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नक्सलियों पर और बढ़ेगा दबाव, जीरो वोटिंग वाले इलाकों में भी मतदान कराने का प्रयास

ऑपरेशन तेज होंगे : कई जिलों के एसपी और कलेक्टर जुटे इस काम में, आईजी बोले- ऑपरेशन ऐसे ही जारी रहेंगे

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 11:00 AM IST
फाइल फोटो फाइल फोटो

जगदलपुर। बस्तर के जंगलों में इन दिनों फोर्स ने आक्रामक रुख अपनाया है। जंगल में लगातार ऑपरेशन लांच किए जा रहे हैं और जवान नक्सलियों के कैंपों तक जाकर एनकाउंटर किया जा रहा है। ये ऑपरेशन और प्रेशर आने वाले विधानसभा चुनावों तक ऐसे ही जारी रहेंगे।

- प्रशासनिक और पुलिस अफसरों के मुताबिक इस बार विधानसभा चुनावों तक नक्सलियों पर इसी तरह से दबाव बनाया जाएगा ताकि वे चुनावों में व्यवधान न डाल पाएं। इन तैयारियों के बीच दूसरी तरफ दोरनापाल-जगरगुंडा मार्ग पर रविवार की दोपहर नक्सलियों ने दो पिकअप को फूंक दिया।

- बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि पूरे संभाग में खासतौर पर जो नक्सल प्रभावित इलाके हैं वहां जवान लगातार ऑपरेशन जारी रखेंगे। किसी भी कीमत पर ऑपरेशन अब चुनाव से पहले बंद नहीं होंगे। हमारी कोशिश है कि नक्सली चुनाव के दौरान कोई उत्पात न कर पाएं और मतदान शांतिपूर्वक ढंग से हो जाए।

- इधर बीजापुर समेत कई जिलों के एसपी व अन्य अफसर अपने-अपने जिलों में नक्सल प्रभावित इलाकों में जहां जीरो वोटिंग जैसी स्थिति रहती है वहां भी शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने की रणनीति पर काम मर रहे हैं। एक दिन पहले ही बीजापुर कलेक्टर केडी कुंजाम ने भी कहा था कि इस बार ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है कि मतदान के बाद लोगों की उंगलियों पर अमिट स्याही न लगे।


ये भी जानें क्यों है फोर्स का दबाव जरूरी
- बस्तर संभाग के छह जिलों के आठ विधानसभा क्षेत्रों में 1760 पोलिंग बूथ
- 200 पोलिंग बूथ ऐसे जहां 1 से 20 वोट पड़ते हैं।
- जगदलपुर विधानसभा के हर्राकोड़ेर और आसपास के आठ-दस बूथों पर भी होती ही बेहद कम वोटिंग।
- जगदलपुर के कोलेंग में पिछले चुनाव में मतदान बूथ ही नहीं बन सका यहां के लोगों ने 15 किमी दूर दरभा में मतदान किया।
- पचास बूथों तक पोलिंग पार्टी को पहुंचाने के लिए सेना के हेलिकाप्टर का उपयोग किया जाता है।
- दंतेवाड़ा विधानसभा में कुल 266 मतदान केंद्र हैं। इनमें से आठ बूथों पर जीरो वोटिंग हुई।
- कोंटा विधानसभा क्षेत्र के सिलगेर, उरसंगल, भीमापूरम, पूर्वती, बैनपल्ली, गुमोड़ी, सुर्पनगुड़ा, पेंटा, एलमापल्ली, कामारास, मुकरम सहित 13 से ज्यादा बूथों पर वोटिंग ही नहीं हुई।
- हर चुनाव से पहले नक्सली चुनाव नहीं लड़ने और वोट नहीं डालने का भी आह्वान करते हैं।

अभी 40 हजार जवान, चुनाव में अतिरिक्त बल आएगा
- बस्तर के नक्सल मोर्चे पर सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, जिला पुलिस बल, एसटीएफ सहित अन्य बलों के चालीस हजार जवान हैं। ऐसा माना जा रहा है कि चुनावों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए करीब 20 हजार जवानों की अतिरिक्त तैनाती कराई जा सकती है। हालांकि अभी इस मामले में कोई भी अफसर अधिकृत तौर पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

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