अभी नहीं बनती खाने वाली बर्फ, फिर भी शहर में धड़ल्ले से बर्फगोले की बिक्री

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:36 AM IST

Rajnandgaon News - राजनांदगांव शहर में बर्फ की दो फैक्ट्रियां हैं, हैरत की बात यह है कि इन दोनों ही फैक्ट्रियों में खाने वाली बर्फ का...

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राजनांदगांव शहर में बर्फ की दो फैक्ट्रियां हैं, हैरत की बात यह है कि इन दोनों ही फैक्ट्रियों में खाने वाली बर्फ का निर्माण नहीं किया जाता है, फिर भी पूरे शहर में बर्फ गोला बिक रहा है।

अखाद्य बर्फ में नीले रंग के इस्तेमाल के आदेश के बाद से ही संचालकों के होश उड़े हुए हैं। लेकिन इस आदेश का पालन अब तक शुरू नहीं किया गया है। फूड सेफ्टी अफसरों की सख्ती पर संचालकों का कहना है कि लोकल मार्केट में नीला रंग मिल ही नहीं रहा है तो वे क्या कर सकते हैं। आदेश का पालन जरूरी है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो गैर खाद्य बर्फ खाने के लिए उपयोग में लाए जाएंगे, जिसका परिणाम सेहत के बिगड़ने पर पता चलेगा। भास्कर ने शहर में फैक्ट्रियों की पड़ताल की, यहां आरओ सिस्टम लगा हुआ पाया, हालांकि इसका उपयोग हो रहा है या नहीं इस पर संशय है। खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग ने गैर खाद्य बर्फ की पहचान के लिए उसमें इंडिगो कारमाइन या ब्रिलिएंट ब्लू कलर 10 पीपीएम का उपयोग करने कहा है। आदेश के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी है।

भास्कर रियलिटी चेक: बाजार में नहीं मिल रहा नीला रंग

राजनांदगांव. देखिए फैक्ट्रियों में इस तरह बनती है बर्फ।

एक दिन में बिकती है 8 हजार किलोग्राम बर्फ

शहर में एक दिन में 8 हजार किलोग्राम बर्फ बेचा जाता है। बर्फ की एक सिली 100 किलोग्राम की होती है। बाजार में एक किलोग्राम बर्फ 3 से 8 रुपए तक बेचा जाता है। संचालकों की मानें तो उन्होंने फैक्ट्री और दुकान में पोस्टर चस्पा कर दिया है कि ये बर्फ खाने के लिए नहीं है, अब दुकान से ले जाने के बाद उसे खाने में उपयोग करते हो तो इसमें वे क्या कर सकते हैं।

नल के पानी से बर्फ बनाने का दावा

फैक्ट्री संचालक नल के पानी से बर्फ बनाने का दावा कर रहे हैं, किल्लत है तो ऐसे में पानी की व्यवस्था कहां से हो रही इस पर भी सवाल खड़ा हो गया है। कुछ संचालक का कहना है कि वे बोर के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन सबके बीच सावधानी बरतने की जरूरत है, इसलिए बाजार में बिक रही बर्फ से बनी चीजों से दूरी बरतें। यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

डोंगरगढ़ और डोंगरगांव में भी संचालित है फैक्ट्री

राजनांदगांव के अलावा डोंगरगांव और डोंगरगढ़ में भी बर्फ फैक्ट्रियों का संचालन किया जा रहा है। यहां भी खाने वाला बर्फ नहीं बनाया जाता है। आदेश के मुताबिक बर्फ को नीले रंग में बनाना है ऐसे में पूरे राजनांदगांव जिले में बर्फ गोला की दुकानें ही गायब हो जाएंगी। क्योंकि अब तक इनका कारोबार अखाद्य बर्फ को बेच कर ही चल रहा था।

दो हजार लीटर वाला आरओ 7 लाख रुपए की

बर्फ के साथ डब्बा बंद पानी बेचने के चलते शहर में संचालित बर्फ फैक्ट्री की संचालकों ने आरओ सिस्टम लगा रखे है। लेकिन इसका इस्तेमाल बर्फ बनाने में किया जा रहा है या नहीं, इसका पुख्ता प्रमाण नहीं है, दो हजार लीटर वाला आरओ सिस्टम की कीमत सात लाख रुपए है, इसमें पानी को फिल्टर करने में बिजली खपत भी होती है। ऐसे में बर्फ की कीमतें भी बढ़ेंगी।

मॉनिटरिंग कैसे करेंगे इस पर बड़ा सवाल

खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग ने नीले रंग का बर्फ बनाने का आदेश तो दिया, लेकिन शहर समेत जिलेभर में संचालित फैक्ट्रियों में आदेश पालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। बर्फ का सीजन फरवरी तीसरे सप्ताह से शुरू होकर जून तक चलता है। ऐसे में आदेश को जल्द फॉलो नहीं कराया गया तो इस सीजन भर लोग अखाद्य बर्फ खाते रहेंगे। विभागीय अफसर सिस्टम फॉलो हो रहा है कि नहीं इसकी मॉनिटरिंग कैसे करेंगे इस पर भी बड़ा सवाल है।

जल्द फॉलो कराया जाएगा


भिलाई-राजनांदगांव, शनिवार 18 मई, 2019 | 20

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