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ये हैं आम आदमी, एक बुजुर्ग तो दूसरा है युवा, दोनों का काम है- फर्जी खबरें और वीडियो का सच ढूंढकर लोगों तक पहुंचाना

अकाउंटेंट बालानी तथा NIT के असिस्टेंट प्रोफेसर अशुल की पोस्ट में हर फर्जी खबर और वीडियो का रियलिटी चेक।

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 06:22 PM IST
This man Reality check of news and video

रायपुर। रमेश बालानी, उम्र 59 साल। पेशे से अकाउंटेंट हैं लेकिन सोशल मीडिया पर एक्टिव बड़ा वर्ग उन्हें ऐसे व्यक्ति के बारे में जानता है जो हर वायरल खबर और वीडियो में सच और झूठ का खुलासा कर देते हैं। अकाउंटेंट बालानी पिछले 8 साल से फेक न्यूज़, पोस्ट और वीडियो का सच निकालकर उसे साथ में वायरल कर रहे हैं, ताकि लोगों को असलियत पता चले। ऐसा ही कुछ एनआईटी रायपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर अंशुल गुप्ता भी कर रहे हैं। वे फर्जी खबरें और वीडियो के साथ अलग वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड कर रहे हैं, ताकि लोग सच्चाई जान सके। यूट्यूब पर मोमो चैलेंज के खिलाफ अवेयर करके अंशुल राजधानी और प्रदेश में काफी सराहना हासिल कर चुके हैं।

सोशल मीडिया वर्कर बनकर इस डिजिटल वर्ल्ड में लोगों को अवेयर कर रहे हैं बालानी

राजेंद्रनगर निवासी अकाउंटेंट बालानी लंबे समय से फेसबुक पर एक्टिव हैं। उनका मानना है कि फर्जी होने के अंदेशे से लोगों की सोशल मीडिया में दिलचस्पी और भरोसा, दोनों कम हो रहा है। इसीलिए वे जब भी ऐसी पोस्ट देखते हैं तो सबसे पहले उसके बारे में गूगल पर सर्च करते हैं। फिर जब कन्फर्म हो जाता है कि ये फर्जी है, तो उसके साथ अपनी फाइंडिंग और कमेंट लिखकर फारवर्ड कर देते हैं। वे शहर के 4-5 बड़े वाट्सएप ग्रुप से जुड़े हैं। लोग जिस तरह सोशल वर्कर बनकर समाज में काम कर रहे हैं, बालानी सोशल मीडिया वर्कर बनकर इस डिजिटल वर्ल्ड में लोगों को अवेयर कर रहे हैं

मोमो चैलेंज गेम की हकीकत बताने वाला वीडियो अपलोड कर चौंकाया था अंंशुल ने

एनआईटी रायपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर अंशुल गुप्ता भी फेक न्यूज़ के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए वीडियो बनाते रहते हैं। इसके लिए उन्होंने सालभर पहले यूट्यूब पर एस्क्वायर टेक्निकल नाम का चैनल शुरू किया था, जिसके अब 1000 से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। जुलाई में उन्होंने एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें बताया गया था कि वाट्सएप पर फेक न्यूज को लेकर बनाए गए जिस फीचर में गलत खबर होने पर लाल टिक आ जाने की बातें फैल रही हैं, वह फर्जी है। उन्होंने बताया कि ऐसा कोई फीचर नहीं आया है। फेक न्यूज को लेकर बेहद गंभीर असिस्टेंट प्रोफेसर गुप्ता का मानना है कि लोगों को बिना सोचे-समझे किसी न्यूज को फारवर्ड नहीं करना चाहिए। खासकर हत्या, जाति-धर्म को लेकर, क्योंकि इस तरह की झूठी खबरों से किसी की जान भी जा सकती है। ब्लू व्हेल जैसे मोमो चैलेंज गेम पर उनके वीडियो को सैकड़ों लोगों ने सराहा है। अंशुल ने जनरल टिकट और प्लेटफार्म टिकट, एमएसटी टिकट बुक करने के तरीके का एक वीडियो भी हाल में अपलोड किया है।

यूथ के लिए दोनों का संदेश -

फर्जी खबरें, वीडियो समाज के लिए खतरा युवाओं से अकाउंटेंट बालानी की अपील है कि वाट्सएप से किसी की भी इमेज को बनाया या बिगाड़ा जा सकता है। यूथ बिना सोचे समझे फेक पोस्ट, वीडियो, न्यूज को फारवर्ड कर रहे हैं। इससे बुरा असर हो रहा है। अंशुल ने भी खासकर यूथ से आग्रह किया कि फर्जी खबरें और वीडियो फारवर्ड तथा वायरल करना युवाओं के लिए मजा हो सकता है, लेकिन यह कई लोगों के लिए सजा बन सकती है, इसलिए ऐसा बिलकुल नहीं करें।

रिसर्च : झूठी खबरें 6 गुना तेजी से वायरल

मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में हुई रिसर्च में कहा गया है कि सोशल मीडिया से झूठी खबरें 6 गुना अधिक तेजी से फैलती हैं। इस अध्ययन के लिए 2006 से 2016 के बीच माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर ट्वीट की गईं 1.26 लाख खबरों का आकलन किया गया। इस दौरान देखा गया कि झूठी खबर 70 फीसदी अधिक बार री-ट्वीट की गई।

इसलिए जरूरी क्योंकि...

- जांजगीर का एक्सीडेंट भिलाई रोड के नाम वायरल गोली चलने की वारदात भी रायपुर नहीं रांची की

- दो दिनों से एक्सीडेंट का वीडियो और फोटो वायरल हो रही है, जिसे रायपुर-कुम्हारी रोड की बताई जा रही है। वह घटना जांजगीर-चांपा की है।

- हाल ही में एक छात्रा की एक्सीडेंट की फोटो वायरल हुई थी। उसे संतोषी नगर चौक की बताई गई थी। जबकि वह राजस्थान की घटना थी।

- बच्चा चोरी की अफवाह में पिछले साल दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना उरला अछोली की बताई जा रही थी। वह जयपुर की थी।

- मुख्यमंत्री निवास के सामने गोली चलने का हल्ला मचा हुआ था। मृतक की फोटो भी आई थी, लेकिन घटना झारखंड की राजधानी रांची की थी।

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