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वास्तुशास्त्र का साइंटिफिक तरीके से रिसर्च कर बनाया महावास्तु, कई चीजों को बताया मिथक

शहर के एक होटल में शनिवार को वास्तुशास्त्र सेमिनार का आयोजन किया गया।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 05, 2018, 07:13 PM IST

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    मानषी छुआनी।

    रायपुर।सीढ़ी के नीचे टॉयलेट नहीं होना चाहिए, घर में एक लाइन में तीन दरवाजे नहीं होना चाहिए, वास्तुशास्त्र की ये सब बातें सिर्फ मिथक हैं। पहले समय में जमीन पर्याप्त मात्रा में मिल जाती थी। लोग अपने हिसाब से घर बना लेते थे। बदलते समय में हम लोगों ने वास्तुशास्त्र का साइंटिफिक तरीके से रिसर्च कर महावास्तु का विकल्प निकाला है। महावास्तु में बिना तोड़-फोड़ के घर का वास्तु ठीक किया जाता है। ये बातें वास्तुशास्त्र पर रिसर्च करने वाले आचार्य आशुतोष तिवारी ने शहर में आयोजित एक कार्यक्रम में कही।

    - शहर के एक होटल में शनिवार को वास्तुशास्त्र सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें मानसी छुआनी और आशुतोष तिवारी ने वास्तु जुड़े कई भ्रमों पर प्रकाश डाला और उसके पीछे की सच्चाई को बयां की।

    - आशुतोष ने कहा कि वास्तु में केवल 8 दिशाएं नहीं बल्कि 16 दिशाएं होती हैं। आज के वक्त जहां लोगों के जमीन कम है, ऐसे में हमें 16 दिशाओं वाले महावस्तु पर जाना सही रहेगा।

    - राजाओं के महल और मंदिरों में भी महावास्तु का ही यूज होता आ रहा है। जैसे कि आमतौर पर लोग गणेश जी को प्रथम पूज्य मानकर घर के मुख्य दरवाजे में उनकी मूर्ति लगा देते हैं।

    - हमने रिसर्च किया कि जिस घर में पिता-पुत्र की नहीं बनती, उसमें एक बड़ा कारण गणेश जी की मूर्ति का गेट पर लगाना है। पार्वती जी ने गणेश जी को एक बार द्वारपाल नियुक्त किया था, जिससे पिता-पुत्र के बीच संग्राम हुआ था।

    - जिसकी जहां जगह वहीं रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि महावास्तु में 16 तकनीकों द्वारा एनर्जी को बैलेंस किया जाता है। बच्चों का स्टडी रूम वेस्ट साउथ वेस्ट के कोने में बनाना चाहिए। ईशान कोण में मंदिर, ईस्ट में डायनिंग रूम, साउथ ईस्ट में किचन, दुकान या ऑफिस में नार्थ की तरफ बैठने से अपॉरच्युनिटी देता है।

    हर दिशाओं से एंट्री शुभदायक

    - आचार्य मानसी छुआनी ने बताया कि लोगों के अंदर एक मिथक होता है कि दक्षिण मुखी एंट्री अशुभ होती है, लेकिन यह केवल मिथक है। महानगरों में बड़े-बड़े फ्लैट बनाए जाते हैं, जिसमें चारो तरफ से एंट्री द्वार बनाए जाते हैं। महावास्तु मे फोर स्टेप मैथड से वास्तु दोष को दूर किया जाता है।


    वास्तु शास्त्र को लेकर प्रचलित मिथक


    1. टॉयलेट से लगा पूजा रूम या किचन नहीं होना चाहिए।
    2. क्लॉक वाइज सीढ़ी अच्छी मानी जाती है, लेकिन सीढ़ी ऊर्जा के बढ़ाने-घटाने के हिसाब बनाई जाती है।
    3. नार्थ ईस्ट की एंट्री शुभ मानी जाती है, लेकिन एेसा नहीं है।
    4. कांच में बिस्तर की छाया नहीं आनी चाहिए, ये मिथक है।
    5. नार्थ-वेस्ट में अनमैरिड गर्ल्स का बेडरूम होना चाहिए, ये मिथक है।
    6. सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट नहीं होना चाहिए।
    7. घर के तीन दरवाजे एक लाइन में नहीं होना चाहिए।

    कंटेंट/फोटो : मनीष मिश्रा

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    आशुतोष तिवारी।
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Web Title: Vastu Shastra Seminar Organised In Raipur
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