उदयाचल संस्था बनाकर अंधत्व के खिलाफ शुरू की लड़ाई

Rajnandgaon News - शहर के नामचीन समासेवी हिम्मत भाई रायचा का रविवार रात हृदयगति रुकने से निधन हो गया। हिम्मतभाई रायचा को उनकी...

Bhaskar News Network

Apr 16, 2019, 07:35 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news the battle started against blindness by creating the emerging institution
शहर के नामचीन समासेवी हिम्मत भाई रायचा का रविवार रात हृदयगति रुकने से निधन हो गया। हिम्मतभाई रायचा को उनकी समाजसेवा के लिए केवल शहर में ही बल्की पूरे प्रदेश में जाना जाता था। हिम्मत भाई समासेवा के लिए जिले की सबसे अग्रणी संस्था उदयाचल के संस्थापक सदस्य थे। आज इस संस्था को धर्मार्थ के लिए पूरे प्रदेश में जाना जाता है।

पढ़िए उदयाचल संस्था के संरक्षण डॉ. पुखराज बाफना की कलम से िहम्मत भाई के समाज सेवा की कहानी : पुराने समय में मोतियाबिंद ग्रामीणों के लिए भयानक बीमारी साबित होती थी। इलाज के अभाव में लाेगों की आंख की राेशनी चली जाती थी, मोतियाबिंद आंखों में ही पक जाया करते थे, खासकर आदिवासी अंचल के लोग इलाज के अभाव में इससे बुरी तरह प्रभावित थे। इसे देखकर 1968 में हिम्मत भाई रायचा ने अपने 8 साथियों के साथ मिलकर उदयाचल संस्था की नींव रखी। इस संस्था का मुख्य उददेश्य अंधत्व के खिलाफ लड़ाई लड़ने की थी, संस्था के माध्यम से गांव-गांव में कैंप की शुरुआत की गई, इससें ग्रामीणों के नेत्र की जांच और इलाज पूरी तरह नि: शुल्क किया जाने लगा। मोतियाबिंद से पीड़ित लोगों को बगैर किसी शुल्क के इलाज दिए जाने की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे संस्था का काम व्यापक होता चला गया और हिम्मत भाई रायचा की समाज सेवा की सोच से संस्था ने ऐसा मुकाम हासिल किया कि अंधत्व निवारण के क्षेत्र में नि: शुल्क सेवा देने वाली उदयाचल प्रदेश की सबसे बड़ी संस्था बन गई। ये मुकाम को हासिल करने में हिम्मत भाई रायचा की बड़ी सोच, नि: स्वार्थ सेवा का भाव और उनकी कड़ी मेहनत कारगर साबित हुई।

हिम्मत भाई की उम्र 75 वर्ष हो चुकी थी, लेकिन उनके समाजसेवा का जूनून बरकरार था। वे रोजाना उदयाचल संस्था में सेवा देने पहुंचते थे। वे सुबह और शाम 3-3 घंटे संस्था में समय बिताते।

हिम्मत भाई रायचा

मेरा नेत्र दान कर देना ताकि किसी को रोशनी मिले

अपने जीवन काल में अंधत्व निवारण के लिए व्यापक कार्य करने वाले हिम्मत भाई रायचा ने जिते जी ही नेत्रदान की घोषणा की थी। उन्होंने अपने परिजन और संस्था के साथियों से कह रखा था कि मेरी मृत्यु के बाद मेरी आंखें दान कर दी जाए, ताकि मेरी आंखों से जरूरतमंदों को रोशनी मिल सके, वे इस दुनिया को देख सके।

उपलब्धि: 1000 लोगों का एक साथ किया ऑपरेशन

उदयाचल संस्था ने धीरे-धीरे नेत्र के इलाज और मोतियाबिंद की दिशा में ऐसी सफलता हािसल की है कि एक साथ 1 हजार मोतियाबिंद से पीड़ितों के एक ही दिन में ऑपरेशन का रिकाॅर्ड बनाने वाली उदयाचल संस्था प्रदेश की एकमात्र है। देश में भी इतनी बड़ी संख्या में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने वाली संस्था गिनती की है। ये कार्य भी हिम्मत भाई के समाजसेवा के जूनून से पूरा हो सका।

रेटिना सेंटर बड़ा सपना

आंखों की परेशानी की सबसे बड़ी वजह रेटिना से जुड़ी रहती है। प्रदेश में रेटिना के इलाज के लिए कोई भी बड़ी संस्था है। ऐसे में हिम्मत भाई रायचा ने उदयाचल में रेटिना संेटर शुरू करने का सपना देखा था। वे रेटिना सेंटर की शुरुआत को लेकर सक्रिय रहे।

लोगों का नि: शुल्क इलाज

जिस उदयाचल संस्था की स्थापना हिम्मत भाई रायचा ने अपने 8 सदस्यों के साथ 1968 में की थी, वह अब व्यापक रूप ले चुकी है। उदयाचल में 100 बिस्तर का अस्पताल भी है। रोजाना 200 लोगों के नेत्र का इलाज और जांच नि: शुल्क किया जाता है।

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