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छत्तीसगढ़ के होने वाले CM भूपेश वधेल के गांव में नहीं था स्कूल, वो पढ़ने के लिए रहने लगे थे 30 KM दूर, अपना पहला चुनाव ही एक वोट से हारे थे वो

3 वर्ष पहले
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दुर्ग/भिलाई . प्रदेश के नए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का मूल निवास भले ही कुरुदडीह है लेकिन उनके इस गांव में स्कूल नहीं था। इस वजह से करीब 7 साल की उम्र में उन्होंने गांव छोड़ दिया और अपने पुश्तैनी ग्राम बेलौदी पहुंच गए जहां रहकर उन्होंने पहले प्राथमिक स्कूल की पढ़ाई की। इसके बाद कक्षा 6 वीं से 11 वीं तक की पढ़ाई के लिए पास के ही गांव मर्रा गए।

दैनिक भास्कर की टीम भूपेश बघेल के गांव तक पहुंची। इस दौरान उनके रिश्ते में बड़े भाई और साथी शंकर बघेल मिले। वे फिलहाल बेलौदी के सरपंच हैं। भूपेश ने 1980 में पंच चुनाव भी लड़ा। उस वक्त चुनाव में विरोधी रहे आजाद बघेल ने 1 वोट से हराया था। भूपेश को जानने वाले बताते हैं कि पिछड़ा वर्ग से आने वाले भूपेश बघेल मूल रूप से किसान हैं। वे एक संपन्न किसान परिवार से आते हैं, उनके पूर्वजों ने भिलाई स्टील प्लांट के लिए अपनी अच्छी खासी ज़मीन दे दी थी। उनके अपने मूल गांव कुरुदडीह में तब कोई स्कूल नहीं था इसलिए वे 30 किलोमीटर दूर बेलौदी गांव में रहने चले गए। वे छठवीं कक्षा में थे जब उनके पिता नंदकुमार बघेल ने उन्हें खेती बाड़ी संभालने का काम भी दे दिया था। खेती किसानी पर भूपेश बघेल की अच्छी पकड़ है। तभी वे नारा देते हैं, "छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी, नरवा, गरवा, घुरुवा, बारी" यानी वे छत्तीसगढ़ में नदी नालों के पानी को सहेजना चाहते हैं, पशुधन को उत्पादक बनाना चाहते हैं और जैविक खेती के भरोसे खेती बाड़ी को नया आयाम देना चाहते हैं।

पत्नी ने कहा- पिछले तीन दिन से एक दबाव था, अब अच्छा लग रहा है


भूपेश के नाम का नाम जब सीएम के लिए ऐलान हुआ तब भिलाई-3 निवास में सबकी नजर टीवी पर थी। उनकी पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल कहती हैं, तीन दिन से एक दबाव सा था। आज जैसे ही बिट्‌टू (उनके लड़के चैतन्य बघेल) ने बताया कि पापा मुख्यमंत्री बन गए हैं तो इस लंबे इंतजार को विराम लगा। इतना कहते ही उनकी आंखें भर आईं और शब्द उनके गले में ही फंस गए।


भूपेश बघेल को माता-पिता की नसीहत: मैंने एक गाय से 100 कीं... खेती और गोमाता के लिए काम करो
किसान के बेटे हो। किसानों के हित में काम करो। वृद्धों की सेवा करो। युवाओं की नौकरियों का ख्याल रखो। मैंने एक गाय से 100 गाय तक गोवंश में वृद्धि की थी। खेती और गोमाता के लिए काम करो। तुम बचपन से ही जिद्दी थे। अब छत्तीसगढ़ को ऊंचाई पर पहुंचाने की जिद पकड़ो और गढ़ो... नवा छत्तीसगढ़ -बिंदेश्वरी बघेल, मां


गुस्से में मैंने कहा था- बन सकते हो तो प्रदेश के मुख्यमंत्री बनो
मैं तीनों बच्चों को इंजीनियर बनाना चाहता था। कुर्मी समाज से पहली बार मेरी दो बेटियां इंजीनियर बनीं, पर भूपेश नहीं। कालेज के दौरान भूपेश राजनीति में रुचि रखने लगे। तब मैंने गुस्से में कहा था- बन सकते हो तो मुख्यमंत्री बनो। सीएम बनोगे तो टीका लगाऊंगा। तब वो 18 साल के थे। भूपेश ने मेरे पैर छुए। -नंदकुमार बघेल, पिता


एक नजर सियासी सफर पर
- 22 साल की उम्र से ही राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत हो गई थी। 23 अगस्त 1961 को दुर्ग में जन्मे भूपेश बघेल ने 80 के दशक में कांग्रेस से सियासी पारी शुरू की थी।

- रायपुर साइंस कॉलेज में पढ़ाई की।
- शुरुआत हुई यूथ कांग्रेस के साथ। 1990 से 94 तक वह जिला युवक कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष रहे।
- 1993 में पहली बार चुनाव लड़े। 1998, 2003 और 2013 में विधायक चुने गए।
- 1998 में मुख्यमंत्री से संबद्ध राज्यमंत्री रहे।
- 1999 में एमपी सरकार में परिवहन मंत्री रहे।
- 2000 में राजस्व, पुनर्वास, राहत कार्य, पीएचई के मंत्री रहे।
- 2000 में राज्य बना, तब पाटन सीट से जीते। कैबिनेट मंत्री भी बने।
- 2003 में कांग्रेस की सरकार गई तो नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।
- 2013 में कार्य मंत्रणा समिति के सदस्य रहे।
- 2014-15 में लोक लेखा समिति के सदस्य रहे।
- भूपेश के राजनीतिक गुरु वासुदेव चंद्राकर को माना जाता है।

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