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कांग्रेस में पैराशूट प्रत्याशियों को टिकट नहीं, कई नेताओं-अफसरों को झटका

राजीव भवन में दिनभर सीटों पर मंथन करते रहे वोरा, पुनिया, बघेल, सिंहदेव व अन्य नेता

Danik Bhaskar | Sep 09, 2018, 01:18 AM IST
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रायपुर. टिकट की प्रत्याशा में कांग्रेस में धड़ाधड़ शामिल हो रहे अफसरों और नेताओं को पार्टी ने तगड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने टिकट के लिए कांग्रेस में आए लोगों को पैराशूट उम्मीदवार बताकर कहा था कि उनका पैराशूट काट दिया जाएगा। शनिवार को कांग्रेस के आला नेताओं ने राजधानी में हुई बैठक में 8 सीटों पर दावेदारी कर रहे ऐसे अफसरों-नेताओं को खारिज कर दिया और तय किया कि पार्टी अध्यक्ष की मंशा के अनुरूप पैराशूट उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया जाएगा। नेताओं ने एकराय होकर कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को टिकट देने से पार्टी के पुराने नेता और कार्यकर्ता दूर हो जाएंगे, जिसे पार्टी अभी बर्दाश्त नहीं कर सकती।

कांग्रेस दफ्तर राजीव भवन में शनिवार को प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया समेत कई नेताओं की मौजूदगी में हुई बैठक में करीब 8 सीटों के उन उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा हुई, जो हाल में नौकरी वगैरह छोड़कर कांग्रेस में आए और टिकट मांग रहे हैं। बैठक में इसकी चर्चा शुरू होते ही एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने किसी भी पैराशूट उम्मीदवार को टिकट नहीं देने की मंशा जता दी है। सूत्रों के मुताबिक अध्यक्ष का जिक्र होते ही तमाम नेता एकराय हो गए कि ऐसे लोगों को टिकट देना तो दूर, उनके नामों पर विचार भी नहीं किया जाएगा। इससे पहले, प्रदेश प्रभारी पुनिया ने भास्कर से बातचीत में कहा था कि पार्टी में सभी का स्वागत है, लेकिन टिकट के मामले में प्राथमिकता पुराने कार्यकर्ताओं को ही मिलेगी। आज हुई बैठक में पुनिया के अलावा पीसीसी चीफ भूपेश बघेल, नेेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव और डा. चरणदास महंत समेत कई नेता शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में भी कुछ सिंगल नाम तय हुए हैं।

क्षेत्र बदलने वालों पर विचार नहीं: कई नेता अपनी पुरानी सीट छोड़कर नई सीट से दावेदारी कर रहे हैं। स्थानीय नेताआें आैर कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए क्षेत्र बदलने वाले ऐसे नेताआें को भी टिकट नहीं देने पर बात की गई। इस बार आधा दर्जन से ज्यादा नेता नए सीट से दावेदारी कर रहे हैं।

सिटिंग एमएलए को टिकट देना जरूरी नहीं : पिछली बार के सभी विधायकों को टिकट देना जरूरी नहीं है। नेताआें ने कहा कि कई विधायकों का परफार्मेंस ठीक नहीं है। ऐसे विधायकों को टिकट देने से पार्टी को नुकसान हो सकता है। इसलिए ऐसे विधायकों का टिकट काटा जा सकता है।

जीतने वाले चेहरों को प्राथमिकता : बैठक के दौरान कई ऐसे चेहरों पर भी विचार किया गया जिनकी प्रदेश स्तर पर पहचान उतनी नहीं है लेकिन जो स्थानीय स्तर पर अपना खासा प्रभाव रखते हैं ऐसे जीत सकने वाले चेहरों को इस बार टिकट देना पार्टी की पहली प्राथमिकता है।
30-35 नाम आए 4-5 में : चुनाव समिति के पास अधिकांश सीटों से 30-35 दावेदारों के नाम आए थे। ऐसे सीटों से सभी दावेदारों के नामों की छंटनी करते हुए 4-5 प्रत्याशियों का पैनल तैयार किया गया है। इन्हीं नामों से अंतिम नाम तय किए जाएंगे।

स्क्रीनिंग 15 तारीख से पहले : शुक्रवार और शनिवार को जो नाम फाइनल किए गए, उन्हें स्क्रीनिंग कमेटी 15 तारीख से पहले अंतिम रूप दे देगी। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक 15 सितंबर को रायपुर में प्रस्तावित है। इसके अध्यक्ष भुवनेश्वर कलिता, रोहित चौधरी आैर अश्विन कोतवाल बैठक में चुनाव समिति की ओर से भेजे नामों का मिलान स्क्रीनिंग कमेटी के सर्वे के आधार पर बनी सूची से करेंगे। इसके बाद मिली-जुली सूची फाइनल करके केंद्रीय चुनाव समिति को भेज दी जाएगी।

भाजपा में ऐसे कई प्रत्याशी: पैराशूट उम्मीदवारों को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को जो स्टैंड लिया, इससे भाजपा की मुश्किल बढ़ सकती है क्योंकि वहां भी कई पैराशूट उम्मीदवार हैं जिन्हें टिकट देने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक चर्चित अफसर समेत कई सरकारी कर्मचारी तथा अन्य लोग हाल में पार्टी में शामिल हुए हैं। पार्टी में ही इनकी सीट को लेकर बातें हो रही हैं। भाजपा के लोग खुली राय जाहिर नहीं कर रहे हैं, लेकिन बड़े वर्ग में पैराशूट उम्मीदवारों को लेकर नाराजगी दिखने लगी है। कई नेताओं का मानना है कि पार्टी में चाहे कोई भी आए, पहले उससे 4-5साल तक काम करवाया जाए, उसके बाद टिकट पर विचार होना चाहिए।