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अंबेडकर अस्पताल में 1 महीने का समर वेकेशन, 50 सीनियर डाक्टर गए छुट्टी पर

डाक्टरों के छुट्टी पर जाने से सिस्टम में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी।

Bhaskar News | Last Modified - May 02, 2018, 07:28 AM IST

  • अंबेडकर अस्पताल में 1 महीने का समर वेकेशन, 50 सीनियर डाक्टर गए छुट्टी पर

    रायपुर.अंबेडकर अस्पताल में मंगलवार 1 मई से डॉक्टरों का समर वेकेशन शुरू हो गया है। पहली तारीख को ही 50 से ज्यादा डॉक्टर छुट्‌टी पर चले गए। एक महीने बाद जब वे एक लौटेंगे, तब बाकी बचे डॉक्टर छुट्‌टी पर जाएंगे। डाक्टरों ने आपस में तय कर अपना शेड्यूल तय किया है। 1 जुलाई को डाक्टरों का समर वेकेशन खतम होगा। मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक साथ इतने डाक्टरों की कमी को दूर करने का कोई विकल्प नहीं खोजा है। रोस्टर के हिसाब से कुछ डाक्टरों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाकर खानापूर्ति कर दी गई है।


    स्वास्थ्य विभाग के अफसर हालांकि दावा कर रहे हैं कि डाक्टरों के छुट्टी पर जाने से सिस्टम में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी। डाक्टरों ने एक दूसरे की छुट्टी के हिसाब से अपना शेड्यूल बनाया है। गर्मी के दिनों में इमरजेंसी के अलावा रुटीन में ऑपरेशन कम किए जाते हैं। यही कारण है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने मई-जून के दो महीनों में डॉक्टरों के लिए समर वेकेशन घोषित किया है। हर डाक्टर के लिए एक-एक महीने का अवकाश रखा गया है। हालांकि इतने लंबे समर वेकेशन से सबसे ज्यादा परेशानी सुपर स्पेश्यालिटी विभाग के मरीजों को होती है, वे एक या दो डॉक्टर के भरोसे रहते हैं। आमतौर पर कई मरीज अपनी पसंद के डॉक्टर से इलाज करवाना चाहते हैं। ऐसी दशा में उन्हें एक-एक महीने तक इंतजार करना पड़ता है।

    अभी इन विभागों के डाक्टर गए हैं छुट्टी पर

    मेडिसिन के अलावा ऑर्थोपीडिक, पीडियाट्रिक्स, जनरल सर्जरी, ईएनटी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, नेत्र रोग, कैंसर के डॉक्टर एक महीने की छुट्‌टी पर गए हैं। वे अब एक महीने बाद ही छुट्‌टी मनाकर लौटेंगे। अफसरों के अनुसार एमसीआई का निरीक्षण नहीं होने के कारण डॉक्टरों को छुट्‌टी से अचानक बुलाने का तनाव भी नहीं है। पहले एमसीआई की टीम निरीक्षण के लिए कभी भी आ जाती थी। ऐसे में डॉक्टरों को खास हिदायत होती थी कि मुख्यालय न छोड़ें। अथवा ऐसी जगह पर रहें, जहां सूचना के बाद कॉलेज व अस्पताल पहुंचा जा सके।

    इस तरह की वैकल्पिक व्यवस्था
    प्लास्टिक सर्जरी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दक्षेस शाह छुट्टी पर हैं। वे एक जून को लौटेंगे। उनके लौटने तक केवल इमरजेंसी वाली सर्जरी ही की जाएगी। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. अमीन मेमन के अवकाश पर रहने के कारण डॉ. जीवन पटेल मरीजों का ऑपरेशन करेंगे। कार्डियोलॉजी विभाग के हेड व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्मित श्रीवास्तव छुट्‌टी पर चले गए हैं, लेकिन उन्होंने इमरजेंसी में अस्पताल आते रहने के संकेत दिए हैं। जनरल सर्जरी विभाग में एचओडी डॉ. क्षिप्रा शर्मा, प्रोफेसर डॉ. मंजू सिंह अवकाश पर हैं। वे एक से 15 जून को लौटेंगे।

    छुट्टी भी बीच में नहीं छूटेगी
    एमबीबीएस की 150 सीटों को स्थायी मान्यता मिलने के कारण पिछले तीन साल से एमसीआई की टीम भी कॉलेज का निरीक्षण करने के लिए नहीं आ रही है। पिछले छह साल में एमसीआई की टीम ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय निरीक्षण पर आती रही है। इससे अवकाश पर गए डॉक्टरों को छुट्टी अधूरा छोड़कर आना पड़ता था। ऐसे में डॉक्टरों की छुट्टी का मजा किरकिरा हो जाता था। अब वे 15 दिन से लेकर एक महीने तक बिना ब्रेक छुट्टी मना रहे हैं। कोई प्रदेश से बाहर रहता तो एमसीआई आपत्ति करती।

    ठंडी जगहें प्राथमिकता, विदेश भी
    छुट्टी के दौरान कुछ डॉक्टर परिवार के साथ विदेश जाते हैं। ज्यादातर डाक्टर देश के ही हिल स्टेशनों की सैर करते हैं। बच्चों की छुट्टी होने के कारण डॉक्टर साल में तीन से चार बार पारिवारिक टूर पर निकलते हैं। कई बार एक साथ दो या तीन छुट्टी होने पर वे टूर पर निकल जाते हैं। ऐसे डॉक्टरों की संख्या बहुतायत में है।

    संविदा डॉक्टरों को नहीं मिलती छुट्टी
    अस्पताल के संविदा डॉक्टरों को छुट्टी नहीं मिलती। मई व जून में तापमान 40 से 44 डिग्री तक रहता है। ऐसे में इमरजेंसी को छोड़कर रुटीन का ऑपरेशन नहीं किया जाता। डॉक्टरों के अनुसार गर्मी में ऑपरेशन से संक्रमण की आशंका रहती है। ऐसे में जुलाई से मरीजों के जरूरी ऑपरेशन किए जाते हैं। हालांकि नेत्ररोग विभाग में साल भर आपरेशन किया जाता है। दरअसल मोतियाबिंद के मरीज विभिन्न स्वास्थ्य शिविर से पहुंचते हैं। कई मरीज सीधे अस्पताल आ जाते हैं।

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