सात साल में 1875 बच्चों ने छोड़ा स्कूल, वापस लाने का प्रयास नहीं

Rajnandgaon News - गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों की आरक्षित सीटों पर एडमिशन देने के नाम पर...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:35 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news 1875 children left school in seven years not attempt to bring back
गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों की आरक्षित सीटों पर एडमिशन देने के नाम पर शिक्षा विभाग के अफसर सिर्फ आंकड़ों का खेल खेल रहे हैं। हर साल एडमिशन का आंकड़ा तो बढ़कर बताया जा रहा है पर उन बच्चों की सुध नहीं ली जा रही है जो स्कूल छोड़ रहे हैं। 7 वर्षों के भीतर आरटीई के तहत एडमिट हुए 1875 बच्चों ने निजी स्कूलों में पढ़ाई छोड़ दी। ये बच्चे स्कूल छोड़ने के बाद कहां गए? दूसरे स्कूलों में एडमिशन लिया या नहीं? विभाग के अफसरों को कुछ पता नहीं है।

भास्कर ने पड़ताल की तो यह बात खुलकर सामने आई कि निजी स्कूल वाले बच्चों को निशुल्क में कॉपी, किताब व यूनिफार्म नहीं देते। खर्च पालकों को उठाना पड़ता है जो कि भारी पड़ता है। शिक्षा विभाग के अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि आरटीई के तहत स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को मुख्य धारा में लाने के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

बता दें कि शाला त्यागी बच्चों को पढ़ाई जारी करने के लिए प्रेरित करने सर्व शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है पर इस शाखा से जुड़े अफसर यह कहकर जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं कि आरटीई के बच्चों का रिकॉर्ड इस विभाग में नहीं रखा जाता।

पड़ताल का सच : फ्री यूनिफाॅर्म व कॉपी-किताब भी नहीं दी

राजनांदगांव. बच्चों को आरटीई में नि:शुल्क सुविधा नहीं मिल रही।

हर माह का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं

आरटीई में प्रावधान है कि आरक्षित सीट पर एडमिशन लेने वाले विद्यार्थी की शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में नोडल अफसर को हर माह रिपोर्ट लेनी है। पता करना है कि निजी स्कूल में अच्छा व्यवहार हो रहा है या नहीं? बच्चे ठीक से पढ़ाई कर पा रहे हैं या नहीं?पालकों से संपर्क करना है पर शिक्षा विभाग में बीते सात सालों का एेसा कोई रिकॉर्ड ही नहीं हैं।

पालक इसलिए मजबूर हो रहे, अधिकार नहीं मिल रहा



बाल अधिकार आयोग ने इसे घोर लापरवाही माना है, ले गए रिपोर्ट

बड़ी संख्या में आरटीई के विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की शिकायत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास हुई है। आयोग ने इसकी रिपोर्ट मांगी तो अफसरों के हाथ-पांव फुल गए। आयोग के पहुंचने के पहले ही विभाग की ओर से रिपोर्ट बना ली गई थी पर स्कूल छोड़ने का कारण नहीं बता पाए हैं।

जाने कितने बच्चों ने शाला त्याग दिया

वर्ष संख्या

2012-13 31

2013-14 63

2014-15 137

2015-16 256

2016-17 337

2017-18 492

2018-19 559


12 करोड़ रुपए पेंडिंग: आरटीई में पढ़ने वाले बच्चों का खर्च शासन वहन करती है। खर्च राशि निर्धारित है पर हर साल भुगतान नहीं हो रहा है। तीन से चार सालों का लगभग 12 करोड़ रुपए का भुगतान पेंडिंग है। हाल ही में डेढ़ करोड़ रुपए जारी किए थे पर पेंडिंग राशि का भुगतान कर दिया गया।

  जीके मरकाम, डीईओ









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