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छग के डैम से महाराष्ट्र व एमपी के खेत लहलहा रहे, यहां के खेत सूखे

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 03:22 AM IST

Rajnandgaon News - जिले के सीमावर्ती गांव बागनदी में मनोहर सागर जलाशय है जिसे ग्रामीण बागनदी जलाशय के नाम से जानते हैं पर विडंबना है...

Rajnandgaon News - chhattisgarh news the fields of maharashtra and mp were kept afloat from chag39s dam here the fields dried up
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जिले के सीमावर्ती गांव बागनदी में मनोहर सागर जलाशय है जिसे ग्रामीण बागनदी जलाशय के नाम से जानते हैं पर विडंबना है कि हमारी जमीन पर सैकड़ों एकड़ में फैला जलाशय है जो बारहों माह लबालब रहता है पर यहां से राजनांदगांव को एक बूंद पानी नहीं मिलता। क्षेत्र के सैकड़ों एकड़ खेत सूखे पड़े रहते हैं। जलाशय से लगे खेतों में भी पानी नहीं दिया जाता है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के 32 गांव के किसान लामबंद हो गए हैं और हर हाल में इस जलाशय से खेतों में सिंचाई के लिए पानी की मांग कर रहे हैं। बुधवार को क्षेत्र के किसान बड़ी संख्या में राजनांदगांव मुख्यालय में इकट्ठा हुए और राजधानी पहुंचकर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवाज खान के नेतृत्व में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर पानी देने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में उचित पहल का आश्वासन दिया है।

बागनदी में जब जलाशय का निर्माण हुआ तब छग अस्तित्व में नहीं था बल्कि मध्यप्रदेश था। बंटवारे के बाद छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश अलग हुए पर उस दौर में मनोहर जलाशय से सिंचाई के लिए पानी लेने पर कोई निर्णय नहीं हुआ।

व्यथा: बागनदी गांव में स्थित है जलाशय

राजनांदगांव.जलाशय से पानी देने की मांग को लेकर किसान एकजुट हुए।

जलाशय पर पूरा नियंत्रण महाराष्ट्र सरकार का है

इस जलाशय से महाराष्ट्र के सैकड़ों एकड़ खेतों में सिंचाई की जाती है। यहां से मध्यप्रदेश के बालाघाट तक पानी पहुंचाया जाता है। दोनों ही राज्यों में इस जलाशय के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के साथ ही पेयजल के रूप में भी किया जाता है। स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ में जलाशय है पर पूरा नियंत्रण महाराष्ट्र सरकार के हाथों में हैं। लंबे समय से क्षेत्र के किसान पानी के लिए संघर्षरत हैं पर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं किए जाने से अब तक सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है। क्षेत्र के किसान अब इसे लेकर नए सिरे से संघर्ष कर रहे हैं।

बनाई संघर्ष समिति, बोले पानी लेकर ही रहेंगे

जलाशय से खेतों के लिए पानी लेने के लिए क्षेत्र के 32 गांवों के किसानों ने संघर्ष समिति बनाई है। पेंड्रीडीह के सरपंच कमलेश यादव ने क्षेत्र के किसानों को गंभीर मसले को लेकर जागरूक करना शुरू किया। क्षेत्र के सभी किसान अब इस मुद्दे पर एकजुट हैं और हर हाल में पानी चाहते हैं, क्योंकि पानी के अभाव में सिर्फ एक ही फसल ले पाते हैं। बारिश ठीक से नहीं होने की स्थिति में सूखे की मार झेलते हैं। किसानों ने बताया कि इस जलाशय से पानी मिलने से क्षेत्र के सैकड़ों एकड़ खेतों में डबल फसल लिया जा सकेगा। इससे उन्हें लाभ होगा।

पनियाजोब जलाशय के लिए भी संघर्ष कर रहे

बरनारा और पनियाजोब क्षेत्र के किसान भी सिंचाई के लिए पानी के लिए तरसते हैं। इस क्षेत्र के 17 गांव के किसानों की मांग है कि लोढ़ा नाले के पानी को सीधे पनियाजोब जलाशय में गिराया जाए। इससे कम खर्च में ही सैकड़ों एकड़ में पानी पहुंचाया जा सकेगा। माेंगरा बैराज क्षेत्र के 52 गांवों के किसान भी पानी को लेकर लामबंद हैं। सीएम से गुहार लगाई है।

बजट में प्रधानपाठ बैराज के लिए 30 करोड़

इधर, बुधवार को पत्रवार्ता में कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष नवाज खान ने बताया कि राज्य के बजट में मुढ़पार स्थित प्रधानपाठ बैराज के लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। नहर लाइन का विस्तार होगा, इससे लगभग 48 गांवों तक पानी पहुंचेगा। नवाज ने कहा कि भाजपा शासन काल में कई बार इसके लिए मांग उठाई गई पर पहल नहीं हुई थी पर कांग्रेस की सरकार आते ही बजट में राशि का प्रावधान किया है। नवाज ने बताया कि राज्य शासन की ओर नरूवा, घुरुवा, तरिया, बारी के संवर्धन के लिए काम किया जा रहा है।

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