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मवेशियों को दिन में 2 बार गरम-गरम रोटियां खिलाता है एक परिवार, इस तरह से कर है वो पिता की इच्छा पूरी

पीलूराम साहू

Apr 17, 2019, 12:49 PM IST

छत्तीसगढ़ न्यूज: रोज से दो शिफ्ट में निकलता है वो और रोजाना खर्च करता है इतने रुपए

Raipur Chhattisgarh News in Hindi : Story of Emotion and Precedence
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रायपुर (छत्तीसगढ़)। बेजुबान मवेशियों की भूख-प्यास मिटाने की शैलेंद्रनगर के लुनावत परिवार की कोशिश दरअसल इंसानी जज्बे की मिसाल है क्योंकि अलग-अलग समाजों और राजधानी में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो बेजुबानों या जरूरतमंदों की जरूरत पूरी करने में लगे हैं। उन्हीं में से एक किस्सा है लुनावत परिवार का।

यह परिवार न सिर्फ जैन समाज, बल्कि दूसरे समाज के लोगों की मदद से पिछले चार साल से गाय तथा दूसरे 300 से ज्यादा मवेशियों को रोजाना रोटी खिला रहा है। इसके लिए उनके यहां 25 किलो गेहूं के आटे की रोटियां रोजाना बन रही हैं, वह भी तकरीबन 700 या ज्यादा। इस काम में लगे हैं प्रवीण लुनावत, जो एक रिक्शे में रोटियां लेकर दो शिफ्ट में सेवाभावी लोगों को रवाना करते हैं। सुबह 11 बजे और दोपहर 3 बजे। भास्कर को लुनावत बताते हैं कि सेवा का संचालन उनके 85 वर्षीय पिता आसकरण लुनावत की इस इच्छा को पूरी करने के लिए शुरू किया कि जितनी शक्ति से कर सकते हो, कोशिश यही करो कि गौमाता और गौवंश ही नहीं, जो भी मवेशी नजर आ रहे हैं वह भूखे न रहें। इसी को ध्यान में रखकर उनके परिवार ने 2015 में यह सेवा शुरू की। गायों को रोटी खिलाने के लिए एक रिक्शा सुबह 11 बजे व दोपहर 3 बजे निकलता है। दो शिफ्ट में गाय व मवेशियों को रोटी खिलाई जा रही है। रोज 20 किमी के दायरे में गायों को रोटियां खिलाई जा रही है।

दोबारा शुरू की गई सेवा


लुनावत ने बताया कि 2015 से 2017 तक लगातार तीन साल तक मवेशियों को खिलाने का सिलसिला चला। 2018 में कुछ कारणों से यह सेवा बंद हो गई। इसके बाद पिता आसकरण ने अपने पुत्र प्रवीण को गौमाता को सेवा करने के लिए प्रेरित किया। नतीजा यह हुअा कि इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी से मवेशियों को रोटी खिलाने का सिलसिला फिर चल पड़ा है।

हर गाय को न्यूनतम दो-दो रोटियां


प्रवीण बताते हैं, रोटी बनाने के लिए दो महिलाओं को काम पर रखा गया है। रिक्शा के लिए एक व्यक्ति की सेवा ली जा रही है। इन्हें बाकायदा वेतन भी दिया जा रहा है। हर महीने पांच से छह गैस सिलेंडर की खपत होती है। जहां तक मवेशियों को खिलाने का सवाल है, हर गाय को कम से कम दो रोटियां दी जा रही हैं। गाय ही नहीं, रास्ते में नजर अाने वाले हर मवेशी को एक-एक रोटी तो खिला ही रहे हैं।

रोजाना 1500 रुपए हो रहे हैं खर्च


25 किलो आटा, महिलाओं व रिक्शा चालक को वेतन में हर दिन 1500 रु. खर्च होता है। यह खर्च परिवार के अलावा जैन व दूसरे समाज के सहयोग से पूरा हो रहा है। कई लोग सहयोग राशि देने के लिए उन्हें फोन भी करते हैं। प्रवीण का कहना है कि कोई भी समाज या समिति इस काम के लिए 500 से लेकर 1500 रु. तक इसमें मदद कर सकता है। सहयोग के लिए मोबाइल नंबर 9425502267 पर संपर्क किया जा सकता है।

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