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राजनांदगांव देश में छठें स्थान पर

Rajnandgaon News - पीएम आवास योजना के क्रियान्वयन करने वाले जिलों की रैंकिंग केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने तैयार की है। इस...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:50 AM IST
राजनांदगांव देश में छठें स्थान पर
पीएम आवास योजना के क्रियान्वयन करने वाले जिलों की रैंकिंग केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने तैयार की है। इस रैंकिंग में राजनांदगांव जिला छठवें स्थान पर है।

सर्वोच्च स्थान पर धमतरी जिला है और इस रैंकिंग में प्रथम 10 जिलों में 5 जिले छत्तीसगढ़ के हैं। 8 मानकों के आधार पर जिलों का परफार्मेंस देखा गया था जिसमें राजनांदगांव जिले को 95.02 प्रतिशत अंक मिले हैं। धमतरी जिले को 97.02 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। उल्लेखनीय है कि राजनांदगांव जिले को वर्ष 2016-17 एवं वर्ष 2017-18 में 20714 आवासों का लक्ष्य दिया गया था। इसमें 18004 आवास पूरे हो चुके हैं। इस तरह राजनांदगांव जिले में 86.92 प्रतिशत आवास पूरे हो चुके हैं। राजनांदगांव जिले में 17196 आवासों के लिए तीनों इंस्टालमेंट दिए जा चुके हैं।

राजनांदगांव में पीएम आवास कॉलोनी भी बनाई गई है। यह ऐसे हितग्राहियों के लिए है जिनके पास भूमि नहीं थी, ऐसे लोगों को चिह्नांकित कर कॉलोनी बनाई गई और इन्हें पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं दी गई, साथ ही स्ट्रीट लाइट एवं गार्डन सौंदर्यीकरण के कार्य किए जा सकते हैं। छुरिया के लालूटोला और मोहला के तेलीटोला में ऐसी कॉलोनियों की प्रशंसा मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने भी प्रेजेंटेशन के दौरान की। इसके साथ ही जिले में सभी प्रधानमंत्री आवासों में सौभाग्य योजना के अंतर्गत निशुल्क बिजली का कनेक्शन भी दिया जा रहा है।

धमतरी जिला शीर्ष पर, राजनांदगांव जिले को 95.02 प्रतिशत अंक मिले

सबसे अच्छा प्रदर्शन चौकी ब्लॉक का

चौकी ब्लॉक में 1555 प्रधानमंत्री आवासों का लक्ष्य था, इसमें 1461 आवास पूरे हो चुके हैं। कुछ जगहों पर कठिन भौगोलिक परिस्थितियां होने की वजह से छुईखदान में पीएम आवासों के लिए मटेरियल सप्लाई में दिक्कत आई जिसकी वजह से छुईखदान में 5103 लक्ष्य के विरुद्ध 3741 मकानों का काम पूरा हो पाया। फिलहाल शेष मकानों को पूरा करने काम जारी है।

विशेष प्रयास जारी हैं

कलेक्टर भीम सिंह ने बताया कि बैगा जैसे पीवीटीजी समूहों को पीएम आवास का लाभ दिलाने विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। ढोलपिट्टा जैसी बस्तियां जहां पहले केवल घास-फूस के घर थे, वहां अब सबके पास प्रधानमंत्री आवास बन गया है। इसके साथ ही इन बस्तियों के लिए स्ट्रीट लाइट, सीसी रोड, सौंदर्यीकरण आदि सुविधाएं की जा रही हैं। घर के साथ ही वे पशुपालन जैसी गतिविधियों को भी अपना सकें, इसके लिए मुर्गी शेड आदि भी दिये जा रहे हैं। इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ चंदन कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास के लिए वर्ष 2011 की सामाजिक आर्थिक गणना को आधार बनाया गया था।

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