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किडनी की बीमारी से सुपेबेड़ा में फिर एक मौत, अब तक 61 लोगों ने तोड़ा दम

एक सप्ताह में गई दूसरी जान, उपचार के दौरान महिला की हुई मौत, मेकाहारा जाने से परिजनों का इनकार

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 02, 2018, 01:43 PM IST

किडनी की बीमारी से सुपेबेड़ा में फिर एक मौत, अब तक 61 लोगों ने तोड़ा दम

गरियाबंद।छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के किडनी रोग प्रभावित गांव सुपेबेड़ा में लोगों की माैत का सिलसिला जारी है। गांव में फिर एक महिला की मौत हो गई है। स्थानीय अस्पताल में उपचार के दौरान महिला ने बुधवार को दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने महिला को मेकाहारा रेफर किया था, लेकिन परिजनों ने ले जाने से इनकार कर दिया। किडनी की बीमारी से सुपेबेड़ा गांव में डेढ़ साल के अंदर 61 लोगों की मौत हो चुकी है।

- सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी से मौत का एक सप्ताह में यह दूसरा मामला है। 29 अप्रैल को पदमनी बाई की मेकाहारा में इलाज के दौरान मौत हो गयी थी। इसके बाद बुधवार को भोजनी बाई की मौत के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा है। गांव में अब तक किडनी की बीमारी से 61 लोगों की मौत हो चुकी है, मौत का ये सिलसिला पिछले डेढ़ साल से निरंतर जारी है।

- दो दिन पहले भोजनी बाई की तबियत बिगड़ने पर उसे देवभोग सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी हालत नाजुक देखकर डॉक्टरों ने मेकाहारा ले जाने की सलाह दी, लेकिन परिजनों ने वहां ले जाने से इनकार कर दिया।

- परिजनों का कहना था कि उन्हें मेकाहारा के इलाज पर भरोसा नहीं है। परिजन भोजनी बाई को मेकाहारा ले जाने की बजाय घर ले गए। दो दिन जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद भोजनी बाई की बुधवार को मौत हो गई।

लोगों का मेकाहारा से विश्वास हटा!

-लगातार हो रही मौतों को देखते हुए लोग अब इलाज के लिए मेकाहारा जाने को तैयार नहीं है। पहले भी कई बार उपचार के दौरान मेकाहारा में मरीजों की मौत हो चुकी है। ऐसे में ग्रामीणों का विश्वास अब डगमगाने लगा है। ग्रामीणों ने अब सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

- शासन द्वारा ग्रामीणों को बेहतर इलाज और बीमारी की रोकथाम के लिए अब तक कई आश्वासन दिये गए, लेकिन उनका असर गांव में कहीं भी देखने को नहीं मिल रहा है। अब तो हालात इतने बदतर हो गये है कि ग्रामीणों ने सरकार पर विश्वास करना भी बंद कर दिया है।

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