कॉलेज में छात्र नेता से नक्सली बने, बोले निर्दोष रिश्तेदार की हत्या देख बदला मन

Rajnandgaon News - नक्सलियों के शहरी नेटवर्क की जिम्मेदारी संभालने वाले दंपति ने बुधवार को आईजी रतनलाला डांगी के समक्ष सरेंडर कर...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 03:25 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news naxalite was a student leader in college speaks of killing murderer
नक्सलियों के शहरी नेटवर्क की जिम्मेदारी संभालने वाले दंपति ने बुधवार को आईजी रतनलाला डांगी के समक्ष सरेंडर कर दिया। दोनाें पर सरकार ने कुल 13 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। सरेंडर नक्सली दंपति नक्सलियों के बड़े कैडरों के गार्ड के रूप में भी काम कर चुके हैं। दंपति नौ नक्सल घटनाओं में भी शामिल रहे हैं।

सरेंडर करने वाले नन्दू उर्फ विवेक और उसकी प|ी सती उर्फ कमला उर्फ कोमल कुमेंटी है। नन्दू 2004 में नागपुर में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान नक्सल संगठन से जुड़ा था, जबकि उसकी प|ी सती ने 2009 में नक्सल संगठन की सदस्यता ली थी। उन्हाेंने संगठन के शीर्ष नेताओं की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहित नक्सल संगठन के भटक चुके विचारधारा से परेशान होकर सरेंडर करने की बात कही है। नक्सल दंपति नागपुर में रहकर नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को सम्हाल रहे थे, इसके अलावा बड़े नक्सल नेताओं के शहर में होने वाली बैठकों का पूरा इंतजाम किया करते थे। नक्सल दंपति को जंगल वार का भी प्रशिक्षण दिया गया था, इसके बाद से वे नक्सल संगठन के बड़े कैडरों के गार्ड की भी जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। दंपती ने बताया कि कुछ सालों से वे नागपुर में रहकर गढ़चिरौली, दर्रेकसा, बालाघाट सहित छग के बार्डर इलाके में नक्सलियों के लिए शहर से सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराते रहे हैं।

13 लाख के इनामी: नागपुर में नक्सलियों का शहरी नेटवर्क संभाल रहे थे दंपती

राजनांदगांव. आईजी डांगी पुनर्वास नीति की राशि नक्सली दंपती को देते।

2004 में नक्सलियों से जुड़ा था: मैं नन्दू उर्फ विवेक उर्फ बंटी मांगपुरा नागपुर का हूं, 2004 में नक्सल संगठन से जुड़ा था। तब मैं क्रांतिकारी भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महापुरुषों को आदर्श मानकर छात्र राजनीति में सक्रिय था, इसी दौरान मेरी मुलाकात भाकपा माओवादी नेताओं से हुई और मैं नक्सल संगठन का हिस्सा बन गया। नक्सल संगठन के बड़े कैडर एमएमसी जोन इंचार्ज दीपक उर्फ मिलिंद का करीबी रहा और गार्ड के रूप में भी काम किया। मैंने संगठन से 2009 में जुड़ी सती उर्फ कमला उर्फ कोमल से शादी की। दोनों नागपुर में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, बड़ी -बड़ी बैठकें अरेंज करने का काम हमें दिया जाता। कुछ समय में देखा कि संगठन में विचारधारा नाम की चीज नहीं है, जिन गरीब, आदिवासी व कमजोर वर्ग के लिए हमने लड़ाई शुरू की, आंध्र के बड़े नक्सली नेता उन्हीं का शोषण कर रहे हैं। इससे मन बदलने लगा।

हमारी अपील लौट आएं सभी: सति उर्फ कमला ने बताया कि संगठन में स्थानीय आदिवासियों का सिर्फ शोषण हो रहा है। आंध्र प्रदेश के बड़े नक्सली नेता मौज कर रहे हैं। हम अपील करते हैं कि हमारी तरह दूसरे साथी भी आकर सरेंडर कर दें। स्थानीय नक्सलियों के हिस्से में नुकसान ही है, संगठन किसी विचारधारा नहीं बल्कि नक्सल नेताओं की मर्जी से चल रहा है।

मारे गए 8 में एक मेरे भाभी का भाई: नक्सल दंपति ने बताया कि गढ़चिरौली इलाके में नक्सल निर्दाेष ग्रामीणों को शिकार बना रहे हैं। हाल ही में गढ़चिरौली में 8 ग्रामीणों की हत्या कर दी गई। इनमें एक हमारी भाभी का भाई है। जिसे न पुलिस से कोई लेना -देना था और न ही नक्सलियों से। फिर भी नक्सलियों ने उसकी हत्या कर दहशत फैलाने का काम किया।

9 वारदातों में शामिल थे, बड़े कैडर के गार्ड भी रहे

सरेंडर नक्सल दंपति नन्दू व सती छग और महाराष्ट्र सहित एमपी के जंगलों में 9 वारदातों में भी शामिल रहे हैं। इनमें मलाजखंड, दर्रेकसा, मलैदा, घोड़ापाठ, गढ़चिरौली के बेजुरी जंगल, कांदुरी जंगल बस्तर के भैरमगढ़ में हुए मुठभेड़ शामिल हैं। इस दौरान उनके दल में सरेंडर नक्सली पहाड़ सिंह सहित कई बड़े कैडर भी मौजूद रहे। नन्दू इंसास रायफल के साथ कुछ समय तक महाराष्ट्र के एमएमसी जोन इंचार्ज दीपक का गार्ड रहा, वहीं सती को एसजेडसीएम नर्मदा की गार्ड रही है। इसके बाद उन्हें फिर नागपुर में शहरी नेटवर्क की जिम्मेदारी दी।

समझिए नक्सलियों का नुकसान व पुलिस का फायदा

नुकसान: दंपति नागपुर में हरकर नक्सलियों के शहरी व्यवस्था, सुविधाओं, जरूरतों को पूरा करने का काम करते थे। जंगल में रहने वाले गुरिल्ला पार्टी के लिए कुरियर का काम करते थे। नए सदस्यों को संगठन से जोड़ने प्रभावित करते थे। सुरक्षित स्थानों में बैठकें रखते थे। सरेंडर के बाद नक्सलियों को इन सुविधाओं के लिए जूझना पड़ेगा।

10-10 हजार की प्रोत्साहन राशि भी दी

नक्सलियों के पुनर्वास नीति के तहत आईजी डांगी ने मौके पर ही नक्सल दंपति को 10-10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी। इसके अलावा आगे नियम के मुताबिक पुनर्वास की कार्रवाई का आश्वासन दिया। सरकार ने नन्दू उर्फ बंटी पर 8 लाख रुपए और सित उर्फ कमला पर 5 लाख रुपए का इनाम भी रखा था।


फायदा: सरेंडर दंपति महाराष्ट्र में नक्सलियों के सबसे बड़े लीडर एमएमसी जोन इंचार्ज दीपक उर्फ मिलिंद तेलतुम्बडे के विश्वासपात्र थे। इन्हें नक्सलियों की हर प्लानिंग, बड़े कैडर, रुपयों की वसूली व मूवमेंट की जानकारी है। आगे इनके खुलासों से नक्सलियों सेंट्रल कमेटी तक पहुंचने पुलिस को बड़ी मदद मिलने वाली है।

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