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केमिकल से 2 दिन में पकाकर बेच रहे कच्चे आम-केले, किडनी से दिमाग तक के लिए है घातक

केले के लिए बैन केमिकल इथेफोन के इस्तेमाल से पाचन, किडनी और न्यूरोसिस्टम पर पड़ सकता है असर।

Dainik Bhaskar

Jun 09, 2018, 12:41 PM IST

  • आम को पकाने के लिए चीन से आयातित एथिलीन राइपनर पाउच का धड़ल्ले से हो रहा है इस्तेमाल।
  • केला पकाने के लिए खर-पतवार नष्ट करने वाले खतरनाक केमिकल का किया जा रहा है इस्तेमाल।

रायपुर. राजधानी में कच्चे आम और केले को जल्दी पकाने में बैन केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। फलों को 3-4 दिन में पकाने वाले बैन केमिकल को बाजार में खुलेआम बेचा जा रहा है। भास्कर डॉट कॉम के एक स्टिंग ऑपरेशन में इसका खुलासा हुआ है। यही नहीं, प्रतिबंधित केमिकल को अवैध तरीके से बेचने के साथ ही इससे फलों को कैसे पकाया जाए। इसकी ट्रेनिंग भी केमिकल बेचने वाले और फल विक्रेता दे रहे हैं। दैनिक भॉस्कर डॉट कॉम ने स्टिंग ऑपरेशन में इस गोरखधंधे की परत-दर-परत उधेड़कर आपके सामने रखने की कोशिश की है।

फल कारोबारी बन दुकानदारों से किया संपर्क
- भास्कर डॉट कॉम की टीम ने फल कारोबारी बनकर केमिकल बेचने और फल विक्रेताओं से संपर्क किया। उनसे जल्दी मुनाफा कमाने और फलों को जल्दी पकाने के बारे में पूछा। इस पर विक्रेताओं ने टीम के सामने ही प्रैक्टिकल कर फलों को केमिकल से पकाने का पूरा प्रॉसेस करके दिखाया।
- कच्चे आम को जल्दी पकाने के लिए चीन से आयातित एथिलीन राइपनर पाउच और केले के लिए बैन केमिकल इथेफोन का प्रयोग किया जा रहा है। जबकि ये केमिकल शरीर के पाचन, किडनी और न्यूरो सिस्टम के लिए बेहद हानिकारक है।
- सेहत बनाने के नाम पर अक्सर लोग चमकदार व बिना दाग-धब्बे वाले पीले केले और आम खरीदते हैं और खाते हैं। जबकि इन फलों के रंग के पीछे बैन केमिकल और मानक से ज्यादा एथिलीन इस्तेमाल होना है। जानकारों का कहना है कि सुबह तक चमकदार दिखने वाले केले का रंग शाम तक एकदम फीका हो जाए तो समझिए इसे इथेफोन केमिकल के घोल में डूबोकर पकाया गया है।

केमिकल का घोल बनाकर किया इस्तेमाल
- भास्कर टीम फल दुकानदार बनकर लालपुर मंडी में एक होलसेलर से बात की। विक्रेता ने फलों को 2-3 दिन में पकाने के लिए राइपनर पाउच दिखाते हुए उसके उपयोग का तरीका भी बताया। केले के लिए इथेफोन केमिकल का घोल बनाकर यूज की विधि भी बताई।
- इसके बाद टीम जीई रोड के एक बीज दुकान पहुंची। वहां से फल को जल्दी पकाने वाला केमिकल मांगा। दुकानदार ने एथरेक्स नाम की 100 एमएल की बोतल दी। बोतल पर साफ लिखा था-दवा को न सूंघे और न ही स्पर्श करें।

एक बॉक्स में 3-4 पाउच का इस्तेमाल
- अभी सीजन में कच्चे आम प्रदेश के अलावा आंध्र प्रदेश, यूपी, बिहार और ओडिशा से आता है। वहीं, केला रायपुर समेत दूसरे जिले और महाराष्ट्र से आता है। पिछले दो महीने से रोजाना करीब 40 टन आम और 35-40 टन केले की खपत हो रही है। इनमें से अधिकांश कच्चे आम को चीन से आयातित एथिलीन राइपनर पाउच से पकाया जा रहा है। विक्रेता जल्दबाजी में एक बॉक्स में 3-4 पाउच का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह है एफएसएसएआई का मानक
- भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अनुसार आम और केले को पकाने के लिए एथिलीन गैस का उपयोग गैस चेंबर में करना है। इसका मानक 100 पीपीएम है। इससे ज्यादा इस्तेमाल पर ये सेहत के लिए नुकसानदायक है।

बैन है इथेफोन
- डॉ. अश्वनी देवांगन, सहायक आयुक्त (खाद्य) कहते हैं कि फलों को पकाने के लिए इथेफोन का इस्तेमाल करना बैन है। जहां तक चाइनीज पाउच की बात है तो उसके उपयोग से ये तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि तय मानकों के हिसाब से एथिलीन का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।
- वहीं, डॉ. अब्बास नकवी, एमडी कहते हैं कि एथिलीन और इथोफोन जैसे केमिकल का मानक से ज्यादा इस्तेमाल लोगों के सेहत पर बुरा असर पड़ता है। ये केमिकल बॉडी में जाने के बाद पाचन, किडनी और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर असर करते हैं।

एक विक्रता पाउच के इस्तेमाल की विधि बताता हुआ। एक विक्रता पाउच के इस्तेमाल की विधि बताता हुआ।
सहायक आयुक्त, खाद्य डॉ. अश्वनी देवांगन। सहायक आयुक्त, खाद्य डॉ. अश्वनी देवांगन।
इस केमिकल से पका रहे केले। इस केमिकल से पका रहे केले।
चाइनीत एथिलीन पउच। फाइल फोटो। चाइनीत एथिलीन पउच। फाइल फोटो।
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एक विक्रता पाउच के इस्तेमाल की विधि बताता हुआ।एक विक्रता पाउच के इस्तेमाल की विधि बताता हुआ।
सहायक आयुक्त, खाद्य डॉ. अश्वनी देवांगन।सहायक आयुक्त, खाद्य डॉ. अश्वनी देवांगन।
इस केमिकल से पका रहे केले।इस केमिकल से पका रहे केले।
चाइनीत एथिलीन पउच। फाइल फोटो।चाइनीत एथिलीन पउच। फाइल फोटो।
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