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दवा और पोषण आहार का 59 लाख बकाया, 46 झूलाघर बंद

Rajnandgaon News - फंड नहीं मिलने के कारण झूलाघरों में ताला लग गया हैं। जिले भर में करीब 46 झूलाघरों का संचालित हो रहा था। पोषण आहार,...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:40 AM IST
दवा और पोषण आहार का 59 लाख बकाया, 46 झूलाघर बंद
फंड नहीं मिलने के कारण झूलाघरों में ताला लग गया हैं। जिले भर में करीब 46 झूलाघरों का संचालित हो रहा था। पोषण आहार, मेडिसिन व प्री स्कूल कीट का साल भर से भुगतान नहीं हुआ है। जिले में झूलाघरों का करीब 59 लाख रुपए बकाया है। इसमें कार्यकर्ता और सहायिकाओं का मानदेय भी शामिल हैं। समय पर फंड नहीं मिलने के कारण झूलाघर बंद हो गए।

मजदूर और गरीब के बच्चों की देखभाल और पोषण आहार देने के लिए झूलाघर संचालित किया जा रहा था। जिले भर के झूलाघर में करीब 2 से 3 सौ बच्चे पंजीकृत हैं। झूलाघर बंद होने के कारण इन बच्चों को काफी समस्या हो रही है। अप्रैल से दिसंबर तक पोषण आहार के लिए फंड मिला और न ही कार्यकर्ता और सहायिकाओं को मानदेय मिला हैं। जिले में करीब 46 झूलाघर का संचालित थे। एक झूलाघर का करीब 1 लाख 30 हजार रुपए बकाया है। ऐसे में 46 झूलाघरों का 1,30,000 रुपए के हिसाब से गुणा करें तो 59, 80,000 रुपए बकाया है। अब विभाग झूलाघरों को फिर से शुरू करने के लिए सर्वे कर रहे है। साथ ही बकाया राशि के भुगतान के लिए प्रपोजल तैयार किया जा रहा हैं।

कार्यकर्ता और सहायिकाओं को हो रही परेशानी

झूलाघर में एक से तीन साल तक बच्चों को रखा जाता हैं। सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक बच्चों को यहां पर रखते हैं। इस दौरान सुबह नाश्ता, खाना और रेडी टू ईट फूड दिया जाता है। पोषण आहार के अलावा कमजोर व बीमार बच्चों को मेडिसिन भी दिया जाता है। साथ ही यहां पर बच्चों को प्री-स्कूल किट के माध्यम से पढ़ाया भी जाता है। फंड का भुगतान नहीं होने के कारण कार्यकर्ता और सहायिकाओं को काफी परेशानी हो रही हैं।

बढ़ रही कुपोषित बच्चों की संख्या

झूलाघर बंद होने के कारण जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या भी बढ़ने लगी हैं। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 1 लाख 30 हजार बच्चें पंजीकृत हैं। इसमें करीब 35 हजार बच्चे कुपोषित हैं। झुला घर बंद होने से बच्चों के पोषण आहार नहीं मिल रहा हैं।

महीने भर में सभी का होगा भुगतान

आंगनबाड़ी केंद्रों में दूध बंटना भी बंद

बच्चों के बेहतर स्वास्थ और पोषण के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में रोजाना दूध वितरण की भी प्लानिंग की गई थी। इसके लिए पंचायत स्तर पर खर्च वहन के लिए भी निर्देशित किया गया था। लेकिन दो से तीन माह दूध बंटने के बाद अब यह सुविधा भी बंद हो गई है।


आंगनबाड़ी केंद्रों को किया जाएगा मर्ज

झूलाघर के बाद अब आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी बदतर हो गई हैं। अब विभाग ऐसे केंद्रों को मर्ज करने की तैयारी कर रहा है, जो किराए के कमरे में संचालित हो रहा। शहर में कई आंगनबाड़ी केंद्र किराए के छोटे से कमरे में संचालित हो रहा हैं।

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