मान भारत योजना या स्मार्ट कार्ड फ्री योजना से कोई संबंध नहीं है। ये पैसे डाक्टर अपनी मर्जी से किसी भी मरीज पर खर्च कर सकते हैं। उन्हें केवल खर्च का बिल प्रस्तुत करना होता है। ये बजट होने के बाद भी मरीज को डेढ़ महीने तक इंतजार करवाया गया।

आईसीसीयू के बाहर बैठते हैं एजेंट वहीं बिक्री और वहीं पेमेंट

हार्ट के मरीजों की एंजियोप्लास्टी के लिए स्टेंट, कैथेटर, बलून अनिवार्य है। अंबेडकर की कैथलेब यूनिट है। जहां एंजियोप्लास्टी होती है, उसी कमरे के बाहर जरूरी सामान की सप्लाई करने वाली एजेंसी के एजेंट बड़ा सा बैग लेकर बैठे रहते हैं। डाक्टर पहले मरीजों और उनके परिजनों को को उन एजेंटों के बारे में बताते हैं। परिजन जब उनके पाास पहुंचते हैं वे दुकान खोलकर बैठ जाते हैं। परिजनों से बजट पूछ-पूछकर उस हिसाब से सामान दिखाया जाता है। पैसों का लेन-देन भी अस्पताल के कॉरीडोर में ही होता है।

नेत्र विभाग में भी लैंस लेकर कई नामी कंपनी के एजेंट घूमते हैं। केवल संजीवनी कोष वालों को ही अस्पताल प्रबंधन सामान खरीदकर देता है।

जिम्मेदार कहते हैं



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