हादसे का इंतजार मेडिकल कॉलेज अस्पताल की अव्यवस्था दूर नहीं हो रही

Rajnandgaon News - मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में बड़ी खामी सामने आई है। प्रदेश स्तर पर किए गए सर्वे में...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 03:22 AM IST
Rajnandgaon News - chhattisgarh news the disorder of medical college hospital is not getting away
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में बड़ी खामी सामने आई है। प्रदेश स्तर पर किए गए सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। दरअसल अस्पताल में 6 व्यस्क वेंटिलेटर में से 3 वेंटिलेटर खराब है। वहीं 4 में से 2 चाइल्ड वेंटिलेटर का इंस्टॉलेशन किया ही नहीं गया है। इससे भी ज्यादा गंभीर बात ये है कि डॉक्टरों की गैरहाजिरी में वेंटिलेटर की निगरानी करने वाले स्टाफ कर्मचारियों को इसके संचालन से संबंधी प्रशिक्षण आज तक दिया ही नहीं गया है। इन हालातों में मरीजों को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

बीते दिनों चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (डीएमई) की तीन सदस्यीय टीम मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा करने आई थी, उन्होंने ओपीडी, वार्ड, पैथोलॉजी, ओटी में जाकर क्रमवार उपकरणों के इस्तेमाल का भौतिक सत्यापन किया। निरीक्षण में पता चला था कि सप्लाई के बाद भी ब्रांकोस्कोपी का स्टालेशन नहीं किया गया है। इसी दौरान वेंटिलेटर की स्थिति का भी जायजा लिया गया। अस्पताल में कुल 10 वेंटिलेटर है जिसमे से कुछ वेंटिलेटर खराब मिले। इस पर अफसरों ने नाराजगी जाहिर की।

तीन वेंटिलेटर खराब पड़े, दो चाइल्ड वेंटिलेटर का अब तक नहीं किया इंस्टॉलेशन प्रशिक्षण लिया ही नहीं पर डॉक्टर की गैरहाजिरी में नर्सेस करती हैं इसकी निगरानी

अव्यवस्था: डीएमई की टीम के दौरे के बाद भी बदइंतजामी

वेंटिलेटर की निगरानी गैर प्रशिक्षित नर्सेस कर रही हैं। फाइल फोटो

शिफ्टिंग के पेंच में रोका

पेंड्री में निर्माणाधीन भवन में शिफ्टिंग के फेर में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आधुनिक उपकरणों का इंस्टॉलेशन नहीं किया जा रहा है। इससे मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसमें वेंटिलेटर भी शामिल है। इसके अलावा अगस्त महीने में ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिजिटल ब्रांकोस्कोपी सिस्टम दिया गया था। उसी समय इंस्टॉलेशन का ट्रायल किया गया। लेकिन मशीन चालू नहीं की गई।

अब प्रशिक्षण के निर्देश

अस्पताल में डॉक्टर हर समय मौजूद नहीं रहते। वेंटिलेटर में रखे गए मरीज की पल-पल निगरानी करनी पड़ती है। इसलिए स्टॉफ कर्मचारियों को ट्रेंड होना जरूरी है। चूंकि वेंटिलेटर गहन तकनीकी उपकरण है, इसलिए इसको संचालित करने के लिए स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देना जरूरी है। अभी अनट्रेंड कर्मचारियों से वेंटिलेटर की निगरानी करा रहे है। जो मरीजों के घातक हो सकता है। एक वेंटिलेटर की निगरानी के लिए कम से कम 3 स्टॉफ कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना जरूरी है।

रोगी को सांस लेने में मदद करती है वेंटिलेटर

वेंटिलेटर एक मशीन है जो रोगी को सांस लेने में मदद करती है। इसके लिए मुंह नाक या गले में एक छोटे से कट के माध्यम से एक ट्यूब श्वांस नली में डाली जाती है। इसे मैकेनिकल वेंटिलेशन भी कहा जाता है। इस मशीन की जरूरत तब पड़ती है जब वह प्राकृतिक तरीके से अपने आप सांस लेने में सक्षम नहीं होता है। यह मशीन शरीर में ऑक्सीजन भेजती है और कार्बन डाईआक्साइड बाहर निकालती है। किसी व्यक्ति के वेंटिलेटर पर होने के सबसे गंभीर जोखिम में से एक निमोनिया है। रोगी के वायुमार्ग में रखे सांस ट्यूब से बैक्टीरिया उसके फेफड़े में प्रवेश कर सकता है।

हां कुछ खराब है, हम मशीनों को ठीक करवा रहे हंै


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