Hindi News »Chhatisgarh »Rajnandgaon» मरीजों का हालचाल पूछने के बजाय पहले बंद कमरे में की गुप्त बैठक, जिनकी अांखें अच्छी उन्हें संक्रमितों के साथ रखा

मरीजों का हालचाल पूछने के बजाय पहले बंद कमरे में की गुप्त बैठक, जिनकी अांखें अच्छी उन्हें संक्रमितों के साथ रखा

सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी की अगुवाई में गुरुवार प्रात: 10 क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में जांच के लिए विभागीय टीम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 03:20 AM IST

मरीजों का हालचाल पूछने के बजाय पहले बंद कमरे में की गुप्त बैठक, जिनकी अांखें अच्छी उन्हें संक्रमितों के साथ रखा
सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी की अगुवाई में गुरुवार प्रात: 10 क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में जांच के लिए विभागीय टीम पहुंची। दैनिक भास्कर की खबर के बाद यहां हड़कंप मच गया और टीम ने सबसे पहले ऑफिस में बैठकर अस्पताल के डॉक्टरों से चर्चा की। पौन घंटे बाद वे अस्पताल के अंदर दाखिल हुए। यहां मोतियाबिंद पीड़ित रहे एक-एक मरीजों से ऑपरेशन के बाद दिख पाने या फिर नहीं दिख पाने के संबंध में पूछताछ की। उनके नाम नोट किए गए। मामले में बड़ी गड़बड़ी यह सामने आई कि स्वस्थ नेत्र वालों को भी संक्रमित आंखों वालों के साथ वार्ड में रखा गया था। इस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम नाराज भी हुई।

प्रारंभिक लिस्टिंग में पता चला कि 23 फरवरी को 45 लोगों के नेत्र ऑपरेशन किए गए थे, जिसमें से 31 लोगों की आंखों में संक्रमण के वजह से देखने में परेशानी आ रही थी। मेडिकल कॉलेज अस्पताल से नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या डुलानी और डॉ. यामिनी रावटे भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने क्रमवार मरीजों से फीडबैक लिया व लिस्टिंग की। फिर एक के बाद एक मरीजों को बुलाकर स्लिट लैम्प व अन्य मेडिकल उपकरणों से मरीजों के आंखों की जांच की। कलेक्टर भीम सिंह रात 8 बजे क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल पहुंचे व मामले में जानकारी ली।

क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में पहुंची टीम ने की मरीजों से पूछताछ

भिलाई, कवर्धा के डॉक्टरों ने की सर्जरी

अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद पता चला कि बीते 23 फरवरी को भिलाई और कवर्धा के दो डॉक्टरों ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए थे। जिनमें डॉ शंशाक सेन (भिलाई) और डॉ. दिलीप सिंह (कवर्धा) के नाम सामने आए हैं। बताया गया कि डॉ. िदलीप पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल राजनांदगांव में सेवारत थे बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर कवर्धा में खुद की डिस्पेंसरी खोल ली। इसके बाद सर्जरी भी करने लगे।

अस्पताल के जिम्मेदारों ने कहा...

अफसरों ने पूछताछ की तो मरीजों ने कहा तीसरे ऑपरेशन के बाद हुआ दिखना बंद

अफसरों की पूछताछ में कुछ मरीजों ने बताया कि पहले ऑपरेशन के बाद उन्हें जरा दिखाई दे रहा है। फिर दूसरी बार ऑपरेशन किया गया व इसके बाद तीसरी बार ऐसे में उन्हें दिखना ही बंद हो गया। जबकि कुछ मरीजों ने बताया पहले ऑपरेशन के बाद से ही उन्हें देखने में परेशानी आ रही थी। मरीजों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद दिए गए आईड्राप को डालने से देखने में परेशानी हुई।

मरीजों को दूसरे वार्डों में शिफ्ट करने निर्देश

मेडिकल कॉलेज अस्पताल की टीम ने जब वार्डों का निरीक्षण किया तो पता चला कि ऑपरेशन के बाद जिन मरीजों की आंखें ठीक थी, उन्हें भी संक्रमित आंखों वाले मरीजों के साथ एक ही वार्ड में रखा गया था। ऐसे में टीम ने नाराजगी जाहिर की और स्वस्थ आंखों वाले मरीजों को तत्काल दूसरे वार्डों में शिफ्ट करने का निर्देश दिया। ताकि संक्रमण दूसरे मरीजों के आंखों में न फैल सके।

ऑपरेशन के दिन मौजूद नहीं थे हम: अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान बरती गई लापरवाही उजागर होने के बाद शासन-प्रशासन में हड़कंप मच चुका है। दैनिक भास्कर में खबर छपने के बाद जिला व प्रदेश स्तरीय अधिकारियों की टीम गुरुवार को अस्पताल पहुंची। अफसरों ने प्रबंधन के साथ बंद कमरे में चर्चा की। अस्पताल के जिम्मेदार अफसरों ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान वे मौजूद नहीं थे।

कुल 45 मरीजों के हुए थे मोतियाबिंद ऑपरेशन, 31 लोगों की आंखों में संक्रमण

परेशान मरीजों ने अपनी आपबीती में बताया- सूजन व दर्द के कारण उड़ी नींद

अस्पताल में भर्ती कचरी बाई, भानवति, रूपाबाई, लक्षनी बाई, देवतीन बाई आदि मरीजों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद से ही उनके आंखों में सूजन बढ़ गया है। दिखने में परेशानी तो हो ही रही है। दर्द ने उनकी नींद हराम कर दी है। दवा भी कुछ असर नहीं कर रही है। वे अकेले ही अस्पताल में है। परिजन एक या दो बार उन्हें देखने आ जाते है। त्योहार के समय वे अपनी ऐसी हालत से काफी दुखी हैं।

ओटी में तीन बेड और लगातार ऑपरेशन

अस्पताल की ओटी में तीन बेड लगे हुए हैं। यहां लगातार ऑपरेशन किए जाते हैं। बीते शुक्रवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। मरीज जीत कुंवर ने बताया कि सुबह 11 से दोपहर तीन और शाम 6 से 7 बजे तक ऑपरेशन किए गए। तीन बेड में एक ऑपरेशन करने के बाद फिर आगे मरीजों को लाया गया। प्रिकॉशन के तौर पर एक के बाद एक ऑपरेशन नहीं किए जाते। इससे भी इंफैक्शन फैलने की आशंका जताई है।

घर वालों को सूचना तक नहीं दी है: खोभा निवासी राजाराम की बाईं आंख का ऑपरेशन हुआ है। उनका कहना है कि अभी उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। आंख की रोशनी शून्य हो गई है। शनिवार की रात से यह सब हुआ। सोमवार को यहां लाए लेकिन घर वालों को किसी ने सूचना तक नहीं दी। अब मैं यहां परेशान हो रहा हूं। जबकि घर से यहां कोई आया भी नहीं।

लापरवाही किसी की हो भुगत तो हम रहे: बांयी आंख के ऑपरेशन के लिए धनगांव से यहां आई जीत कुंवर का कहना है कि लापरवाही किसी की भी हो यहां भुगतना तो हमें पड़ रहा है। अब क्या करें आप लोग ही बताएं। यहां तो रहने की भी इच्छा नहीं है। परेशान हो गए हैं। लगातार पूछने के बाद भी अधिकारी व डॉक्टर कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। परिजन भी परेशान हैं।

1. मरीजों में यह इन्फेक्शन कैसे फैला।

2. जो आई ड्रॉप दिए गए थे यदि उनके डालने से आंखों में इंफेक्शन आया तो क्या वे ड्रॉप खराब थे।

3. अस्पताल प्रबंधन एक साथ लगातार इतना ज्यादा ऑपरेशन क्यों कर रहा है।

4. जांच टीम आने से पहले आधा दर्जन मरीजों को चैनल गेट बंद कर क्यों रखा गया।

5. इन मरीजों में कुछ ऐसे भी थे जिन्हें पेइंग वार्ड में क्यों रखा गया।

6. सीएमएचओ की बगैर अनुमति इतने ज्यादा ऑपरेशन नहीं होते, प्रशासन की ओर से भी फर्स्ट क्लास अफसर यहां नहीं बैठते। तो इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन।

जोगी कांग्रेसियों ने कहा- पीड़ितों को 30 लाख रुपए मुआवजा दें

बुधवार को जोगी कांग्रेसियों ने अस्पताल जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। जिलाध्यक्ष मेहूल मारु ने कहा कि मुख्यमंत्री रमन सिंह के विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते ऑपरेशन में गड़बड़ी हुई। मरीजों की आखों की रोशनी छिन गई। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ अपर कलेक्टर से मुलाकात की। सीएमएचओ के पद पर प्रथम श्रेणी के अधिकारी को नयुक्त करने मांग की। साथ ही पीड़ितों को 30 लाख मुआवजा और दोषियों को जेल भेजने की मांग की है।

एफआईआर व गिरफ्तारी की मांग

इधर मामले को लेकर कांग्रेसियों ने एडीएम जेके ध्रुव को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग रखी। कांग्रेसियों ने इसे आंखफोड़वा कांड कहा है। मुख्यमंत्री के क्षेत्र में यह हाल है तो प्रदेश का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसमें मरीजों के लिए उच्च स्तरीय सुविधा दिलाने, अस्पताल को सील करने, डॉक्टरों व नर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी करने और तत्काल मुआवजा राशि की मांग की है। ज्ञापन देने के लिए जिला पंचायत सदस्य क्रांति बंजारे, रामछत्री चंद्रवंशी, छन्नी साहू, रेणुका हिरवानी, महेंद्र यादव आद् पहुंचे थे।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Rajnandgaon News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: मरीजों का हालचाल पूछने के बजाय पहले बंद कमरे में की गुप्त बैठक, जिनकी अांखें अच्छी उन्हें संक्रमितों के साथ रखा
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Rajnandgaon

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×