--Advertisement--

अप्रैल की जगह नवंबर में सुरक्षा निधि ने उड़ाए होश, दफ्तर के चक्कर लगा रहे

Rajnandgaon News - अप्रैल की जगह नवंबर के बिजली बिल में सुरक्षा निधि जोड़े जाने के निर्णय ने लोगों के होश उड़ा दिए है। गलतफहमी को दूर...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:06 AM IST
Rajnandgaon News - in november instead of april the security fund raised the whistle circling the office
अप्रैल की जगह नवंबर के बिजली बिल में सुरक्षा निधि जोड़े जाने के निर्णय ने लोगों के होश उड़ा दिए है। गलतफहमी को दूर करने के लिए उपभोक्ता सीएसपीडीसीएल कंपनी दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। यहां तक की कॉल सेंटर में भी थोक में ऐसी शिकायतें दर्ज कराई जा रही है। दरअसल कंपनी ने जन साधारण को सूचना दिए बगैर ही नियमों में बदलाव कर दिया। जिससे उपभोक्ता परेशानी में आ गए गए, जिनको जवाब देने से अधिकारी बच रहे हैं।

इस महीने बढ़े हुए बिल को लेकर सैंकड़ों की संख्या में शिकायत दर्ज कराई गई है। ज्यादातर शिकायतों में बिल बढ़त सुरक्षा निधि के कारण होना बताया गया। लेकिन दिक्कत वाली बात ये रही कि लोगों को इसके संबंध में जानकारी नहीं है, वे सवालों के जवाब जानने के लिए ऑफिस के चक्कर लगाने मजबूर है। अधिकारियों ने खुद कबूला कि 90 फीसदी उपभोक्ताओं को सुरक्षा निधि के संबंध में जानकारी नहीं है। भास्कर के सवाल पर अफसर ने कहा कि वे लोगों पर आर्थिक बोझ नहीं डालना चाहते थे, इसलिए अप्रैल की जगह नवंबर में सुरक्षा निधि जोड़ने का फैसला किया गया। हालांकि यह निर्णय अक्टूबर में लिया जाना था, लेकिन आचार सहिंता के कारण कार्रवाई एक महीने आगे बढ़ गई।

तीन महीने के बराबर बिल: सुरक्षा निधि के तौर पर दो महीने का औसत बिल और एक माह का वास्तविक बिल, यानी इस महीने का बिजली बिल तीन महीने के बराबर आया है। इससे बड़ा वर्ग बेचैन हो गया है। जिन घरों में ढाई से तीन हजार रुपए का औसत बिल आता है, उनके यहां सुरक्षा निधि को मिलाकर 10 से 12 हजार रुपए तक का बिल पहुंचा है। लोगों का तर्क है कि हर जगह केवल एक बार सुरक्षा निधि ली जाती है, लेकिन बिजली कंपनी हर साल जनवरी के बिल में इस मद में दो महीने का अतिरिक्त बिल क्यों जोड़ रही है।

राजनांदगांव. बढ़े बिजली बिल का कारण जानकर ही भुगतान कर रहे।

कंपनी का नियम,जमा रहना चाहिए सुरक्षा निधि

कंपनी की नीति है कि हर उपभोक्ता की दो माह के बिल के बराबर राशि सुरक्षा निधि के रूप में जमा रहनी चाहिए। ताकि उपभोक्ता बिल अदा न कर पाए तो इस रकम से क्षतिपूर्ति हो जाए। इसकी दूसरी वजह ये है कि बिलिंग की प्रक्रिया यानी रीडिंग, बिल जारी करने तथा अदा करने की आखिरी तिथि वगैरह से लोगों को एक महीने की छूट ऐसे ही मिल जाती है। इसीलिए सुरक्षा निधि दो माह के बिल के बराबर रखी गई है।

सुरक्षा निधि में 6% मिलता है ब्याज

सुरक्षा निधि की गणना के लिए पिछले एक साल के बिल मॉडल हैं। 12 महीने के बिलों को जोड़कर एक महीने का औसत निकाला जाता है। 4500 को 12 से भाग देने पर एक महीने का औसत बिल 375 रुपए है। इसका दोगुना यानी 750 रुपए सुरक्षा निधि होगी। अफसरों की माने तो सुरक्षा निधि पर उपभोक्ताओं को 6 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाता है।

60 दिन के बिल के बराबर सुरक्षा निधि लेना है


नांदगांव शहर में 242 कनेक्शन काटे गए

शहर में बकायादारों का बिजली कनेक्शन काटने 15 टीम तैनात की गई है। शुक्रवार और शनिवार को शहर में 242 कनेक्शन काटे गए। 22.29 हजार रुपए की वसूली की गई। प्रथम तौर पर 10 हजार से अधिक बकाया वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे जा रहे हंै। यदि कोई तत्काल बिल भुगतान करता है, तो कनेक्शन काटने की कार्रवाई रोक दी जाएगी।

X
Rajnandgaon News - in november instead of april the security fund raised the whistle circling the office
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..