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चुनाव कराने में खर्च हाेंगे पौने दो अरब, 2003 का हुआ था सिर्फ 25 करोड़ में

गृह विभाग के करीब 35 करोड़ रुपए कानून व्यवस्था के इंतजाम में लगेंगे

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 01:17 AM IST
spend two billion rupees in elections

रायपुर. राज्य में नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी और राजनीतिक दल चुनावी जंग में अरबों रुपए फूंकेंगे। वहीं राज्य का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय भी 90 नए विधायकों के चुनाव में करीब दो अरब रुपए खर्च करेगा। इनमें से राज्य का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय 175.64 करोड़ रुपए व्यय करेगा।

इधर, गृह विभाग के करीब 35 करोड़ रुपए कानून व्यवस्था के इंतजाम में लगेंगे। दिलचस्प यह है कि इस बार पुलिस के इंतजाम में जितने रुपए लगेंगे, उससे भी कम में 25 करोड़ रुपए में छत्तीसगढ़ के पहले विधानसभा चुनाव 2003-04 में हुए थे। राज्य सरकार ही चुनाव कराने के लिए पैसे देती है। उसने अपने मुख्य बजट में 175.64 करोड़ रुपए और अनुपूरक बजट में 25 करोड़ रुपए रखे थे। इनमें से करीब 90 करोड़ रुपए दे भी दिए हैं, ताकि चुनावी तैयारी शुरू की जा सके। इसमें से जून तक 6.48 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे। चुनाव के लिए अक्टूबर के पहले हफ्ते में आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावशील हो जाएगी।

फोर्स-बटालियनों के लिए 35 करोड़ रुपए: विधानसभा चुनाव में इस बार फोर्स और पुलिस पर 35 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह फोर्स के मूवमेंट, भोजन आदि पर व्यय होंगे। दूसरे राज्यों के सुरक्षा बल का खर्च पहले संबंधित राज्य करती है फिर उन्हें पैसा लौटाना पड़ता है। 90 करोड़ रुपए से सभी प्रमुख बड़े खर्च होंगे। इनमें वोटिंग मशीन, वीवीपैट, मतदान दलों का मानदेय, परिवहन व्यय, कर्मचारियों का टीए-डीए अन्य शामिल है।

स्याही, माचिस, गोंद बिना चुनाव नहीं... ये भी खास: चुनाव कराने का अपना तरीका और विधि है। इसमें अमिट स्याही, ब्लेड, गोंद, धागा, माचिस, सुतली, सुभेदक मुहर, आलपिन, कार्बन, चपड़ा, सफेद पेपर, कपड़े की थैली, लचीले तारों के टुकड़े, पेंसिल, रबर, पेड आदि चीजें अहम हैं। इनके बिना चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं होती। इनका वितरण भी मतदान दलों को वोटरों के अनुपात में ही किया जाता है। इन सामग्रियों की खरीदी लाखों में करनी पड़ती है।

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