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10 साल पहले लकड़ी से लगी चोट, एक आंख से देखकर सातवीं तक की पढ़ाई / 10 साल पहले लकड़ी से लगी चोट, एक आंख से देखकर सातवीं तक की पढ़ाई

Bhaskar News Network

Dec 08, 2018, 03:06 AM IST

Rajnandgaon News - मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मानपुर और छुरिया इलाके के पांच बच्चों का नेत्र ऑपरेशन किया गया है। ऑपरेशन के बाद बच्चों...

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मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मानपुर और छुरिया इलाके के पांच बच्चों का नेत्र ऑपरेशन किया गया है। ऑपरेशन के बाद बच्चों को देखने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र मानपुर के ग्राम मरापीटोला के रहने वाले सतीष कुमार धुर्वे (10) की एक आंख में चोट लगी थी, जिससे उसे दिखना बंद हो गया। एक आंख के देखकर उसने सातवीं तक पढ़ाई पूरी की। अब जाकर अस्पताल में उसका ऑपरेशन हुआ है।

इनमें ऐसे बच्चे भी शामिल हैं जो बचपन से ही नहीं देख पाते हैं, फिर भी किसी तरह सुनकर पढ़ाई करते रहे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूलवार निरीक्षण किया, जिसमें ऐसे बच्चों का चिन्हाकंन किया गया, जिन्हें दृष्टिदोष हैं। चिन्हित करने के बाद बच्चों को ऑपरेशन के लिए अस्पताल लाया गया। बच्चों के ऑपरेशन के लिए खासतौर पर फोलडेबल लैंस मंगाए गए। क्योंकि विभाग की ओर से मिलने वाले लैंस उम्रदराज मरीजों के लिए काम आते हैं। निजी संस्थानों में इस तरह के ऑपरेशन पर 45 से 50 हजार रुपए तक खर्च आता है, लेकिन अस्पताल में सभी बच्चों का नि:शुल्क ऑपरेशन किया गया। सफल ऑपरेशन में नेत्र विभाग की एचओडी डॉ. सौम्या डुलानी, वरिष्ठ नेत्र चिकित्सा सहायक अधिकारी िवजय शर्मा, सहायक नेत्र अधिकारी सुदेश रामटेके और टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

शिविर में सभी बच्चों का सफल ऑपरेशन हुआ

नेत्र विभाग की एचओडी डॉ. सौम्या डुलानी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूलों में जांच शिविर लगाया जाता है, वहीं से बच्चों का चिन्हांकन किया जिनमें नेत्र दोष है, या पैदायशी देखने में दिक्कत है। सभी बच्चों का ऑपरेशन किया गया है, अब उन्हें देखने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही है।

राजनांदगांव. ऑपरेशन के बाद बच्चों को पढ़ने लिखने में कोई दिक्कत नहीं आ रही है।

इनसे लें प्रेरणा, देख नहीं पाते थे फिर भी सामान्य ढंग से स्कूल में पढ़ाई की

1. ग्राम बोरिया ठेकेदारी (मानपुर) निवासी चुम्मन सिंह मेरावी (15) साल 9वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। चुम्मन दोनों आंखों से देख नहीं सकता था, यह समस्या पैदायशी थी। फिर भी उसने गांव के सामान्य स्कूल में रहकर पढ़ाई की। वो भी सिर्फ सुनकर। ऑपरेशन के बाद उसे देखने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही है।

2. योगेंद्र कुमेटी उम्र 11 साल। निवासी पानाबरस (मानपुर) बचपन से ही देख नहीं पाता था। वर्तमान में योगेश कक्षा पांचवी में पढ़ रहा है। परिजनों ने पहले रायपुर में एक आंख का ऑपरेशन कराया था, जिसमें काफी खर्च हुए। इस बार अस्पताल में नि:शुल्क ऑपरेशन की सुविधा मिली।

3. ग्राम भोलापुर (छुरिया) निवासी लिखन रात्रे (12) साल को जन्मजात एक आंख से देखने में तकलीफ थी, लेकिन परिजन को इसके बारे में पता नहीं था, एक आंख से देखकर लिखन ने कक्षा पांचवी तक पढ़ाई की, अब कक्षा छठवीं में है।

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