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बरसों पहले ठगे गए, पैसे वापस मिलने की उम्मीद से एक महीने में 10 हजार अर्जियां

चिटफंड कंपनियों से रकम वापस दिलाने के लिए कलेक्टर ने आठ चिटफंड कंपनियों की छह करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कुर्क की थी।

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 07:25 AM IST
Petition in chitfund scam

रायपुर. चिटफंड कंपनियों से बरसों पहले ठगे गए लोगों में रकम वापस मिलने की ऐसी उम्मीद जगी है कि एक माह से भी कम समय में प्रशासन के पास 10 हजार से ज्यादा अर्जियां आ गई हैं। ठगे गए लोगों की अर्जी लेने जिला कोषालय और एडीएम दफ्तर में इंतजाम किए गए थे। अब वहां आवेदन लेना बंद करके एसएसपी ऑफिस के सामने काउंटर बना दिया गया है। आवेदन वहीं लिए जा रहे हैं।

भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक अब तक 10 हजार लोगों से औसतन 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम वापसी के आवेदन मिल चुके हैं। उधर, चिटफंड कंपनियों की 6 करोड़ रुपए की प्रापर्टी तलाशकर कुर्की की प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रशासन ने कुछ कंपनियों की 3 करोड़ रुपए की संपत्ति का और पता लगाया है। इनके रजिस्ट्री के दस्तावेज भी मिल गए हैं।


प्रशासन का दावा है कि आवेदन लेने का सिलसिला मई तक चलेगा, इसलिए जिले से 20 हजार आवेदन मिल सकते हैं। इनमें सिर्फ रायपुर से 15 हजार लोग आवेदन कर सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या की वजह से अफसरों ने आवेदनों को अलग-अलग जोन में बांटने का फैसला किया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस इलाके से कितने लोग ठगे गए हैं। पुलिस ने इन आवेदनों के आधार पर चिटफंड कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसे ऊपरी अदालतों में इन कंपनियों के खिलाफ लगी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पेश किया जाएगा।

दावा 20 करोड़ से ऊपर का? : अब तक जो आवेदन लगाए गए हैं, उनमें से अधिकांश आवेदनों में लोगों ने 2 हजार से 20 हजार रुपए तक ठगे जाने की बात कहते हुए रकम वापसी का दावा किया है। प्रशासनिक अफसरों का अनुमान है कि हर आवेदन औसत रूप से 10 हजार रुपए के दावे का माना जाए तो अभी 10 करोड़ रुपए से अधिक का दावा हो चुका है। अगले डेढ़ माह में इतने ही आवेदन और मिलने की संभावना है। ऐसे में, प्रशासन पर दावेदारों के 20 करोड़ रुपए से अधिक लौटाने का भार होगा।

नीलामी कोर्ट के आदेश से
चिटफंड कंपनियों से रकम वापस दिलाने के लिए कलेक्टर ने आठ चिटफंड कंपनियों की छह करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कुर्क की थी। अभी तक यह संपत्ति नीलाम नहीं हुई है क्योंकि कलेक्टर की कुर्की के आदेश के खिलाफ कंपनियों ने जिला कोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट के आदेश के बाद ही कंपनियों की संपत्ति नीलाम हो सकेगी। फिलहाल इस मामले अब प्रशासन की ओर से सभी प्रकरणों में सुनवाई तेज करने का आग्रह किया जा रहा है। इसके लिए आवेदन भी लगा दिया गया है। इन कंपनियों के जिन एजेंटो को पकड़ा गया था, अभी उनके बयान चल रहे हैं।


नई प्रापर्टी की रजिस्ट्री जब्त
पुलिस और जिला प्रशासन ने आधा दर्जन चिटफंड कंपनियों की प्रापर्टी की जानकारी और जुटा ली है। इसका भौतिक सत्यापन चल रहा है। ये प्रापर्टी तीन करोड़ से ज्यादा की है। इनकी कुर्की के लिए कलेक्टर के पास प्रतिवेदन पेश किया जाएगा। कुर्की में किसी भी तरह का कोई तकनीकी पेंच न फंसे इसलिए संपत्तियों की जानकारी पुख्ता की जा रही है। मौके पर जाकर संपत्तियों के फोटो लेने के साथ ही रजिस्ट्री दफ्तर से उसके दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए हैं। ये सभी संपत्तियां चिटफंड कंपनियों के डायरेक्टर, बोर्ड मेंबर या उनके रिश्तेदारों के नाम पर हैं।

अधिकांश कंपनी डायरेक्टर फरार
छत्तीसगढ़ में चिटफंड चलाने वाली कंपनियों के अधिकतर डायरेक्टर और मुख्य संचालक फरार है। पुलिस ने इन्हें पकड़ने के लिए देश के कई राज्यों में दबिश दी, लेकिन बड़ी सफलता नहीं मिल पाई। पुलिस की माने तो अभी भी हर कंपनी में कोई न कोई डायरेक्टर फरार है। इनमें से कुछ लोगों के विदेश भागने की भी खबर है। पुलिस का कहना है कि इनकी गिरफ्तारी के लिए मुख्य राज्यों में सूचनाएं भेज दी गई है। यही वजह है कि पिछले महीने कुछ बड़े आरोपी पकड़े गए थे। इसमें से एक को अंबाला हरियाणा से पकड़ा गया था। उसने चिटफंड कंपनी के पैसे से महंगा रिसोर्ट खरीदकर वहीं रह रहा था। इसी तरह कई और डायरेक्टर हैं जो अभी भी फरार है, लेकिन कई शहरों में उनकी बड़ी संपत्तियां हैं। उनकी इस प्रॉपर्टी की भी जानकारी जुटाई जा रही है, लेकिन दूसरे शहरों की प्रॉपर्टी का खुलासा उनकी गिरफ्तारी के बाद ही रही है।

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