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भागवत गीता की सर्वश्रेष्ठ टीका श्रीराम चरित मानस

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 03:30 AM IST

Rajnandgaon News - उदयाचल में आयोजित तीन दिवसीय श्री राम कथा अनुष्ठान के अंतिम दिन युग तुलसी महाराज रामकिंकर की उत्तराधिकारी दीदी...

Rajnandgaon News - chhattisgarh news best critic of bhagwat geeta shriram charit manas
उदयाचल में आयोजित तीन दिवसीय श्री राम कथा अनुष्ठान के अंतिम दिन युग तुलसी महाराज रामकिंकर की उत्तराधिकारी दीदी मां मंदाकिनी ने कहा कि मानस के हर अध्याय में जो बातें लिखी गई हैं वह तब की ही नहीं आज के लिए भी मानव जीवन के संदर्भ में सांकेतिक रूप से कही गई थी। तभी तो उन सभी के नफा नुकसान हम आज आकलित कर रहे हैं।

जब क्रोध में आवेश आएं तो तत्काल प्रतिक्रिया के स्थान पर उसे कल के लिए टाल देना चाहिए इससे अनर्थ टल जाएगा। दीदी मां ने कहा कि श्रीरामकथा मनोरंजन की आशा से सुनने नहीं आना चाहिए। जहां भी संतों का आगमन हो वहां बच्चों को जरूर ले जाना चाहिए। रामचरित मानस विश्व साहित्य का सर्वश्रेष्ठ साहित्य है। सारे ग्रंथों का निचोड़ मानस में है। मानस की कथा त्रेता युग की राम कथा न होकर हम सबकी कथा है। सत्संग और कुसंग दोनों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर कैसे प्रभाव करता है। रामायण में वर्णित है। सत्संग का प्रभाव मति पर पड़ता है इससे कुसंग करीब नहीं आता है। और यदि कुसंग का प्रभाव देखना हो तो अयोध्या की पावन भूमि देखिए जहां स्वयं श्रीराम निवास करते हैं वहां सब संत थे केवल एक असन्त थी एक कुसंग के प्रभाव से राजा बनने वाले राम वनवासी हो गये इसलिए जीवन मंे एक भी कुसंग व्यक्ति नहीं होना चाहिए।

जनजागरूकता ही सबसे बड़ी पहल: जिस प्रकृति को बचाने की हम आज चिंता कर रहे हैं उसी का दर्शन मानस में भी है जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को जोड़कर वनवास के दौरान कई जगहों पर वृक्षों की महिमा सामने आई है। यहां तक कि मूर्छित लक्ष्मण की जान भी जड़ी बूटियों से बचाई जा सकी।

राजनांदगांव.उदयाचल में आयोजित तीन दिवसीय श्री राम कथा अनुष्ठान।

प्रकृति का रिश्ता मानस से है और साथ ही मनुष्य से भी

एक बार गुरु जी से किसी ने पूछा कि भागवत गीता की सर्वश्रेष्ठ टीका कौन सी है तब गुरुजी ने कहा कि भागवत गीता की सर्वश्रेष्ठ टीका श्रीराम चरित मानस है। द्वापर में गीता में उपदेश देने से पूर्व त्रेता में भगवान ने उसे अपने जीवन मे चरितार्थ किया। कोई मानस मर्मज्ञ यदि प्रकृति को बचाने के लिए कथा प्रवचन करे तो कथा सुधिजनों का चौंकना स्वाभाविक है, लेकिन यह भली भांति जान लें कि प्रकृति का रिश्ता मानस से है और मनुष्य से भी। इसके अलावा उन्होंने इससे जुड़ी बातें भी बताई।

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