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बेटी के बिदा के रचयिता की विदाई हृदय विदारक

Rajnandgaon News - प्रतिष्ठित साहित्यकार और पत्रकार पं. श्यामलाल चतुर्वेदी के निधन पर दिग्विजय कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. चंद्रकुमार...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:10 AM IST
Rajnandgaon News - farewell to the creator of daughter bida39s heart disfigurement
प्रतिष्ठित साहित्यकार और पत्रकार पं. श्यामलाल चतुर्वेदी के निधन पर दिग्विजय कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. चंद्रकुमार जैन ने भावसुमन अर्पित करते हुए कहा है कि बेटी के बिदा जैसी मार्मिक रचना के सृजेता ने अनगिनत चाहने वालों को अलविदा कहकर स्तंभित कर दिया है। बीसवीं और इक्कीसवीं सदी के 75 सृजनशील वर्ष हिंदी और छत्तीसगढ़ी की सर्जना में बिताकर स्व. चतुर्वेदी जी एक तरह से मिथक बन गए। उनके बिछोह की भरपाई संभव नहीं है।

डॉ. जैन ने चुनिंदा साहित्यिक आयोजनों के अलावा 2005-06 में मुक्तिबोध स्मारक और त्रिवेणी परिसर में पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी के साथ तीन दिन तक साझा किए पलों को याद करते हुए कहा कि भाषा पर उनका अद्भुत अधिकार देखते ही बनता था। वे सिर से पांव तक सृजन, संवेदन और अभिव्यक्ति की बेचैनी में डूबे रहते थे। उनका मुस्कुराता मुखमण्डल सहज स्नेह की सौगातें दे जाता था। वहीं, उनमें सच के पक्ष में दोटूक कहने का अदम्य साहस भी आजीवन बरकरार रहा।

सदी की महान उपलब्धि बताई :- मुक्तिबोध स्मारक की स्थापना और त्रिधारा कार्यक्रम की उन्होंने मुक्त कंठ से सराहना करते हुए उसे सदी की महान उपलब्धि निरूपित किया था। मुक्तिबोध स्मारक समिति और अन्य धुरंधर साहित्यकारों के साथ बड़े प्रेम से तस्वीरें उतरवाई थीं।

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