निकली शोभायात्रा, भागवत कथा शुरू

Rajnandgaon News - ग्राम कोलियारा में भागवत कथा की शुरुआत धार्मिक भक्तिभाव के साथ हुई। गलियों में जहां शोभायात्रा निकाली गई। गौकर्ण...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:35 AM IST
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ग्राम कोलियारा में भागवत कथा की शुरुआत धार्मिक भक्तिभाव के साथ हुई। गलियों में जहां शोभायात्रा निकाली गई। गौकर्ण पूजा, वेदी पूजा, व्यास पूजा विधि विधान के साथ की गई। भागवत कथा में कथा वाचक सिलतरा के पंडित रामस्वरूप पांडे ने धार्मिक रीति से भागवत कथा की शुरुआत की। उन्होंने भागवत कथा का वाचन करते हुए हिरण्याक्ष वध और सृष्टि रचना को रोचक अंदाज में वर्णन किया।

पांडे ने कहा कि परमात्मा निराकार है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मा ने आदि देव भगवान की खोज करने के लिए कमल की नाल के छिद्र में प्रवेश कर जल में अंत तक ढूंढा। परंतु भगवान उन्हें कहीं भी नहीं मिले। ब्रह्मा ने अपने अधिष्ठान भगवान को खोजने में सौ वर्ष व्यतीत कर दिए। अंत में ब्रह्मा ने समाधि ले ली। इस समाधि द्वारा उन्होंने अपने अधिष्ठान को अपने अंतःकरण में प्रकाशित होते देखा। शेष जी की शैय्या पर पुरुषोत्तम भगवान अकेले लेटे हुए दिखाई दिए। ब्रह्मा जी ने पुरुषोत्तम भगवान से सृष्टि रचना का आदेश प्राप्त किया और कमल के छिद्र से बाहर निकल कर कमल कोष पर विराजमान हो गए।

इसके बाद संसार की रचना पर विचार करने लगे। ब्रह्मा ने उस कमल कोष के तीन विभाग भूः भुवः स्वः किए। ब्रह्मा ने सृष्टि रचने का दृढ़ संकल्प लिया और उनके मन से मरीचि, नेत्रों से अत्रि, मुख से अंगिरा, कान से, पुलस्त्य, नाभि से पुलह, हाथ से कृतु, त्वचा से भृगु, प्राण से वशिष्ठ, अंगूठे से दक्ष तथा गोद से नारद उत्पन्न हुए। इसी प्रकार उनके दायें स्तन से धर्म, पीठ से अधर्म, हृदय से काम, दोनों भौंहों से क्रोध, मुख से सरस्वती, नीचे के ओंठ से लोभ, लिंग से समुद्र तथा छाया से कर्दम ऋषि प्रकट हुए। इस प्रकार यह सम्पूर्ण जगत ब्रह्मा के मन और शरीर से उत्पन्न हुए।

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