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अवर सचिव ने दो साल तक वन अफसर की फाइल दबाकर रखी, इस कारण नहीं हुई जांच और कार्रवाई, अब नोटिस

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 07:14 AM IST

वन विभाग से सचिव स्तर के अधिकारी ने नोटिस देते हुए 15 दिन में तत्कालीन अवर सचिव से अपना पक्ष रखने को कहा है।

Notice to Upper Secretary on charges of negligence

रायपुर. वन विभाग के एक तत्कालीन अवर सचिव के खिलाफ अपने एक अफसर की जांच फाइल दो साल से ज्यादा समय तक दबाने के मामले में नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में साफ लिखा गया है कि इस तरह की बरती गई लापरवाही के कारण आरोपी अफसर के खिलाफ चल रही जांच प्रभावित हुई है।

दरअसल 2011 के एक मामले में वन विभाग के खिलाफ विभाग सिर्फ इसलिए कार्रवाई नहीं कर पाया था क्योंकि उसकी जांच फाइल रोककर रखी गई थी। जबकि किसी भी विभागीय जांच को जिस अधिकारी के जिम्में है, उसे पदस्थ रहने के दौरान ही पूरा करना होता है। अब इस मामले में उस दौरान के वन विभाग में पदस्थ रहे अवर सचिव सुरेंद्र सिंह बाघे जो वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं, उन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।

भास्कर की पड़ताल में सामने आई ये बात

भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि वन विभाग से सचिव स्तर के अधिकारी ने नोटिस देते हुए 15 दिन में तत्कालीन अवर सचिव से अपना पक्ष रखने को कहा है। बताया जा रहा है कि जवाब न देने या अपना पक्ष सही तरीके से रखने पर मंत्रालय के सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से अवर सचिव बाघे के खिलाफ जल्द ही विभागीय जांच भी हो सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसमें मुख्य सचिव और वन विभाग से कार्यवाही करने का अनुरोध भी किया है। वन अफसर की फाइल को आगे न बढ़ाने और जानबूझकर रोककर रखने का मामला पाया गया है। 15 मई को नोटिस जारी किया गया है।

7 साल पुराना मामला, बारसूर में रहे फॉरेस्ट अधिकारी के खिलाफ हुई थी जांच, अब मंत्रालय ने मांगा जवाब

सात साल पुराने मामले में फाइल दबाने को लेकर यह नोटिस जारी किया गया है। उस दौरान अशोक कुमार सोनवानी वनक्षेत्रपाल परिक्षेत्र अधिकारी बारसूर को पद पर रहते हुए अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीनता का दोषी पाया गया था। इस मामले में तत्कालीन वन संरक्षक रायपुर ने 29 जून 2011 को छग सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील नियम 1966 के नियम 4 के तहत जांच और कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इसे लेकर 25 जुलाई 2011 को सोनवानी को तत्कालीन वन विभाग के सचिव के सामने सुनवाई के लिए पेश किया गया। सुनवाई के बाद इस मामले में आगे की जांच और कार्यवाही कार्यवाही की मंजूरी दी गई थी।

अगर समय पर नहीं दिया उत्तर तो होगी कार्रवाई
अवर सचिव बाघे को दिए गए नोटिस में लिखा है कि उस वक्त वो वन विभाग में पदस्थ थे। विभागीय जांच से संबंधित फाइल को पेश करने में सवा दो साल की देरी की। जो इस जांच के लिहाज से बहुत ज्यादा है। नोटिस में ये भी लिखा है कि मामले को देर से पेश करने की वजह से ही संबंधित के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। बाघे से विभागीय जांच जैसे गंभीर प्रकरण में ढिलाई बरतने पर भी जवाब मांगा गया है। 15 मई को जारी नोटिस का जबाव देने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है। समय सीमा में जवान न देने पर या समाधानकारण उत्तर न मिलने पर एक पक्षीय कार्रवाई भी की जाएगी।

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