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पुलिस बनने आए ट्रांसजेंडर बोले- न बच्चों की चिंता, न फैमिली प्रॉब्लम, भर्ती हुए तो जान लड़ा देंगे

पुलिस भर्ती प्रक्रिया में पहली बार थर्ड जेंडर को शामिल किया गया है। इस संबंध में शनिवार को फिजिकल एग्जाम हुए।

कौशल स्वर्णबेर | Last Modified - May 05, 2018, 06:37 PM IST

    • रायपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस भर्ती में पहली बार थर्ड जेंडर को शामिल किया गया है। इसका फिजिकल एग्जाम शनिवार को रायपुर में स्थित पुलिस परेड ग्राउंड में हुआ। यहां 11 थर्ड जेंडर ने हिस्सा लिया और 10 पास हो गए। ये आंकड़ा बताता है कि थर्ड जेंडर में पुलिस भर्ती को लेकर कितना उत्साह है और इन्होंने कितनी जबरदस्त तैयारी की है। फिजिकल एग्जाम 27 मई तक चलेंगे। इसके बाद रिटन एग्जाम का डेट डिक्लेयर किया जाएगा। इस मौके पर थर्ड जेंडर समुदाय के लोगों ने कहा कि हमारा न तो परिवार है और न ही बच्चे। न परिवार की चिंता है और न ही बच्चों की। हमें मौका दीजिए- जान लड़ा देंगे समाज की सेवा में।

      - सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने पहली बार थर्ड जेंडर को पुलिस भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया है। राज्य में 363 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरु हो गई है।

      - जिलेवार फिजिकल एग्जाम हो रहे हैं। शनिवार को रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड और धमतरी पुलिस लाइन में फिजिकल एग्जाम लिए गए। धमतरी में दो थर्ड जेंडर और रायपुर में 9 थर्ड जेंडर ने हिस्सा लिया। - धमतरी में दोनों ने एग्जाम पास कर लिए और रायपुर में 8 लोगों को सफलता मिली। कुल 10 थर्ड जेंडर ने दौड़ पास किए। फिजिकल एग्जाम 27 मई तक चलेंगे। इसके बाद रिटन का डेट क्लियर होगा।

      - ध्यान देने वाली बात है कि फिजिकल एग्जाम में पूरे छत्तीसगढ़ में अलग-अलग जिलों से 45 थर्ड जेंडर समुदाय के लोग हिस्सा ले रहे हैं।

      महिलाओं की कटेगरी में किया गया शामिल

      - दौड़ में महिलाओं को 800 मीटर और पुरूषों को 1500 मीटर दौड़ना था। थर्ड जेंडर को महिलाओं की कटेगरी में 800 मीटर दौड़ में मौका दिया गया। थर्ड जेंडर के फिजिकल एग्जाम महिलाओं की कटेगरी में ही लिए जा रहे हैं।

      - रिटन के लिए थर्ड जेंडर समुदाय के लोग कई वर्कशॉप में हिस्सा ले चुके हैं। फिलहाल पुलिस मेस में सब इंस्पेक्टर पढ़ाई करा रहे हैं। समाज कल्याण विभाग और प्रशासन अकादमी के सहयोग से लिखित परीक्षा के लिए 15 मई से हर रोज क्लास लगाई जाएगी।

      कार्ड दिखाना है जरूरी

      - राज्य सरकार ने मेडिकल के बाद थर्ड जेंडर को एक कार्ड जारी किया है। भर्ती प्रक्रिया में उस कार्ड होना अनिवार्य है। प्रदेश भर में एक हजार से ज्यादा लोगों को ये कार्ड जारी किया जा चुका है।

      - थर्ड जेंडर समुदाय की मुखिया विद्या राजपूत ने बताया कि पहले इस समुदाय को लोग हेय दृष्टि से देखते थे। अब लोग इस समुदाय को मिलने वाले लाभ को लेने के लिए थर्ड जेंडर कहलाने को तैयार हैं।

      - ट्रेनों में अक्सर ऐसे फर्जी लोग पकड़े जाते हैं तो थर्ड जेंडर के नाम पर वसूली करते हैं। ऐसे में सरकार ने इस समस्या से बचने के लिए कार्ड जारी किया है।

      सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

      - सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2014 के एक जजमेंट के मुताबिक ट्रांसजेंडर को भी थर्ड जेंडर के तौर पर दूसरे जेंडर की भांति ट्रीट किया जाना चाहिए।
      - इसी जजमेंट को ध्यान में रखते हुए राज्य में होने वाली भर्तियों में ट्रांसजेंडर्स को भी मौका दिया जाएगा।

      इन राज्यों में भी थर्ड जेंडर पुलिस डिपार्टमेंट में

      - पहली बार तमिलनाडु में बतौर ट्रांसजेंडर पृथिका यशिनी को पुलिस विभाग का हिस्सा बनने का मौका मिला था।

      - राजस्थान के जालोर के रानीवाड़ा के जाखड़ी गांव की रहने वाली गंगा कुमारी बनी चुकी हैं पुलिस कांस्टेबल।

      फोटो/वीडियो : कौशल स्वर्णबेर

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      रायपुर में पुलिस लाइन में हुए फिजिकल एग्जाम में थर्ड जेंडर ने भी हिस्सा लिया।
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      फिजिकल एग्जाम के बाद थर्ड जेंडर पोज देते हुए।
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      पहली बार तमिलनाडु में बतौर ट्रांसजेंडर पृथिका यशिनी को पुलिस विभाग का हिस्सा बनने का मौका मिला था।
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      जालोर के रानीवाड़ा के जाखड़ी गांव की रहने वाली गंगा कुमारी बनीं थीं पुलिस कांस्टेबल।
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      सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद यूं खुश हुए थे थर्ड जेंडर समुदाय के लोग।
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