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मनहारी की दुकान खोलने लिया था कर्जा नोटिस पर बोले-इतनी रकम नहीं दे पाऊंगा

Rajnandgaon News - साहब...इतने रुपए नहीं दे पाऊंगा, मैं बीमार आदमी हूं। रकम थोड़ा कम कर दीजिए। किस्त में अदायगी का वादा करता हूं। ये बाते...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:11 AM IST
Rajnandgaon News - manhari39s shop was opened speak on a loan notice i will not be able to pay so much money
साहब...इतने रुपए नहीं दे पाऊंगा, मैं बीमार आदमी हूं। रकम थोड़ा कम कर दीजिए। किस्त में अदायगी का वादा करता हूं। ये बाते बुजुर्ग मोहम्मद फकीर की जुबान पर थी। जब वे शनिवार को जिला न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत पहुंचे। डोंगरगांव निवासी फकीर ने छुरिया में मनिहारी की दुकान खोलने के लिए कुछ साल पहले छग राज्य ग्रामीण बैंक से कर्ज लिया था। किस्तों में ऋण वापस कर ही रहे थे कि इस बीच उनकी तबियत बिगड़ गई। इलाज में किस्त के पैसे डूब गए। वे बैंक का कर्ज नहीं उतार पाए। तंग आकर बैंक ने न्यायालय के मार्फत नोटिस भिजवाया। मामला बिगड़ न जाए इसलिए वे रायपुर के एम्स अस्पताल के बिस्तर से उठकर सीधे राजनांदगांव पहुंचे और बैंक अफसरों से कर्ज रकम कम करने की मिन्नत करते रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बुजुर्ग आदमी के मामले में दिलचस्पी दिखाई। फकीर को जो नोटिस दिया गया था उसमें साफ किया गया कि 96855 रुपए का कर्ज बाकी है। इसका ब्याज 42625 रुपए है। कुल 139480 रुपए देय है। समझौते करने के लिए बैक अधिकारी ने ब्याज में 26337 रुपए का छूट देने और मूलधन में 17908 रुपए कम करने की बात कही। इस तरह फकीर को 53723 रुपए देने को कहा गया। चूंकि फकीर समझौते के लिए एक भी रुपए नहीं लाए थे, इसलिए बैंक अधिकारियों ने उन्हें 11 हजार रुपए के साथ आने के लिए कहा है। इसके बाद समझौता किया जाएगा।

मोहम्मद फकीर

राजनांदगांव. लोक अदालत का जायजा लेते डीजे निर्मल मिंज।

इनकी भी सुनें, फसल बर्बाद तो नहीं चुकाए

ग्राम बाकल पनेका निवासी फूल बाई सोनवानी और गयाबाई गायकवाड़ ने स्वराेजगार के लिए बैंक से लोन लिया था। लोन में लिए गए रुपए का कुछ अंश खेती किसानी में भी लगाई। दुकान में कुछ खास कमाई नहीं हो रही है। 2017 में सूखे की वजह से फसल बर्बाद हो गई। यही वजह रही कि वे कर्ज की भरपाई नहीं कर पाए। नोटिस मिलने के बाद वे लोक अदालत पहुंचे थे, यहां समझौते के तहत कुछ राशि कम कर भुगतान करने का फिलहाल निर्णय लिया गया है।

फैमिली कोर्ट में पांच मामलों में राजीनामा भी

नेशनल लोक अदालत में बैंक ऋण से संबंधित मामले सर्वाधिक रहे। इनके अलावा फैमिली कोर्ट में पांच प्रकरणों पर राजीनामा कराया गया। ज्यादातर मामले दो तीन वर्षों से चल रहे थे। परिसर में हेल्थ कैंप भी लगाया गया था। यातायात पुलिस स्टॉल लगाकर लोगों को ट्रैफिक नियमों के पालन की हिदायत दे रही थी। इसके अलावा ब्रीथ एनालाइजर का भी प्रदर्शन किया गया। समझौते के लिए पहुंचने वाले लोगों के लिए लंगर का भी आयाेजन किया गया था।

बैंकर्स की लापरवाही की भी खुली पोल

लोक अदालत में बैंकर्स की लापरवाही की भी पोल खुली। ग्रामीण बैंक ने न्यायालय के मार्फत छुरिया ब्लॉक के ग्राम धामाबंजारी की जय बाबा हनुमान संघ को कर्ज अदायगी के लिए नोटिस भेजा था। संघ की ओर से हेमंत सहारे समझौते के लिए पहुंचे थे। हेमंत की माने तो संघ ने 2013 में 1.28 लाख रुपए लोन लेकर ईंट भट्‌ठा शुरू की थी, जो आज भी चल रही है। जिस स्कीम के तहत उन्होंने लोन लिया था, उसमें 1.28 लाख रुपए अनुदान था। इसलिए संघ ने उतनी ही राशि निकाली।

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